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Heart Failure के मरीज भी जी सकते हैं लंबा जीवन अगर समय पर हो जाए डायग्नोज

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डॉक्टरों की मानें तो भारत में हार्ट फेलियर के मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है बीमारी की पहचान में होने वाली देरी। ज्यादातर मरीज इलाज के लिए उस वक्त आते हैं जब उनकी बीमारी अडवांस्ड स्टेज में पहुंच जाती है। कार्डियॉलजिस्ट्स की मानें तो वैसे लोग जिनमें पहले से हार्ट डिजीज का खतरा है या फिर हार्ट अटैक की हिस्ट्री रह चुकी है, या हाई ब्लड प्रेशर और डायबीटीज की समस्या है उन्हें नियमित रूप से स्क्रीनिंग करवानी चाहिए ताकि हार्ट फेलियर का पता शुरुआती स्टेज में ही लग जाए और मौत की आशंका को रोका जा सके।

देर से पता चलने पर एक साल में 50% मरीजों की मौत
एम्स के कार्डियॉलजी विभाग के प्रफेसर डॉ संदीप सेठ कहते हैं, वैसे लोग जिनमें हार्ट फेलियर की समस्या बाद के स्टेज में पता चल पाती है उनमें से 50 प्रतिशत लोगों की एक साल के अंदर मौत हो जाती है। ज्यादातर मरीज दवा का नियमित सेवन और लाइफस्टाइल में किए जाने वाले जरूरी बदलाव पर अमल नहीं करते जिस वजह से बीमारी बढ़ जाती है। इस वजह से मौत की आशंका अधिक होती है।

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जिंदगी का अंत नहीं है हार्ट फेलियर
एम्स में एक हार्ट फेलियर क्लिनिक चलाया जाता है जहां हार्ट फेलियर नर्सों की बहाली की गई है जो मरीज के परिवार वालों की काउंसलिंग कर उन्हें यह समझाने की कोशिश करती हैं कि मरीज के लिए समय पर दवा लेना, फ्लूइड और लिक्विड का कम सेवन करना, नमक के सेवन पर नियंत्रण करना और नियमित रूप से एक्सर्साइज करना कितना जरूरी है। फॉर्टिस अस्पताल की सीनियर कार्डियॉलजिस्ट डॉ अपर्णा जस्वाल कहती हैं, हार्ट फेलियर जिंदगी का अंत नहीं है। ज्यादातर मरीज जिन्हें हार्ट फेलियर डायग्नोज होता है, वह भी नियमित रूप से दवा का सेवन कर सामान्य जीवन जी सकते हैं।

हार्ट फेलियर को लेकर लोगों के बीच जागरुकता की कमी
भारत में नोवार्टिस के एमडी संजय मुर्देश्वर कहते हैं, हार्ट फेलियर जानलेवा होने के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है जो दुनियाभर में 2 करोड़ 60 लाख लोगों को प्रभावित करती है जिसमें से अकेले भारत में हार्ट फेलियर के मरीजों की संख्या 80 लाख से लेकर 1 करोड़ के आसपास है। यह बीमारी दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोगों की जान ले रही है, बावजूद इसके बीमारी को लेकर लोगों के बीच जागरुकता की कमी है। करीब 60 प्रतिशर हार्ट फेलियर के मरीज ऐसे हैं जिनकी बीमारी या तो डायग्नोज ही नहीं होती या फिर गलत डायग्नोज होती है। हम यह मानते हैं कि अगर समय पर मरीज को इलाज मिल जाए तो हार्ट फेलियर के मरीज भी अस्पताल से बाहर आ सकते हैं और लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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