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सत्संग के माध्यम से अपने जीवन को बनाए उज्ज्वल:रुक्मिणी

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श्री कृष्ण-रुक्मिणी की सजाई गई झांकी

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रिपोर्ट:हर्ष यादव

मुसाफिरखाना(अमेठी)।क्षेत्र के हाजीगंज गांव के शिव मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन के मौके पर भारी तादाद में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इस दौरान कथा व्यास ने सत्संग की भी अमृत वर्षा की। भगवान श्री कृष्ण के विवाह की कथा सुनाई। गुरुवार को कथा व्यास रुक्मिणी शास्त्री ने कहां की सत्संग के माध्यम से अपने जीवन को उज्ज्वल बनाएं। परमार्थ और परोपकार करके परमात्मा के निकट पहुंचा जा सकता है। कथा व्यास ने कहा जो जितना ऊंचा होगा, उसके शत्रु भी उतने ही अधिक होंगे। कुछ शत्रु अकारण ईर्ष्यावश हो जाते हैं । यह श्रीकृष्ण के साथ भी हुआ है। श्रीकृष्ण की लोकप्रियता को उस समय के राजा सहन नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कहा की जो प्रकृति के बस में रहता है। वही जीव है और जो प्रकृति को बस में रखता है वह ईश्वर है। कृष्ण ने सुदामा के सभी कष्ट दूर कर दिए। जो मित्र को दुखी देखकर उसे निवारण का प्रयास नहीं करता,कष्ट में सहयोगी नहीं बनता, वह मित्रता के योग्य नहीं हो सकता।श्री कृष्ण -रुक्मणि की सजी झांकी आकर्षण का केंद्र बनी रही।इस मौके मोहित गुप्ता,राणा प्रताप यादव,रामबख्श, जंग बहादुर चौकीदार, रोहित श्याम,रणजीत, जंगदीश,लालमणि,दिलीप साहू,जोखन,विश्वनाथ, रामसरन,आशीष आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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