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पाकिस्तान गिलगिट-बल्टिस्तान में भेज रहा कोरोना पॉजिटिव मरीज

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मीरपुर । पाकिस्तान इस वक्त बुरी तरह कोरोना वायरस की मार झेल रहा है। इसके बावजूद अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। स्थानीय लोगों के विरोध के बीच पाक सेना ने COVID 19 के मरीजों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगिट-बल्टिस्तान के क्षेत्र में भेजना शुरू कर दिया है। ये दोनों ही सबसे पिछड़े इलाकों में से हैं। अब तक पाकिस्तान में 1190 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं जबकि 9 लोगों की मौत हो चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक मीरपुर और दूसरे शहरों में स्पेशल क्वॉरंटीन सेंटर बनाए गए हैं जहां पंजाब के मरीजों को लाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक पाक सेना के टॉप अफसरों ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी कोरोना पॉजिटिव मरीज को आर्मी फसिलटी या सेना के घरों के पास न रखा जाए। नतीजन बड़ी संख्या में गाड़ियों में बंद करके ये मरीज POK और गिलगिट-बल्टिस्तान में लाए जा रहे हैं।

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क्वॉरंटीन के नाम पर बनाए गए कैंप्स में सीमित मेडिकल सुविधाएं हैं। जैसे हालात यहां हैं उनसे लोगों के मन में बीमारी के और फैलने का डर भी पैदा हो गया है। कैंप में रखे गए एक शख्स का कहना है कि अगर उन्हें कैंप पहुंचने से पहले वायरस इन्फेक्शन नहीं हुआ होगा और कैंप पहुंचने के बाद वह पॉजिटिव निकले तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। वहां रखे गए लोगों ने बताया है कि पानी या फ्लश की सुविधा भी नहीं है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के आधे से ज्यादा केस उन लोगों के हैं, जो ईरान से लौटे थे। तफ्तान बॉर्डर को 16 मार्च से बंद कर दिया गया है लेकिन ईरान से लौटे हजारों यात्रियों को दो हफ्ते क्वॉरंटीन रहने की शर्त पर अंदर आने की इजाजत दी गई है। इसके बाद दो हफ्ते उन्हें अपने शहरों में क्वॉरंटीन रहना होगा।

हालात इतने गंभीर हो गए सुरक्षाकर्मियों को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इश्तियाक हुसैन नाम के छात्र ने बताया कि लोगों के साथ जानवरों से भी खराब व्यवहार किया जा रहा है। उनका कोरोना वायरस के लिए टेस्ट भी नहीं किया गया।

तफ्तान के असिस्टेंट कमिश्नर नजीब कंबरानी का कहना है कि उसके काफी दूर होने के कारण बेसिक सुविधाएं दिए जाने में समस्या हो रही है। जितना संभव हो पा रहा है सुविधा दी जा रही है। 4600 लोग तफ्तान में रोके गए हैं। करीब 1800 लोगों को उनके शहर भेज दिया गया है।

पाकिस्तान में अब तक कोरोना के 301 मामले सामने आ चुके हैं और दो लोगों की मौत की भी खबर है। उधर, पाक पीएम इमरान खान ने कोरोना को हराने के सबसे अहम हथियार, सोशल डिस्टेंसिंग को लागू करने के लिए शहरों को बंद करने से साफ इनकार कर दिया है जिससे यह सवाल बरकरार है कि आखिर देश इस चुनौती से निपटने की तैयारी कैसे कर रहा है। खासकर तब जब स्वास्थ्य सेवाओं की हालत इतनी लचर है।

स्थानीय लोगों ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। इस इलाके का इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से ही खराब है और ट्रेन्ड मेडिकल स्टाफ की भी कमी है। लोगों को डर है कि पूरे इलाके में वायरस फैल जाएगा और स्थानीय कश्मीरियों को खतरे में डाल दिया जाएगा। मुजफ्फराबाद के लोगों का कहना है कि पाक सेना को सिर्फ पंजाब की चिंता है। जानकारों का कहना है कि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से पंजाब के जितना अहम नहीं है।

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