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इन 17 मेडिकल छात्रों ने मांगी इच्छा मृत्यु, लिखा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल को पत्र

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भोपाल। साक्षी मेडिकल कॉलेज गुना में 2016-17 बैच में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एनआरआई सीटों पर दाखिल छात्रों ने प्रवेश अमान्य होने पर इच्छा मृत्यु की मांग की है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री आदि को पत्र लिखा है। छात्रों ने कहा है कि कॉलेज की तरफ से समय रहते एमसीआई को प्रवेशित छात्रों [...]
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भोपाल। साक्षी मेडिकल कॉलेज गुना में 2016-17 बैच में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एनआरआई सीटों पर दाखिल छात्रों ने प्रवेश अमान्य होने पर इच्छा मृत्यु की मांग की है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री आदि को पत्र लिखा है।

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छात्रों ने कहा है कि कॉलेज की तरफ से समय रहते एमसीआई को प्रवेशित छात्रों की सूची भेज दी गई थी।

इसके बाद भी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने यह कहते हुए प्रवेश अमान्य कर दिया है कि कॉलेज से समय पर सूची नहीं मिली है। 25 छात्र दो साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।

राजधानी में बातचीत में एक छात्र के पिता शिवकुमार लाड़ ने बताया कि एनआरआई सीटों के लिए 17 छात्रों का एक बार में साक्षी मेडिकल कॉलेज गुना में दाखिला हुआ था।

इसके बाद आठ और छात्रों का दाखिला हुआ। कुल 23 छात्रों का दाखिला एनआरआई सीटों पर हुआ था, बाकी दो का अन्य सीटों पर था।

कॉलेज में प्रवेशित छात्रों की सूची चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में 15 नवंबर 2016 के पहले जमा की जा चुकी थी जो डीएमई द्वारा तय समय सीमा में थी।

एमसीआई में भी छात्रों की सूची आखिरी तारीख 13 दिसंबर 2016 को पहुंच गई थी. सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी में डीएमई व एमसीआई ने समय पर सभी छात्रों की सूची मिलने की पुष्टि भी की है।.

उन्होंने कहा कि कुछ अदालतों के निर्णय भी हैं जिनमें कहा गया है कि प्रवेशित छात्रों की सूची एमसीआई में जमा कराना छात्रों का काम नहीं है। इस आधार पर छात्र का दाखिला निरस्त भी नहीं किया जा सकता।

बता दें कि एमसीआई ने नवंबर 2017 में 25 छात्रों का दाखिला इस आधार पर अमान्य कर दिया है कि डीएमई द्वारा भेजी गई सूची में इन छात्रों का नाम नहीं है।

डीएमई ने 125 छात्रों की सूची भेजी थी, जिसे एमसीआई ने मान्य किया है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अफसरों ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन ने प्रवेश की तारीख बीतने के बाद इन छात्रों को दाखिले दिए हैं।

इन छात्रों का एमबीबीएस द्वितीय वर्ष में भी अस्थाई दाखिला हो गया था। प्रति छात्र ने प्रथम व द्वितीय वर्ष की मिलाकर 10 लाख रुपए फीस कॉलेज में जमा की थी।

अब कॉलेज बंद हो चुका है। 25 को छोड़कर अन्य 125 छात्रों को दूसरे कॉलेजों में एमसीआई के निर्देश पर शिफ्ट कर दिया गया है।

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