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भारतीय गणतंत्र दिवस : हमें भारतवासी के रूप में हमारे अस्तित्व की कराता है पहचान

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रिपब्लिक डे (Republic Day) एक ऐसा ही खास दिन है, जो एक भारतवासी के रूप में हमें हमारे अस्तित्व की पहचान कराता है और इसीलिए यह दिन हमारे लिए हमेशा गर्व करने का दिन रहेगा।

प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को ‘भारतीय गणतंत्र दिवस’ समारोह मनाया जाता है, जिसमें हमारे देश के राष्ट्रपति देशवासियों को संबोधित करते हैं, तिरंगा फहराते हैं और फिर 21 तोपों की सलामी दी जाती है। इसके बाद विभिन्न राज्यों की झांकियां निकलती हैं और कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को इस बात की जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि हमारे देश के इतिहास में यह दिन क्यों सर्वोपरि है और हर साल इसे मनाया जाना क्यों जरूरी है।

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भारतीय गणतंत्र दिवस : हमें भारतवासी के रूप में हमारे अस्तित्व की कराता है पहचान
Photo Credit Social Media

26 जनवरी, 1930 को ही कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में रावी के किनारे पूर्ण स्वतंत्रता प्रस्ताव पास करके आजादी का जश्न मनाया था। उसी समय से सारे देश में हर साल 26 जनवरी पूर्ण स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा था। जुलाई, 1946 में संविधान सभा चुनाव हुआ जिसमें 296 सदस्यों की सभा में से मुस्लिम लीग को 73 और कांगे्रस को 211 स्थान मिले थे। कांग्रेस के नेताओं में पं0 जवाहर लाल नेहरू, डा0 राजेन्द्र प्रसाद, श्री चक्रवर्ती राजगोपालाचारी सरदार बल्लभ भाई पटेल, श्री गोविंद बल्लभ पंत, श्री बी0जी0 खेर, डा0 पुरूषोत्तम दास टण्डन, मौलाना अबुलकलाम आजाद, खान अब्दुल गफ्फार खान, श्री आसफ अली, श्री रफी अहमद किदवई, श्री कृष्ण सिंहा, श्री कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी, आचार्य जे.बी. कृपलानी और श्री कृष्णमचारी आदि थे।

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इनके अलावा कांग्रेस द्वारा नामांकित सदस्यों में डा0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डा0 सच्चिदानंद सिन्हा, श्री एन. गोपाल स्वामी , आयंगर, डा0 बी.आर. अम्बेडकर, डा. एम.आर. श्री जयकर, श्री अल्लादि कृष्ण स्वामी अय्यर, पं. हृदयनाथ कुंजरू, श्री हरी सिंह गौड़ और प्रो. के.टी. शाह आदि।
मुस्लिम लीग में नवाबजादा लियाकत अली खां, ख्वाजा नाजिमुद्दीन, श्री एच. एस. सुहरावर्दी, सर फिरोज खां नून और सर मोहम्मद जफरूल्ला खां प्रमुख थे।

डा. राजेन्द्र प्रसाद इस सभा के अध्यक्ष थे। 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा का पहला अधिवेशन होना निश्चित हुआ। मुस्लिम लीग न दो संविधान सभाओं की मांग की जिनमें से एक पाकिस्तान के लिये बनाई और दूसरी भारत के लिए। 3 जून, 1947 को माउण्टबेटन योजना प्रस्तुत की गयी जिसमें प्रस्ताव किया गया कि भारत को दो भागों, भारत और पाकिस्तान में बांटा जाये। कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया।अप्रैल, 1949 में बड़ौदा, बीकानेर, उदयपुर, जोधपुर, रीवा और पटियाला तथा देशी राज्यों के प्रतिनिधि संविधान सभा में सम्मिलित हो चुके थे और 4 जुलाई, 1947 तक केवल दो देशी राज्यों जम्मू कश्मीर और हैदराबाद को छोड़कर बाकी सभी देशी राज्यों के प्रतिनिधि संविधान सभा में भाग लेने आ गये थे।

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15 अगस्त, 1947 को भारत के दो टुकड़े भारत और पाकिस्तान नाम से भारत आजाद हुआ। पं. जवाहर लाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने और लाल किले पर तिरंगा फहराया। अक्टूबर, 1947 तक जम्मू-कश्मीर भी भारत में शामिल हो गया और नवम्बर, 1948 में हैदराबाद भी। इस प्रकार पार्लियामेंट भारत की मुकम्मल प्रतिनिधि सभा बन गयी।

26 अगस्त, 1947 के प्रस्ताव के अनुसार एक प्रारूप समिति कायम की गयी थी, जिसके सात मेम्बर थे और डा. बी.आर. अम्बेडकर उसके चेयरमैन थे। इस समिति ने 21 फरवरी, 1948 तक अपना निर्णय प्रस्तुत कर दिया जो 4 नवंबर 1948 को पार्लियामेंट के सामने रखा गया। इस पर 9 नवंबर, 1948 से 17 अक्टूबर, 1949 तक दूसरा वाचन चलता रहा। जिसमें 7635 धाराएं पेश की गयी। 14 नवंबर, 1949 से 26 नवंबर, 1949 तक वाचन हुआ और 26 नवंबर, 1949 को संविधान पर संविधान सभा के हस्ताक्षर होकर संविधान पारित हो गया।

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24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा का अंतिम अधिवेशन हुआ और इसमें नये संविधान के अनुसार डा. राजेन्द्र प्रसाद को भारतीय गणराज्य का पहला राष्ट्रपति चुना गया। 26 जनवरी, 1950 को से नया संविधान लागू किया गया। उसी दिन से हर साल 26 जनवरी को भारत में गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। वैसे तो 24 जनवरी को ही डा. राजेन्द्र प्रसाद भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति चुन लिये गये थे लेकिन गणराज्य की स्थापना के लिये 26 जनवरी, 1930 को पूर्ण स्वराज्य की घोषणा कर दी गयी थी और 15 अगस्त 1947, जब तक भारत स्वतंत्र नहीं हुआ था तब तक हर साल 26 जनवरी को भारतवर्ष की आजादी के रूप में मनाया जाता रहा था। इसलिए 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय त्यौहार है।

इस दिन राष्ट्रपति विजय त्यौहार है। इस दिन राष्ट्रपति विजय चैक पर भारत के सब राज्यों से आये हुए प्रतिनिधियों तथा भारत की तीनों सेनाओं की टुकड़ियों से सलामी लेते हैं। अनेक प्रकार की सुंदर-सुंदर झांकियां, नाच-गाने, बैण्डबाज, हाथी, ऊंट, घोड़ों की सवारियां टैंक, तोप, समुंदरी जहाज और हवाई जहाज के नमूने, कृषि और उद्योग की झांकियां तथा स्कूली बच्चों के नाच-गाने करते हुए ग्रुप राष्ट्रपति को सलामी देते हुए चलते हैं। जो विजय चैक से होते हुए लाल किले तक जाते हैं। इस उत्सव में किसी दूसरे देश का कोई मेहमान भी बुलाया जाता है तो उस दिन दर्शकों की इतनी भीड़ होती है कि इण्डिया गेट पर ऐसा मालूम होता है जैसे कि इंसानों का समुंदर लहरा रहा हो। रात को इण्डिया, राष्ट्रपति भवन, सेंट्रल सेक्रेटेरियट, पार्लियामेंट हाउस तथा मुख्य सरकारी इमारतों पर रोशनी की जाती है।

वास्तव में भारत की जनता को राज्य 26 जनवरी, 1950 से ही प्राप्त हुआ। 15 अगस्त 1947 को हम स्वतंत्र जरूर हो गये थे लेकिन हमारा कोई संविधान लागू नहीं था और न ही कोई गणराज्य राष्ट्रपति था। 15 अगस्त का हमें आजादी मिली थी। अंग्रेज भारत को छोड़कर चले गये थे। लेकिन जनवरी, 1950 को जनता का राज्य हुआ। इसलिए 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

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