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बीजेपी-शिवसेना के बीच मन मुटाव का असर, शिवसेना को भा रही कांग्रेस

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महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी-शिवसेना के बीच सीट बंटवारे का मामला अभी सुलझा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी जहां शिवसेना को 120 सीट से ज्यादा देने को राजी नहीं है, वहीं शिवसेना 5-50 के फॉर्म्युले पर चुनाव लड़ना चाहती है। इस बीच शिवसेना ने कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की तारीफ की है। इसे सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला होने से पहले शिवसेना की दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

शिवसेना के नेता संजय राउत ने संसदीय लोकतंत्र का सम्मान करने के लिए पंडित नेहरू और कांग्रेस की रविवार को सराहना करते हुए मौजूदा परिदृश्य में विपक्षी पार्टी के अस्तित्व को लेकर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की अनुपस्थिति किसी देश की राजनीति को मनमाना और एकतरफा बना देती है।

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‘संसदीय लोकतंत्र में शिष्टाचार बनाए रखा’
सामना में एक लेख में कहा गया है, ‘जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस के बारे में मतभेद हो सकते हैं लेकिन उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में शिष्टाचार को बनाए रखा है। वह कांग्रेस ही थी जो आजादी के बाद संसद में शिष्टाचार और परंपराओं से संबंधित कुछ नियम लेकर आयी।’

‘नेहरू ने विपक्षी दल के महत्व को पहचाना’
राउत ने कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) के गठन के लिए कांग्रेस को श्रेय भी दिया। उन्होंने कहा, ‘वह जवाहरलाल नेहरू थे, जिन्होंने देश में विपक्षी दल के महत्व को पहचाना। जब शुरू में विपक्षी दल कमजोर था, तो वह कहते थे कि उन्हें प्रधानमंत्री की भूमिका निभाने के साथ-साथ विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभानी होगी।’ राउत ने कहा कि यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी नेहरू के नक्शेकदम पर चलते थे। उन्होंने कहा, ‘यदि कोई विपक्षी दल नहीं है तो देश का लोकतंत्र कमजोर हो जाता है और राजनीति मनमानी और एकतरफा हो जाती है।’

अवसरवादियों पर सामना में तंज
शिवसेना के मुखपत्र सामना में साप्ताहिक स्तंभ लेखन में पार्टी सांसद ने अगले महीने प्रस्तावित महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ बीजेपी और शिवसेना में शामिल होने के लिए कतार में खड़े अवसरवादियों पर तंज कसा। उन्होंने मौजूदा परिदृश्य में विपक्षी पार्टी के अस्तित्व को लेकर गंभीर सवाल भी खड़ा किया।

‘बीजेपी-शिवसेना में दूसरे दलों के नेताओं का तांता’

राउत ने सामना में लिखे लेख में कहा, ‘मराठवाड़ा में पानी की कमी अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के समान ही महत्वपूर्ण है लेकिन कोई भी इस विशेष मुद्दे का हवाला देते हुए पार्टी नहीं छोड़ रहा है। राउत ने आगे लिखा, ‘भले ही हर जगह सूखा हो, लेकिन बीजेपी और शिवसेना में अन्य दलों के नेताओं का तांता लगा हुआ है। राजनीति एक कठिन कला है लेकिन अब कुछ लोगों ने इसे सरल बना दिया है।’ वह जाहिर तौर पर दल-बदलू नेताओं के उस आम राग का जिक्र कर रहे थे कि वे मतदाताओं की खातिर और अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए अपने मूल दल को छोड़ रहे है।

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में सीटों का पेच
रविवार को दिन भर शिवसेना के सत्ता केंद्र मातोश्री पर गतिविधियां काफी तेज रहीं। उद्धव ठाकरे ने अपने शिवसेना नेताओं, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, जिला प्रमुखों और मुंबई के विभाग प्रमुखों से मुलाकात की। खबर है कि इस सारी कवायद के पीछे बीजेपी द्वारा शिवसेना को विधानसभा की 288 सीटों में से सिर्फ 120 सीटें दिए जाने के प्रस्ताव के बाद गठबंधन की चर्चा में पैदा हुआ गतिरोध है।

हालांकि अभी भी दोनों तरफ से गठबंधन का दावा किया जा रहा है। अपनी महाजनादेश यात्रा में पुणे में मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में महायुति ही जीतेगी। वहीं जनादेश यात्रा पर निकले आदित्य ठाकरे ने रविवार को शिवसेना के कोर केंद्र कोंकण में यह भरोसा दिलाया कि गठबंधन के मामले में शिवसेना विश्वासघात नहीं करेगी।

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