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बना रहा है बीमार पानी को शुद्ध करने के लिए घरों में लगा RO

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पानी शुद्ध करने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) वॉटर प्यूरिफायर लगवाना अब एक आम चलन है। ऐसा इसलिए भी है कि महानगरों में या तो पानी पीने लायक नहीं है या फिर लोग ग्राउंड वॉटर पीने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में RO लगवाना अब एक मजबूरी बन चुका है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पानी से भी कई बीमारियों का खतरा है? विशेषज्ञों के मुताबिक, आरओ से गंदगी के साथ वह मिनिरल्स भी निकल जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। इनकी कमी से हड्डी, लिवर, किडनी, बीपी और दिल की बीमारी तक हो सकती है। यही वजह है कि नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूलन (एनजीटी) भी आरओ पर बैन लगाने की सिफारिश कर चुका है।

केंद्र सरकार के उपभोक्ता मंत्रालय की तरफ से पानी की गुणवत्ता को लेकर किए गए 21 शहरों की सर्वे रिपोर्ट में दिल्ली को 21वें नंबर पर रखा गया है। ग्रेटर नोएडा का हाल भी अच्छा नहीं हैं। लोगों का कहना है कि यहां के पानी का टीडीएस आमतौर पर 300 से अधिक रहता है। इसके चलते लोग घरों में RO लगवा रहे हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि आरओ से निकला बेहद कम टीडीएस का पानी पीने से भी बीमारियां हो सकती हैं।

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RO के पानी में नहीं होते मिनरल्स
ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल की डॉ. आशिमा रंजन ने बताया कि वर्तमान पानी शुद्ध न मिलने की वजह से भी काफी बीमारियां हो रही हैं। ऐसे में लोग घर में आरओ लगवा लेते हैं, जो फायदे का सौदा नहीं है। दरअसल, शरीर को फिट रखने के लिए मिनरल्स की जरूरत होती है। घरों में लगे आरओ के पानी से ये मिनरल्स पूरी तरह निकल जाते हैं। ऐसे में यह पानी शरीर के लिए बेहतर नहीं है। आरओ के पानी को सॉफ्ट वॉटर भी कहा जाता है, जो प्यास तो बुझा सकता है लेकिन आपके स्वास्थ्य की रक्षा नहीं कर सकता।

किडनी, लिवर, हार्ट के लिए फिट नहीं RO का पानी
डॉ. आशिमा के मुताबिक, आरओ का पानी पीने से किडनी, हार्ट और लिवर संबंधी समस्या हो सकती है। उनका कहना है कि पानी को उबालकर पीना सबसे अच्छा साबित होता है। उबालने से पानी शुद्ध हो जाता है साथ ही इसके मिनरल्स भी नष्ट नहीं होते हैं। अगर आपके घर में आरओ लगा है तो उसका टीडीएस जरूर चेक करते रहें। अगर आरओ के पानी का टीडीएस लेवल 120 से 200 के करीब है तो उसके पानी को पीया जा सकता है।

75 से कम नहीं होना चाहिए टीडीएस
डॉक्टरों के अनुसार, पीने के पानी में टीडीएस की मात्रा 75 से कम नहीं होनी चाहिए। इससे कम टीडीएस वाला पानी पीने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और शरीर को जरूरी मिनरल्स नहीं मिल पाते हैं। वहीं, 150 से ज्यादा टीडीएस वाला पानी पीने से बीमारियां हो सकती हैं। इससे सबसे ज्यादा पथरी होने का आशंका रहती है। 500 से ज्यादा टीडीएस वाला पानी पीने से जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं। पानी में सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर, फॉस्फेट, सेलेनियम आदि की मात्रा एक सामान होनी चाहिए। इसके ज्यादा या कम होने से बीपी, ब्लड प्रेशर, हीमॉग्लोबिन आदि की बीमारियां होने का खतरा बना रहता है।

मिनरल नहीं तो कई खतरे
सोडियम: कमी से बीपी लो हो जाता है तो अधिक सोडियम होने पर हाई बीपी हो जाता है।

कैलशियम: कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती है। कई बार हड्डियां गलने लगती हैं। इससे ऑस्टियोपोरोसिस तक हो जाता है।

पोटैशियम: शरीर में कमजोरी और पैरालिसिस तक हो जाता है। मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर पातीं, जिससे दिल पर असर पड़ता है।

मैग्नीशियम: यह सेल के भीतर मिनरल्स को मेंटेन करता है। इसकी कमी से ब्लड फ्लो में कमी आ जाती है।

आयरन: यह हीमोग्लोबिन के लिए बहुत जरूरी है। इसकी कमी से एनीमिया हो जाता है।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी जरूरी

कॉपर: यह सेल साइकल को मेंटेंन करता है।

फॉस्फेट: शरीर में एनर्जी मेंटेन करता है।

सेलेनियम: शरीर में एंटी ऑक्सिडेंट का काम करता है।

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