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क्या शेयरहोल्डर्स को होगा फायदा रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिस्ट्रक्चरिंग से

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मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से दूसरी बड़ी भारतीय कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज एक बड़ी रिस्ट्रक्चरिंग से गुजर रही है। वैल्यू अनलॉक करने और कर्ज घटाने की योजनाओं के तहत इसने पिछले दिनों अपने ऑयल टु केमिकल्स बिजनस (रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल बिजनस) में 20 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरामको को बेचने की घोषणा की थी। हालांकि ऐसी कोई शर्त नहीं है कि आरआईएल इस कदम को अंजाम तक पहुंचाएं।
इस डील के लिए एंटरप्राइज वैल्यू करीब 75 अरब डॉलर होने का अनुमान है। ग्लोबल ऑयल कंपनी अरामको के साथ इस प्रस्तावित सौदे से रिलायंस के लिए स्थिति बेहतर होगी, खासकर इसलिए कि इसके रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल डिविजन को अभी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले रिलायंस ने अपने फ्यूल रिटेल नेटवर्क में 49 प्रतिशत हिस्सा ब्रिटिश पेट्रोलियम को बेचने का निर्णय किया था। इन सभी स्टेक सेल में अहम बात यह है कि ये विनिवेश जानी-मानी कंपनियों के साथ हो रहे हैं और प्रीमियम वैल्यूएशन पर हो रहे हैं।

अगले 2 से 3 साल में कर्जमुक्त होने की योजना
रिलायंस के लिए कर्ज की ज्यादा मात्रा भी चिंता की एक वजह है। इससे जुड़ी चिंता दूर करने के लिए रिलायंस ने इन विनिवेशों से हासिल रकम से अपना कर्ज आधा घटाने की योजना बनाई है। इससे भी अहम बात यह है कि रिलायंस ने रिलायंस जियो, रिलायंस रिटेल जैसी अपनी कई सब्सिडियरीज को लिस्ट कराने और 2021-22 तक कर्ज मुक्त होने की योजना बनाई है। कर्ज घटने से मुनाफा बढ़ेगा क्योंकि इंट्रेस्ट कॉस्ट में काफी कमी आ जाएगी।

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रिलायंस रिटेल पहले ही देश की सबसे बड़ी ऑर्गनाइज्ड रिटेलर बन चुकी है। हालांकि ऑर्गनाइज्ड रिटेल सेगमेंट अभी भारत में काफी छोटा है, लिहाजा इस मोर्चे पर बढ़त की गुंजाइश सीमित है। दूसरे शब्दों में कहें तो रिलायंस रिटेल को अगले कुछ दशकों में उभरने वाली भारत की कंजम्पशन स्टोरी पर दांव लगाने का जरिया माना जा सकता है।

जियो का सब्सक्राइबर बेस 50 करोड़ बढ़ने की उम्मीद
रिलायंस जियो पहले ही देश की सबसे बड़ी मोबाइल प्लेयर बन चुकी है और अपना सब्सक्राइबर बेस करीब 50 करोड़ तक बढ़ाने की उम्मीद कर रही है। जियो के बिजनस को जियोफाइबर के लॉन्च से और रफ्तार मिलेगी। जियोफाइबर की प्राइसिंग जियो मोबाइल की तरह ‘आक्रामक’ नहीं है। जियोफाइबर का शुरुआती 100 जीबी डेटा का 100एमबीपीएस स्पीड वाला प्लान 699 रुपये महीने का है। यह स्थिति इंडस्ट्री के लिए भी पॉजिटिव है। फिलहाल शेयर प्राइस में मूवमेंट इस लॉन्च की सफलता पर निर्भर करेगा।

ऐनालिस्ट्स इस शेयर पर रिस्ट्रक्चरिंग से जुड़ी योजना के कारण बुलिश हो रहे हैं। वे 2005 और 2006 में उठाए गए ऐसे ही कदमों का हवाला दे रहे हैं, जब रिलायंस के शेयरहोल्डर्स को उसकी सब्सिडियरीज में लिस्टिंग के पहले 1:1 के अनुपात में शेयर मिले थे और इसके चलते उनकी कंबाइंड वैल्यू करीब 40 प्रतिशत बढ़ गई थी।

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