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बीमा कंपनियों के लिए सिरदर्द बनी SUVs,

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धीरे-धीरे लोगों में बड़ी कारों का ट्रेंड बढ़ रहा है। स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीइकल (SUVs) लोगों में काफी लोकप्रिय है लेकिन चिंता की बात यह है कि चोरों को भी SUV ही पसंद आ रही है। एक तरफ ऑटोमोबाइल सेक्टर संकट के दौर में है लेकिन दूसरी तरफ एसयूवी की बिक्री लगातार बढ़ रही है। चोरों की पसंद ही बीमा कंपनियों के लिए चिंता की वजह बनी हुई है। चोरों का निशाना ह्युंडई क्रेटा, मारुति सुजुकी ब्रेजा, महिंद्रा स्कॉर्पियो और अन्य ऐसी गाड़ियां बन रही हैं।

बीमा कंपनियों के पास ऐसी ही गाड़ियों के सबसे ज्यादा क्लेम होते हैं। वित्त वर्ष 2019 में SUVs के क्लेम पिछले साल के मुकाबले 15-20 प्रतिशत बढ़े हैं। अप्रैल 2018 से अप्रैल 2019 तक लगभग 10 हजार SUVs की चोरी की रिपोर्ट की गई है। इनमें से 100 के इंश्योरेंस क्लेम किए गए और 30-35 गाड़ियों का भुगतान किया गया।

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SUV की बिक्री में 6 प्रतिशत की वृद्धि
एक अधिकारी ने बताया कि साल में 35,000 करोड़ के वाहनों के इंश्योरेंस क्लेम दिए जाते हैं जिनमें से1,000 करोड़ चोरी हुए वाहनों के होते हैं। चोरों की नजर ह्युंडई वेन्यू, ब्रेजा, क्रेटा और महिंद्रा महिंद्रा बोलेरो पर भी रहती है। बता दें कि जुलाई के मुकाबले एसयूवी की बिक्री में 6 प्रतिशथ की वृद्धि हुई है। ये चोर कारों की सुरक्षा तकनीक को फेल करने में भी माहिर हैं।

हर तकनीक का तोड़ निकाल लेते हैं चोर
एक वाहन विक्रेता के मुताबिक नई गाड़ियों में नई तरही की सुरक्षा तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है और चोर हर तकनीक को चुनौती देते रहते हैं। यह उसी तरह है, ‘मुझे पकड़ सको तो पकड़ो।’ बिना चाबी वाली गाड़ियां चोरों का ईजी टारगेट बनती हैं। डिजिट इंश्योरेंस के विजय कुमार ने बताया, ‘चोर 20 प्रतिशत कीलेस गाड़ियां चुराते हैं। जिन गाड़ियों की रीसेल वैल्यू ज्यादा होती है वही गाड़ियां ज्यादा चोरी भी होती हैं। इनमें ज्यादातर डीजल गाड़ियां शामिल हैं।’ उन्होंने बताया कि चाभी वाली गाड़ियों को चोर आसानी से चुरा लेते थे इसीलिए कीलेस सिस्टम से लैस गाड़ियां आईं। लेकिन चोरों ने हर तकनीक का तोड़ निकाल लिया और डेटा ओवरराइटिंग तक का इस्तेमाल करने लगे।

दिल्ली एनसीआर में सबसे ज्यादा चोरी

उत्तर भारत में कारों की चोरियां पश्चिम और दक्षिण भारत के मुकाबले ज्यादा होती हैं। एक जानकार ने बताया कि दिल्ली एनसीआर में सबसे ज्यादा कारों की चोरी होती हैं और इन्हें उत्तर प्रदेश, नॉर्थ ईस्ट या जम्मू-कश्मीर में बेचा जाता है। उनका कहना है कि अगर डीलर मदद करें और लोगों को सुरक्षा डिवाइस लगाने के लिए जागरूक करें तो कारों की चोरी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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