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UNHRC में जम्मू-कश्मीर:भारत का पाक के झूठ पर जवाब, झूठ की कहानी सुनाता है आतंक का केंद्र

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भारत ने UNHRC में पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर पर करारा जवाब दिया। भारत ने पाकिस्तान को दो टूक कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का आतंरिक मामला है। उन्होंने कहा कि झूठ की यह कहानी वैश्विक आतंकवाद के केंद्र से आती है। भारत की तरफ से विदेश मंत्रालय की सचिव विजय ठाकुर सिंह ने पाक को जवाब देते हुए कहा कि कश्मीर में हालात धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं। इस दौरान विदेश मंत्रालय की सचिव के साथ पाकिस्तान में भारत के राजदूत के तौर पर काम कर चुके अजय बिसारिया भी मौजूद थे। इससे पहले पाकिस्तान ने 115 पेज के झूठ के पुलिंदे के साथ UNHRC में कश्मीर की स्थिति को लेकर भारत पर आरोप लगाए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत पर कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।

विदेश मंत्रालय की सचिव ने कहा, ‘हमारा संविधान किसी भी व्यक्ति से भेदभाव के हर किसी नागरिक को बराबर सम्मान देता है। हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका, फ्री मीडिया और हमारा समाज मानवाधकारो की रक्षा करता है। हमारे हाल के कदम से जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्रत्येक नागरिक की तरह समान अधिकार मिलेंगे। हमारे हाल के कदम से जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्रत्येक नागरिक की तरह समान अधिकार मिलेंगे। इस कदम से लिंग भेद समाप्त होगा। बाल अधिकारों को बल मिलेगा। ‘

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उन्होंने कहा, ‘दुनिया जानती है कि झूठ की यह कहानी वैश्विक आतंकवाद के केंद्र से आती है, जहां आतंक को आश्रय दिया जाता है। हम इस बात को फिर से दोहराना चाहते हैं कि संसद द्वारा पारित अन्य विधानों की तरह यह संप्रभु निर्णय पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।’

उन्होंने कहा, ‘भारत विविधताओं से भरा देश है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का भी सौभाग्य है। इससे पिछले साल ही दुनिया ने अब तक की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रकिया को होते हुए देखा, जहां 10 लाख पोलिंग स्टेशनों ने 90 करोड़ भारतीय वोटरों ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया। लोकतंत्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अडिग है, जिसकी प्रशंसा दुनिया भर में हुई।’

हमारे लिए हमारा संविधान सर्वोपरि है, जो हर भारतीय को समान अधिकार का अधिकार देता है। यह न्याय, स्वतंत्रता और समानता की सुरक्षा करता है और सभी के बीच इसी को बढ़ावा देता है। धर्मनिरपेक्ष राजनीति में हमारा विश्वास बेजोड़ है। हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका इन मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं की संरक्षक है। हमारी स्वतंत्र मीडिया, जीवंत नागरिक समाज और निष्पक्ष संस्थाएं समाज के सभी वर्गों के मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए एक प्रभावी ढांचा प्रदान करती हैं।

जम्मू-कश्मीर के मामले पर जवाब देते हुए विजय ठाकुर सिंह ने कहा कि भारत ने हाल ही में अपने संविधान के मुताबिक कुछ अहम कदम उठाए हैं, जो जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के नागरिकों को आगे बढ़ाने में अहम साबित होंगे। इसके परिणाम स्वरूप वहां संपत्ति के अधिकार और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधित्व सहित लिंग भेदभाव को खत्म करने में मदद मिलेगी। शिक्षा, सूचना का और काम करने का अधिकार मिलेगा। शरणार्थियों और विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों के खिलाफ लंबे समय से चलता आ रहा भेदभाव खत्म हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि ये सभी फैसले पूरी बहस के बाद हमारी संसद ने लिए हैं। यह बहस पूरे देश ने देखी और उसका समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘हम पूरी तरह फिर से साफ कर देना चाहते हैं कि भारत की संसद द्वारा लिए इस फैसले की तरह अन्य सभी फैसले पूरी तरह हमारा आंतरिक मामला है। कोई भी देश अपने आतंरिक मामलों में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं कर सकता, भारत तो बिल्कुल नहीं।’

यह बाेला था पाक
इससे पहले पाकिस्तान ने यूएन से इस मामले में दखल देने की मांग की थी। कुरैशी ने यूएनएचआरसी में बीजेपी के घोषणापत्र का जिक्र भी कर डाला। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि इसमें कश्मीर में जबरन मुस्लिमों को अल्पसंख्यक बनाने की बात कही गई थी। पाक विदेश मंत्री ने यूएनएचआरसी से कहा कि कश्मीर भारत का आतंरिक मुद्दा नहीं है। कश्मीर में कब्रिस्तान जैसी खामोशी छाई हुई है। वहां नरसंहार किया जा रहा है।

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