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एक हीरो दुनिया को कह गया अलविदा, भारतीय सेना ने किया सलाम

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कोलकाता। आखिरकार उसने दुनिया को अलविदा कह दिया। सेना ने उसे पूरे सम्मान के साथ विदाई दी। उसके निधन पर पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने ट्वीट कर दुख जताया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित रीमाउंट ऐंड वेटरिनरी कॉर्प्स सेंटर ऐंड कॉलेज में उसका जन्म हुआ था।

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बता दें कि यहां सेना के डॉग्स की ब्रीडिंग और ट्रेनिंग होती है। सेना से रिटायर होने के बाद भी यहां कुत्तों को पाला जाता है। सेना के डॉग्स को सेवा के दौरान कई तरह के हालात झेलने होते हैं।

वह केमिकल विस्फोटक, स्ट्रेस और हर तरह के मौसम झेलने पड़ते हैं। इससे उन्हें कई चोटें और बीमारियां हो जाती हैं। ऐसे में यहां उनका पूरा ध्यान रखा जाता है।

भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड में बीती 11 तारीख को एक हीरो दुनिया को अलविदा कह गया। यह हीरो था एक स्निफर डॉग था जिसने कई साल तक सेना में सेवाएं दी थीं। उसके गुजरने से कमांड में गम का माहौल है।
कमांड ने अपने हीरो को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी और कई अहम केस सॉल्व करने में उसकी भूमिका को याद किया।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आर्मी के डॉग्स (कुत्ते) सैनिकों की तरह ही देश की सेवा में अहम योगदान देते हैं। मृत्यु उपरांत इन डॉग्स को किसी सैनिक की तरह ही सम्मानपूर्वक विदाई दी जाती है।

सेना के ईस्टर्न कमांड से स्निफर डॉग डच कई साल से जुड़ा था। उसका यहां खूब रसूख था। वह ऐसे कई मामले सुलझाने में मदद कर चुका था जिनमें आईईडी का इस्तेमाल किया जाता था। वह कई काउंटर इन्सर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन्स का हिस्सा रह चुका था।

रिटायरमेंट के बाद डॉग्स को मारने की एक वजह यह है उन्हें आर्मी के बेस की पूरी जानकारी होती है। इसके साथ ही वे अन्य गोपनीय जानकारियां भी रखते हैं।

ऐसे में यदि बाहरी लोगों को सौंपा जाता है तो सेना की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

वहीं, इसके अलावा यदि इन कुत्तों को एनिमल वेलफेयर सोसाइटी जैसी जगहों पर भेजा जाता है तो उनका लालन-पालन ठीक ढंग से नहीं हो पाता, क्योंकि सेना उन्हें खास सुविधाएं मुहैया कराती है।

 

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