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DURGA ASHTAMI : राष्ट्रपति, PM मोदी ने दी दुर्गाष्टमी की बधाई, देशभर में मनाई जा रही है, मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

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नई दिल्ली। नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गाष्टमी या महा अष्टमी कहा जाता है। यह पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। अलसुबह से देशभर के मां दुर्गा और शक्ति पीठों पर पूर्जा अर्चना शुरू हो गई है। मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महा अष्टमी के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। कोविंद ने अपने संदेश में कहा कि दुर्गा पूजा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और यह विश्वास भी मजबूत करता है कि अंतिम सत्य और न्याय की जीत होती है।

नवरात्रि में नौ दिनों के इस व्रत में अष्टमी के दिन कन्या पूजन से लेकर व्रत इत्यादि का खास महत्व होता है। इससे एक दिन पहले ही मूतियों को पंडाल में स्थापित कर विधि विधान से पूजा शुरू हो जाती है। पूरे उत्तर भारत में दुर्गा पूजा का उत्सव न सिर्फ घर-घर में मनाई जाती है बल्कि तमाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भी इस उत्सव को कई गुना उत्साह के साथ मनाया जाता है। मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की अराधना की जाती है। धर्मिक मान्यताओं के अनुसार महागौरी की उपासना से इंसान को हर पाप से मुक्ति मिल जाती है। इसके अगले दिन महानवमी मनाई जाती है। कई लोग अष्टमी नहीं नवमी को कन्याओं को भोजन कराकर व्रत खोलते हैं।

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मां महागौरी का रूप: नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा का विधान है। जैसा कि नाम से ही प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। इनकी 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए वृषारूढ़ा नाम से भी इन्हें जाना जाता है।

दुर्गाष्टमी के दिन इनका रखें विशेष ध्यान…
पहले और आखिरी दिन व्रत करने वाले इस दिन भी कन्या पूजन करते हैं। इस दिन भक्तों को पूजा के समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। संधि काल का समय दुर्गा पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। संधि काल के समय 108 दीपक जलाए जाते हैं। अष्टमी के दिन संधि काल में ही दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

दुर्गा चालीसा, मंत्र या सप्तशती के पाठ के समय किसी दूसरे से बात नहीं करने लग जाएं। ऐसा करने से आपकी पूजा का फल नकारात्मक शक्तियां ले जाती हैं। अखंड ज्योति जला रहे हैं तो घर को खाली छोड़कर कहीं नहीं जाएं। हवन कर रहेंं है तो ध्यान रखें की इसकी सामग्री कुंड से बाहर नहीं जाए।

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