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जीडीए नहीं वसूल सकेगा राजनगर एक्सटेंशन में एलिवेटेड रोड और मेट्रो सेस

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गाजियाबाद: जीडीए अब राजनगर एक्सटेंशन में एलिवेटेड रोड और मेट्रो स्टेशन सेस नहीं वसूल सकेगा, इस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। मंगलवार को सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 1.5 से 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को भी गैरकानूनी बताया है। अदालत के इस फैसले से राजनगर एक्सटेंशन के बिल्डर खुश दिखाई दे रहे हैं। वहीं, जीडीए इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि इससे जीडीए को 300 करोड़ से अधिक का नुकसान होगा। क्रेडाई गाजियाबाद के प्रेसिडेंट गौरव गुप्ता का कहना है कि सेस लगाकर जीडीए ने राजनगर एक्सटेंशन के डिवेलपमेंट को रोक दिया था। अफोर्डेबल हाउसिंग के रूप में विकसित हो रहे राजनगर एक्सटेंशन को एक बार फिर विकास के लिए रास्ता मिलेगा।

बिल्डरों ने दायर की थी अपील

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जीडीए ने राजनगर एक्सटेंशन में मेट्रो स्टेशन सेस और एलिवेटेड रोड सेस लगाया था। इसके अलावा जीडीए ने एफएआर भी बेच दिया था। इसके विरोध में बिल्डरों ने हाई कोर्ट में केस दायर किया था। बिल्डरों का तर्क था कि जीडीए ने जो एफएआर बेचा है, वो शासन आदेश के खिलाफ है। साथ ही जबरन तरह-तरह के सेस लगाए गए हैं। वहीं, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के नाम पर 2 लाख रुपये जमा करवाए जाते हैं। इसके खिलाफ ही हाई कोर्ट ने आदेश जारी किया है।

जमा किए पैसे मिल सकते हैं वापस

राजनगर एक्सटेंशन के बहुत से बिल्डरों ने एफएआर को खरीदने के लिए जीडीए में पैसा जमा करवाया है। अब वह जीडीए से पैसे की मांग कर सकते हैं। क्रेडाई के पदाधिकारियों का कहना है कि इससे करीब 35 करोड़ रुपये जीडीए को वापस करने पड़ेंगे।

विकास शुल्क मिलने की आस जगी

सीएटीपी आशीष शिवपुरी का कहना है कि हाई कोर्ट ने मेट्रो और एलिवेटेड सेस को नहीं वसूलने का आदेश दिया है। इससे करीब 900 रुपये प्रति वर्ग मीटर से जीडीए को नुकसान होगा, लेकिन इस केस की वजह से विकास शुल्क का करीब 100 करोड़ रुपये का जीडीए का बकाया है, उसे वसूला जाएगा।

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