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यूजीसी की चेतावनी बेअसर, सिर्फ 5 फीसदी निजी कॉलेजों ने ही कराई नैक ग्रेडिंग

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प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों पर राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से ग्रेडिंग कराने के दबाव का कोई खास असर नहीं सामने नहीं आ पा रहा है। स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों में से महज पांच फीसदी ही अभी तक नैक से ग्रेडिंग करा पाए हैं। सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में भी नैक से ग्रेडिंग कराने वालों की संख्या 50 फीसदी ही है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कई बार चेतावनी दे चुका है कि नैक ग्रेडिंग के बिना किसी विश्वविद्यालय या महाविद्यालय को भविष्य में कोई अनुदान (ग्रांट) नहीं मिलेगी। राज्यपाल एवं प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति का पद संभालने के बाद आनंदी बेन पटेल ने भी सबसे पहले नैक ग्रेडिंग कराने पर ही जोर दिया।

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उनके सख्त निर्देश का इतना असर तो हुआ कि राज्य विश्वविद्यालयों में नैक ग्रेडिंग के बारे में जानकारी और सहयोग के लिए कार्यशालाएं होने लगीं। इससे उन महाविद्यालयों को फायदा होगा जो नैक की प्रक्रिया और उसके लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता के बारे में अनजान थे। विश्वविद्यालयों से अब यह स्पष्ट किया जाने लगा है कि महाविद्यालय जितना जल्दी संभव हो नैक से ग्रेडिंग करा लें। इससे भागने से उनका नुकसान ही होगा।

राज्य विश्वविद्यालयों में से लगभग आधे ने ही नैक ग्रेडिंग कराई हुई है। इसी तरह राजकीय महाविद्यालयों ने 138 में से 45, सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में 331 में से 154 और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में से 5377 में से महज 298 ने ही नैक से ग्रेडिंग करा रखी है। नैक ग्रेडिंग कराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जिम्मेदार उच्च शिक्षा परिषद खुद ही संसाधन विहीन है।

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