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National Epilepsy Day: दूर करें मिर्गी से जुड़ी गलत धारणाएं, जानें लक्षण और बचाव

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राष्ट्रीय मिर्गी दिवस यानी National Epilepsy Day हर साल 18 नवंबर को मनाया जाता है। डॉक्टरों की मानें तो मिर्गी एक सामान्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, लेकिन बीमारी से जुड़ी गलत धारणाओं के कारण मिर्गी से पीड़ित सैकड़ों लोग सामाजिक रूप से बहिष्कृत हो जाते हैं। इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। यहां जानें मिर्सी से जुड़े मिथकों, बीमारी के लक्षण और बचाव के बारे में…

दूषित पानी और भोजन से होती है मिर्गी

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मुनेश्वर सूर्यवंशी का कहना है कि दुनिया भर में मिर्गी के कुल मरीजों में से 16 प्रतिशत भारत में हैं। दुनियाभर में मिर्गी का एक सामान्य कारण सिर में चोट लगना है, जबकि भारत में इसका एक प्रमुख कारण न्यूरोकाइस्टिसरोसिस यानी तंत्रिका तंत्र का परजीवी रोग है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में मिर्गी के लिए 30 प्रतिशत तक जिम्मेदार है। डॉ. आर के गर्ग ने बताया कि मिर्गी टेपवॉर्म नाम के कीड़े से होती है, जो गंदे पानी या दूषित खाने के कारण शरीर में जाता है। वहां से यह खून में मिलकर दिमाग तक पहुंच जाता है और व्यक्ति को मिर्गी के दौरे आने लगते हैं।
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50 प्रतिशत मरीज सर्जरी से ठीक हो सकते हैं

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण शर्मा ने बताया कि देश में करीब 1.25 करोड़ लोग मिर्गी से पीड़ित है। इनमें करीब 50% मरीज ऐसे हैं, जिनकी सर्जरी की जा सकती है। जांच और डायग्नॉसिस होने पर अमूमन 30% मरीज ही सर्जरी के लिए फिट पाए जाते हैं। कई मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें कई दवा के कॉम्बिनेशन देने के बाद भी मिर्गी कंट्रोल नहीं हो पाती। ऐसे मरीज सर्जरी के जरिए मिर्गी से छुटकारा पा सकते हैं।

​मिर्गी से जुड़े मिथक और उनकी हकीकत

1. मिर्गी ठीक नहीं होती।मिर्गी का इलाज मुमकिन है। मोटे तौर पर करीब 80-85 फीसदी मरीज दवा से ठीक हो जाते हैं। बाकी भी सर्जरी से ठीक हो जाते हैं।2. दवाओं के भारी साइड इफेक्ट होते हैं।मिर्गी की दवाओं के कुछ साइड-इफेक्ट्स होते हैं, जैसे कि सुस्ती, नींद ज्यादा आना, मानसिक धीमापन, वजन बढ़ जाना आदि, लेकिन ये दिक्कतें बीमारी से बड़ी नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवा बदल भी देते हैं।3. यह पागलपन है।मिर्गी पागलपन बिल्कुल नहीं है। यह न्यूरो से जुड़ी एक बीमारी है, जिसका सही इलाज मिलने पर मरीज सामान्य जिंदगी जी सकता है।4. सामान्य जिंदगी नहीं जी सकता मरीज।मरीज सामान्य जिंदगी जी सकता है। बस उसे ड्राइविंग, स्वीमिंग या एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसी कुछ चीजों से परहेज करना होता है।

​मिर्गी के लक्षण

– बात करते हुए दिमाग ब्लैंक हो जाना, मांसपेशियों का अचानक फड़कना- तेज रोशनी से आंखों में परेशानी होना, अचानक बेहोश हो जाना- अचानक से मांसपेशियों पर नियंत्रण खो देना

​दौरा पड़ने पर इन बातों का रखें ध्यान

– दौरा पड़ने पर रोगी को सुरक्षित जगह पर एक करवट लेटा दें- कपड़े ढीले करें, खुली हवा में रखें और आसपास भीड़ न लगाएं- सिर के नीचे मुलायम कपड़ा रखें, दौरे के समय रोगी के मुंह में कुछ न डालें

​ऐसे करें बचाव

न्यूरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. रजनीश कुमार बताते हैं कि मिर्गी ज्यादातर युवाओं में देखी जाती है। पर्याप्त नींद, कच्ची सब्जियों से परहेज, साफ पानी से धुली सब्जियों को छीलकर खाने से मिर्गी से बचा जा सकता है।
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