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आजसू ने झारखंड में BJP से मांगी ‘डबल डिजिट’ सीटें!

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रांची। झारखंड में चुनावी रणभेरी बजने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने संग्राम के लिए राजनीतिक ‘योद्धाओं’ की तलाश तेज कर दी है। अभी तक जो स्थिति उभरी है, उसमें यह माना जा रहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी दलों के महागठबंधन के बीच आमने-सामने की लड़ाई होगी। लेकिन दोनों गठबंधन सीटों की दावेदारी से परेशान है। सत्ताधारी भाजपा की सहयोगी पार्टी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) ने भी ‘डबल डिजिट’ का दावा कर भाजपा को चुनाव के पूर्व ‘भंवर’ में डाल दिया है।

भाजपा के सूत्रों की मानें तो भाजपा पिछले विधानसभा की तर्ज पर सीट बंटवारा चाहती है, जिसे आजसू ने सीधे तौर नकार दिया है। आजसू के नेता कहते हैं कि पिछले पांच सालों के बीच काफी कुछ बदलाव आया है।

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आजसू के अध्यक्ष सुदेश महतो कहते हैं कि 2014 में स्थिर सरकार देने के लिए आजसू ने बड़ी कुर्बानी दी थी। इस बार भाजपा से नए सिरे से सीटों को लेकर बातें करनी होगी। उन्होंने कहा कि इस बार सीट बंटवारे को लेकर प्रदेश भाजपा के नेताओं के साथ उनका मंथन जारी है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अभी तक बात नहीं बनी है, अब सीटों के बंटवारे को लेकर दिल्ली के साथ बात होनी है।

इस बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने कहा कि भाजपा पिछले चुनाव की तर्ज पर 72 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। गौरतलब है कि भाजपा और आजसू में पेच कई दूसरे दलों के विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद ज्यादा फंसा है। सूत्रों का कहना है कि लोहरदगा, सिसई, चंदनकयारी, टुंडी, हटिया, मांडु जैसी कई सीटें हैं, जहां दोनों दलों की दावेदारी है। ऐसे में स्थिति फंस गई है।

आजसू सूत्रों का दावा है कि पार्टी विधानसभा की 12 से 15 सीटों पर दावेदारी की है। पार्टी भाजपा के साथ ‘पोस्ट पोल एलायंस’ का प्रस्ताव भी दे सकती है।

हाल के दिनों में भाजपा ने दूसरे दलों के विधायकों को जिस तरह अपने पाले में किया है, उससे आजसू खुद को असहज महसूस करने लगा है। विपक्ष के जो विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं, उनमें से कम से कम दो सीटों पर आजसू की मजबूत दावेदारी है।

लोहरदगा विधनसभा क्षेत्र में पिछले चुनाव में आजसू के कमल किशोर भगत ने सुखदेव भगत को हराया था। हालांकि बाद में अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद कमल किशोर की सदस्यता चली गई थी और लोहरदगा में उपचुनाव हुआ था। उसमें सुखदेव भगत जीते थे। अब सुखदेव भगत भाजपा में चले गए हैं, जबकि आजसू इसे अपनी सीट समझती है।

ऐसी ही एक सीट है चंदनकियारी है। यहां वर्ष 2009 में आजसू के उमाकांत रजक जीते थे, जबकि पिछली बार वहां से झाविमो के टिकट पर अमर बाउरी जीते और बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए। इस बार उमाकांत रजक फिर से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

आजसू को डर है कि इन दोनों सीटों पर समझौता किया, तो कमल किशोर भगत और उमाकांत रजक अलग रास्ता अपना सकते हैं।

आजसू के प्रवक्ता देवशरण भगत भी कहते हैं कि हर हाल में इस चुनाव में विधायक ‘डबल डिजिट’ में होंगे। पार्टी ने तैयारी पूरी कर ली है। ‘अकेले चुनाव लड़ने के सवाल’ पर उन्होंने इशारों ही इशारों में भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि दो दल के सम्मानजनक सीट बंटवारे से ही पार्टी का गठबंधन चल पाता है। उन्होंने यह भी कहा पार्टी राजग की घटक दल है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सीट तय करेंगे।

उन्होंने आगे कहा, “भाजपा ने खेती खरीदी है, खेत नहीं। लोहरदगा या चंदनकियारी में खेत तो हमारा ही है। सीट शेयरिंग का फैसला तो पंचों की राय से होगा।”

पिछले चुनाव में भाजपा 72 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 31.26 प्रतिशत मत प्राप्त कर 37 सीटों पर कब्जा जमाया था जबकि उसके घटक दल आजसू ने आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे और 3़ 68 प्रतिशत मत प्राप्त कर पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी।

इधर, भाजपा इस मामले को लेकर अब खुलकर कुछ भी नहीं बोल रही है। भाजपा के प्रवक्ता दीपक प्रकाश कहते हैं, “राजग एकजुट है और एकजुट रहेगी। चुनाव तक सबकुछ तय कर लिया जाएगा। आजसू हमारी पुरानी सहयोगी है।”

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