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भाजपा में हुए शामिल ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूरी हुई मुराद राजमाता विजयराजे सिंधिया की

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धुलंडी के दिन कांग्रेस से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा कर रख दिया है। वे आज भाजपा का दामन थाम लिया है। उनको भाजपा की सदस्यता राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा ने दिलाई।

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इस अवसर पर पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा ने कहा कि राजमाता सिंधिया जी ने भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना और विस्तार करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। आज उनके पौत्र हमारी पार्टी में आए हैं, ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार के सदस्य हैं, ऐसे में हम उनका स्वागत करते हैं।

आपको बताते दें कि यह करके वे अपनी दादी की मुराद पूरी कर दी है। क्योंकि राजमाता विजयाराजे सिंधिया चाहती थीं कि उनका पूरा खानदान भाजपा में रहे। लेकिन माधवराव सिंधिया और उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे। लेकिन ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस का साथ छोड़कर अपनी दादी की तमन्ना पूरी कर दी है।
अपडेट..
-भाजपा नेता जफर इस्लाम के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा मुख्यालय पहुंच गए हैं। वे सीधे ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के कमरे में चले गए।

– भाजपा नेता जफर इस्लाम के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया घर से निकल गए हैं। वे भाजपा मुख्यालय पहुंचेंगे।

जिवाजी राव सिंधिया और विजयाराजे सिंधिया की पांच संतानों में माधवराव के अलावा पोते ज्योतिरादित्य ही कांग्रेस में थे। 18 साल तक कांग्रेस के साथ सियासत करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा में आ सकते हैं।

ग्वालियर के सिंधिया राजघराने में 1 जनवरी 1971 को पैदा हुए ज्योतिरादित्य कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे हैं। वे कांग्रेस के पूर्व मंत्री स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के पुत्र हैं और ग्वालियर पर राज करने वाली राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने 1957 में कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरुआत की और वे गुना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। सिर्फ 10 साल में ही उनका मोहभंग हो गया और 1967 में वो जनसंघ में शामिल हो गई और भाजपा की संस्थापक सदस्य रहीं।

माधवराव सिंधिया अपने मां-पिता के इकलौते बेटे थे, वो चार बहनों के बीच अपने माता-पिता की तीसरी संतान थे। माधवराव सिंधिया सिर्फ 26 साल की उम्र में सांसद बने, लेकिन वो बहुत दिन तक जनसंघ में नहीं रह पाए। 1977 में आपातकाल के बाद उनके रास्ते जनसंघ और अपनी मां विजयाराजे सिंधिया से अलग हो गए।

1980 में माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतकर केंद्रीय मंत्री बन गए। उनका विमान हादसे में 2001 में निधन हो गया।

निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना सीट पर उपचुनाव हुए तो सांसद चुने गए। 2002 में पहली जीत के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी चुनाव नहीं हारे थे, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

विजयाराजे सिंधिया की बेटियों वसुंधरा राजे सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया ने भी राजनीति में प्रवेश कर गई। 1984 में वसुंधरा राजे बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुईं, वो दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री बनी।

वसुंधरा राजे सिंधिया की बहन यशोधरा 1977 में अमेरिका चली गईं। इनके तीन बच्चे हैं लेकिन राजनीति में किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। 1994 में जब यशोधरा भारत लौटीं तो उन्होंने मां की इच्छा के अनुसार, भाजपा में शामिल होकर 1998 में चुनाव लड़ा। पांच बार विधायक रह चुकीं यशोधरा राजे सिंधिया शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री भी रही हैं।

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