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बड़े नायक के रूप में RSS के सम्राट स्कंदगुप्त को पेश करने की तैयारी

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वाराणसी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मातृ शाखा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भारतीय शूरवीरों की उन कहानियों को सामने लाने के प्रयास में है, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हैं। कुछ दर्ज हैं भी तो उन्हें उतना महत्व नहीं दिया गया है, जितने की वे हकदार हैं। ऐसे ही एक सम्राट स्कंदगुप्त को भाजपा सरकार बड़े नायक के रूप में पेश करने जा रही है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह राजा सुहेलदेव की प्रतिमा का उद्घाटन कर चुके हैं।

सुहेलदेव आज से करीब एक हजार वर्ष पूर्व के ऐसे महानायक हैं, जिनका इतिहास में स्थान खोजना दुष्कर ही नहीं, लगभग असाध्य है। उनके नाम पर भी भाजपा में खूब चर्चा हुई है। इसके बाद गुप्त राजवंश के आठवें राजा स्कंदगुप्त को भाजपा राष्ट्र के नायक के तौर पर पेश करने की तैयारी में है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भारत अध्ययन केंद्र में 17 अक्टूबर को दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी हो रही है, जिसका विषय स्कंदगुप्त का ऐतिहासिक पुन:स्मरण और भारत का राजनीतिक भविष्य है।

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संगोष्ठी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सैदपुर-गाजीपुर के भीतरी अभिलेख का वर्णन करते हुए गुप्तवंश के वीर स्कंदगुप्त विक्रमादित्य से जुड़े उन ऐतिहासिक तथ्यों को रखेंगे, जो अभी तक इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हैं। भाजपा का मानना है कि यह संगोष्ठी राष्ट्र नायकों को इतिहास में उचित स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय के भारतीय प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के अस्टिेंट प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा, स्कंदगुप्त का इतिहास बहुत उम्दा है। भारत में गुप्तकाल के दौरान स्कंदगुप्त ने 455 से 467 ईस्वी तक शासन किया था। 12 वर्षों में इनके शासन में प्रजा बहुत सुखी थी। इन्होंने अपनी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के लिए मध्य एशिया के बर्बर आक्रांता हूणों से भीषण संग्राम किया था और विजय हासिल की थी।

स्कंदगुप्त ने न केवल हूणों को पराजित किया था, बल्कि गुप्त साम्राज्य की रक्षा के अलावा आर्य की संस्कृति को भी नष्ट होने से बचाया था। उन्होंने बताया, पुष्यमित्र को परास्त कर अपने नेतृत्व की योग्यता और शौर्य को सिद्ध कर स्कंदगुप्त ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की।

स्कंदगुप्त को विक्रमादित्य, क्रमादित्य आदि उपाधियां दी गईं। हां, यह सत्य है कि हमारे महापुरुषों का इतिहास बहुत कम लोग जानते हैं, उसे बड़े स्तर पर सबके सामने लाने की जरूरत है। श्रीवास्तव ने बताया, स्कंदगुप्त विक्रमादित्य ने कालखंड 453 से 467 ईस्वी के बीच भारत को कई आक्रमणकारियों से बचाया था। यही नहीं, जिन भयानक बर्बर हूणों के आक्रमण से चीन भी घबरा गया था, उनसे भी अपनी मातृभूमि की उन्होंने रक्षा की।

लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. निशीथ राय ने बताया, हूण मध्य एशिया में निवास करने वाले बर्बर कबीलाई लोग थे। उन्होंने हिंदुकुश पर्वत को पार कर गंधार पर अधिकार कर लिया और फिर महान गुप्त साम्राज्य पर आक्रमण कर दिया था। वीर स्कंदगुप्त ने उनका मुकबला करके उन्हें खदेड़ा था और विजय हसिल की थी।

राय ने बताया कि इनकी छवि नायक की थी। इसलिए भाजपा इसे सामने लाने का प्रयास कर रही है। प्रचीन इतिहास के गौरवशाली राजाओं के इतिहास को मुस्लिम शासकों ने नष्ट किया। इसके बाद अंग्रेजों ने बर्बाद किया। यह राष्ट्रनायक की छवि थी, जिसे भावी पीढ़ी को जानना जरूरी है।

इतिहास संकलन से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया, इतिहास में बहुत सारी विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। मुगलों और अंग्रेजों ने हमारे इतिहास से बहुत ज्यादा छेड़छाड़ कर रखी है, जिस कारण हमारे इतिहास के बारे में भावी पीढ़ी को ज्यादा जानकारी नहीं हो पा रही है। स्कंदगुप्त जैसे कई नायक अभी छिपे हुए हैं, जिनके इतिहास के बारे में समाज और भावी पीढ़ी अनजान है।

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