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भारत पर हमले की फिराक मे है आईएस

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इस्लामिक स्टेट (आई.एस.) भारत पर हमले की तैयारी कर रहा है और उसने अफगानिस्तान में अपने ठिकाने बना लिए हैं। यह खुलासा अमरीका द्वारा सीरिया में इस्लामिक स्टेट (आई.एस.) प्रमुख अबू बकर अल-बगदादी को मार गिराने के कुछ दिन बाद ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ द्वारा एक टी.वी. चैनल को दिए इंटरव्यू में हुआ है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि इस्लामिक स्टेट ने भारत, पाकिस्तान, रूस और यहां तक कि चीन के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि इन देशों को आतंकी संगठन के खतरे का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आई.एस. का फिर से सक्रिय होना भारत, ईरान और पाकिस्तान के बीच एक ङ्क्षचता का विषय है। आतंकी संगठन अब सीरिया और ईराक से अफगानिस्तान तक अपना ठिकाना बना रहे हैं। अफगानिस्तान के भीतर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो सभी के लिए बहुत ङ्क्षचता का विषय हैं।

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केरल में आई.एस. संचालक तक पहुंचा टी.वी. चैनल
एक टी.वी. चैनल ने केरल के वायनाड जिले के कलपेट्टा के एक संदिग्ध आतंकी 26 वर्षीय नशीदुल हमजफर के मामले को ट्रैक किया। वह पिछले साल अफगानिस्तान से निर्वासित होने वाला आई.एस. संचालक था। सितम्बर-अक्तूबर 2017 में नशीदुल केरल में अपने गृहनगर वायनाड से चला गया और ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचा। 13 अक्तूबर, 2017 को वह अपने साथी हबीब के साथ अमीरात की उड़ान से मस्कट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से तेहरान के लिए रवाना हुआ। उसने हबीब के पासपोर्ट का उपयोग करके हवाई अड्डे से एक ईरानी सिम कार्ड खरीदा। इसके बाद उन्होंने इमाम खुमैनी स्ट्रीट में एक कमरा बुक किया, जहां उन्हें पहचान प्रमाण के तौर पर अपने पासपोर्ट की प्रतियां जमा करनी थीं। वहां उन्होंने एंक्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लीकेशन टैलीग्राम पर आई.एस. के अगले निर्देश का इंतजार किया।

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आई.एस. से मिले निर्देशों में उन्हें अफगान वीजा की व्यवस्था करने के लिए कहा गया था। सूत्रों ने कहा कि इसके बाद हबीब और नशीदुल अफगान दूतावास गए, जहां उनका साक्षात्कार हुआ। बाद में उन्हें 3 दिन के पश्चात दूतावास वापस आने को कहा गया। उन्हें यह भी सूचित किया गया कि भारतीय दूतावास से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद उनके वीजा आवेदनों पर कार्रवाई होगी। इसके बाद हबीब अपने पिता के साथ संपर्क कर वापस केरल रवाना हो गया, जबकि नशीदुल आई.एस. संचालक बनने के इरादे से आगे बढ़ गया। नशीदुल हमजफर भारत का पहला आई.एस. संचालक था जिसने महीनों अफगानिस्तान में बिताए थे। बाद में नशीदुल ने ईरान में टैक्सी से इस्फहान तक 450 किलोमीटर की यात्रा की। उसने टैक्सी के किराए के रूप में 100 डालर का भुगतान किया।

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यहीं पर टैलीग्राम पर आई.एस. के एक गाइड से उसका संपर्क हुआ। संचालक रात में उससे मिला, उसके बैग की तलाशी ली और उसका लैपटॉप और पासपोर्ट छीन लिया। हालांकि, नशीदुल ने लगातार इसका विरोध किया। आई.एस. गाइड ने उसे बताया कि अफगानिस्तान पहुंचते ही उसका सामान वापस कर दिया जाएगा। गाइड ने उससेे 450 डालर सेवा शुल्क लिया। नशीदुल के लिए यह क्षेत्र अफगानिस्तान में आई.एस. का प्रवेशद्वार था। अगले दिन उसे निर्वासन शिविर में छोड़ दिया गया। शिविर में एक लंबी कतार थी और नशीदुल इसमें शामिल हो गया। उसने अपनी पहचान और पते के बारे में झूठ बोला। राष्ट्रीय जांच एजैंसी (एन.आई.ए.) के सूत्रों ने टी.वी. चैनल को बताया कि नशीदुल ने अपना पता ‘सन ऑफ मुहम्मद, रैजीडैंट ऑफ नूरिस्तान, अफगानिस्तान’ बताया।

यह ईरानी गाइड द्वारा दिया गया पता था। जब एन.आई.ए. ने पूछताछ की तो नशीदुल ने कहा, ‘‘अधिकारियों ने मेरा साक्षात्कार लिया और मेरा बायोमैट्रिक विवरण एकत्र किया। उन्हें मेरी राष्ट्रीयता के बारे में संदेह हुआ और मुझे दूसरे शिविर में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने सभी अफगान नागरिकों को निर्वासित कर दिया और मुझे जबरदस्ती पाकिस्तान के लिए निर्वासन वाहन में लाद दिया गया। यह सोचकर कि मैं पाकिस्तानी था, मैंने उस वाहन में एक अधिकारी से कहा कि मैं एक अफगान हूं और मुझे अफगानिस्तान भेजा जाए। इसके बाद उसे अफगान शिविर में वापस भेज दिया गया। इस तरह वह करीब एक साल तक अफगानिस्तान में रहा। लेकिन जैसे ही अफगानी एजैंसियों को उसके उद्देश्य की भनक पड़ी तो उसे पकड़ लिया गया। उससे अफगान और अमरीकी जांच एजैंसियों ने पूछताछ की। जब एजैंसियों को साफ हो गया कि वह आई.एस. संचालक बनने के लिए अफगानिस्तान आया है तो उसे भारत डिपोर्ट कर दिया गया। एन.आई.ए. के लिए नशीदुल हमजफर 2016 में 21 युवकों के आई.एस. ज्वाइन करने के लिए केरल से लापता होने के बारे में जांच का मुख्य सूत्र है।

खतरा केवल एक देश को नहीं
जावेद जरीफ ने कहा कि अफगानिस्तान में उसके ठिकानों से ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान में आई.एस. के आप्रेशन किए जाने की खबरें हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह खबर बहुत ही गंभीर है। हम आई.एस. के अफगानिस्तान में ठिकाना बनाने और इस कदम से उत्पन्न खतरे के बारे में भारत के साथ नियमित रूप से जानकारी सांझा कर रहे हैं। हम पाकिस्तान, रूस और चीन के साथ भी संपर्क में हैं।’’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम सभी को एकजुट हो जाना चाहिए।जब उनसे अमरीका की भूमिका के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘अमरीका हमारे बचाव में नहीं आएगा। हमें अपनी मदद खुद करनी होगी।’’ ईरान पिछले कई सालों से इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहा है।

खुफिया एजैंसियों का मानना है कि 2016 में केरल से 21 युवाओं के लापता होने और बाद में आई.एस. में शामिल होने के बाद अफगानिस्तान में प्रमुख क्षेत्र राडार पर थे। इनमें 17 लोग कासरगोड जिले के थे, जबकि 4 पलक्कड़ जिले के थे। इनमें से कम से कम 3 से 4 आतंकी हमलों में मारे गए हैं। हालांकि, ईरान के इस्लामिक स्टेट विरोधी रुख के बावजूद भारत में आई.एस. सदस्य ईराक और अफगानिस्तान भागने के लिए ईरान का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक खुलासे के मुताबिक 2 दर्जन से अधिक केरल से संबंधित आई.एस. गुर्गों ने खुफिया एजैंसियों की आंखों में धूल झोंकते हुए ईरान के रास्ते का इस्तेमाल किया

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