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आर अश्विनः टीम इंडिया की नर्सरी में तपकर हीरा बन पूरी दुनिया में छा गया ये फिरकी गेंदबाज

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साल 2010 का आईपीएल, हरभजन सिंह, मुथैया मुरलीधरन जैसे दिगग्ज और पीयूष चावला जैसे उभरते स्पिन गेंदबाजों के बीच एक युवा ऑफ स्पिनर का नाम तेजी से उभरा, वह फंसे हुए मैच को अपनी स्पिन गेंदबाजी के दम पर मुकाबले को अपनी टीम की झोली में डाल देता।बॉलिंग एक्शन थोड़ा अजीब था, हाथ से गेंद छोड़ने से पहले कभी-कभी हाथों को रोक लेता, कप्तान के भरोसे पर खरा उतरने लगा और कप्तान ने उसके हुनर का सही समय पर इस्तेमाल कर, उसे 2010 के आईपीएल का हीरो बना दिया। वह गेंदबाज जो टी-20 जैसी फटाफट क्रिकेट की पाठशाला से निकला और टेस्ट क्रिकेट में महान स्पिन गेंदबाजों की सूची में शुमार हो गया। वह गेंदबाज जिसने हरभजन और महान अनिल कुंबले के बाद टीम इंडिया के स्पिन आक्रमण की कमान संभाली, जो कैप्टन कूल धोनी का तुरूप का इक्का बना, जिसका नाम है रविचंद्रन अश्विन। अश्विन का आज 33वां जन्मदिन है।

अश्विन आईपीएल से निकला वो हुनर का खजाना है, जो टीम इंडिया की नर्सरी में तपकर हीरा बन पूरी दुनिया में छा गया। आईपीएल खत्म हुआ और अश्विन श्रीलंका जाने वाली टीम इंडिया के हिस्सा के बन गए। हरारे में डेब्यू किया दो विकेट चटकाए, क्योंकि भारत वह मैच हार गया इसलिए अश्विन के लिए दो विकेट पर किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन टीम मैनजमेंट ने टैलेंट को परख लिया था। 2011 वर्ल्ड कप के लिए टीम का एलान हुआ और उसमें आर अश्विन शामिल थे। टीम इंडिया विश्व कप जीत चुकी थी, लेकिन इंग्लैंड दौरे से टीम सीरीज गंवा के लौटी। कुंबले की कमी को पूरा करने वाले स्पिन गेंदबाज की तलाश जारी थी, हरभजन की स्पिन का भी रंग उतरने लगा था। ऐसे में अश्विन के लिए मौका बना और भारत दौरे पर आने वाली वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उन्हें मौका मिला और क्या शानदार डेब्यू किया अश्विन ने। अपने पहले टेस्ट में ही वह मैन ऑफ द मैच बने थे।

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विंडीज के खिलाफ दिल्ली के फिरोजशाह कोटला ( अरुण जेटली स्टेडियम) के मैदान पर अपने डेब्यू मैच में ही अश्विन ने नौ विकेट चटकाए। पहली पारी में तीन और दूसरी में छह और यहीं से शुरू हुआ अश्विन का सुनहरा सफर। अश्विन ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, लेकिन उन्होंने हमेशा कहा कि, क्रिकेट खेलना इंजीनियरिंग से आसान था। अश्विन की एक खास बात यह भी है कि उन्हें सबकुछ याद रहता है, जैसे किस बल्लेबाज को कब आउट किया, कितनी बार आउट किया। अब तक खेले 65 टेस्ट में अश्विन के नाम 342 विकेट दर्ज हैं। जिसमें से उन्होंने 26 बार पांच विकेट चटकाए हैं और सात बार मैच में दस विकेट लेने का कारनाम किया है। अश्विन टेस्ट में 50,100,150,200,250 और 300 विकेट लेने वाले सबसे तेज भारतीय स्पिन गेंदबाज हैं।

उन्होंने 111 वनडे मैचों में 15️0️ विकेट लिए हैं और 46 टी-20 मैचों में 2️3️2️ विकेट हासिल किए हैं। वहीं, 65 टेस्ट मैचों की 93 पारियों में वह 2361 रन बना चुके हैं। उनका अधिकतम स्कोर 124 रन रहा है। उन्होंने 4 शतक और 11 अर्धशतक जड़े हैं। अपने वनडे करियर में अश्विन ने 675 रन बनाए हैं। इसमें उनका अधिकतम स्कोर 65 रन है। वनडे में उन्होंने अबतक 1 अर्धशतक जड़ा है। टेस्ट क्रिकेट में अश्विन छह बार ‘मैन ऑफ द सीरीज’ बन चुके हैं। उन्होंने सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग को पीछे किया। सचिन और सहवाग पांच बार ‘मैन ऑफ द सीरीज’ बन चुके हैं। दिसंबर 2016 में अश्विन को आईसीसी ‘क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ और ‘टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर’ भी चुना गया था। अश्विन के पास गेंदबाजी में वैरायटी बहुत है। टॉप स्पिन, साइड स्पिन, फ्लिपर, लेकिन सबसे मारक गेंद बनी उनकी कैरम बॉल। जिसे अश्विन अपनी चारों अंगुलियों में फंसा कर बस बल्लेबाज के सामने पिच पर फेंक देते और गेंद इस कदर घूमती है कि बल्लेबाजों के पैरों के बीच से विकेट हिला जाती है।

इस साल विंडीज दौरे पर टेस्ट में अश्विन को खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद से कहा जा रहा है कि, उनका करियर अब ढलान की ओर बढ़ गया है। कुलदीप और चहल की जोड़ी ने अश्विन का पत्ता टीम से काट दिया है, लेकिन फिलहाल जिस अंदाज में काउंटी क्रिकेट खेल रहे हैं, उससे लोगों को समझना और देखना चाहिए की वह किस तरह से अपनी गेंदबाजी में लगातार प्रयोग कर रहे हैं। आईपीएल 2019 किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स के बीच मुकाबला खेला जा रहा था, तब नॉन स्ट्राइकर पर खड़े जोस बटलर अश्विन के गेंद फेंकने से पहले क्रीज छोड़कर बाहर निकल गए, अश्विन ने ये देखा और गेंद फेंकने की बजाए गिल्लियां बिखेर दीं। बटलर क्रीज के बाहर थे और अंपायर ने उन्हें आउट करार दिया। बाद में इसको लेकर काफी विवाद हुआ, लेकिन अश्विन ने सिर्फ इतना कहा, सब कुछ क्रिकेट के नियम के दायरे में हुआ, जो सही भी था।

अश्विन को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम शामिल किया गया है। इस सीरीज में शायद उन्हें खेलने का मौका मिले, अगर नहीं भी मिला तो ये अश्विन के करियर का अंत नहीं होगा। अश्विन जैसा स्पिनर टीम को हर दौर में नहीं मिलता, चेहरे से शांत दिखने वाला यह गेंदबाज हर बार अपने तरकश में नए तीर लेकर मैदान पर उतरता है। लाल गेंद जिसके अंगुलियों में फंसकर कहर ढ़ा देती है और वह सिर्फ चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लिए साथी खिलाड़ियों से घिर जाता है। विकेट लेने के बाद उसके चेहरे के भाव को कैमरा विराट की आक्रमकता और जुनून के आगे कैप्चर नहीं कर पाता, लेकिन स्कोरबोर्ड बयां कर जाता है कि आखिर कमाल किसका है। टीम इंडिया को टेस्ट में नंबर एक बनाने में अश्विन का रोल अहम रहा है। अब कितना अहम रहा है, ये सब तो आप सभी बेहतर जानते होंगे, क्योंकि अश्विन की गेंद जब ऑफ स्टंप पर टप्पा खाकर, विपक्षी बल्लेबाजों के बैट और पैड के बीच से निकलकर गिल्लियां बिखेर जाती है, तब हर किसी के चेहरे पर एक लंबी मुस्कान पसर जाया करती है।

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