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मानवजाति को अदृश्य ताकतवर रहस्यमय’ कोरोना वायरस’ के आक्रमण का भय लगा सताने

सी. के. खेतान

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गीता का उपदेश बेमानी हो रहा है इसलिए नहीं कि उसमें सार नहीं है बल्कि इसलिए कि जिस देह को मायावश लोक अजर अमर मांगते हैं आज उसी पर दो तरह की चोट हो रही है देह पर एक अदने से किंतु अदृश्य ताकतवर रहस्यमय कोरोना वायरस के आक्रमण सताने लगा है। पूरी दुनिया के सभी देश की आन और वैज्ञानिक शोधों के बावजूद भी कोरोना अदृश्य रहस्य और खतरनाक वायरस बना हुआ है। न्यूक्लियर बम लाकर हमें विस्फोट की ताकत,ऊर्जा को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया किंतु कोरोना के अनु परमाणु इस तरह फैलने में विस्फोट होंगे या किसी को नहीं पता,इतना पता है कि कोरोना वायरस जब अपनी ताकत दिखाएंगे तो हमारी सांसें फूलने लगेगी और खेल खत्म होने लगेगा।

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रायपुर। गीता का उपदेश बेमानी हो रहा है, इसलिए नहीं की उसमें सार नहीं है बल्कि इसलिए कि जिस देह को मायावश लोग अजर अमर समझने लगे हैं, जिस आत्मा को ज्ञानवश अमर मानते हैं आज उसी पर दो तरह की चोट हो रही है। देह पर एक अदने से किंतु अदृश्य ताकतवर रहस्यमय कोरोना वायरस के आक्रमण का भय सताने लगा है। पूरी दुनिया के सभी देश ज्ञान और वैज्ञानिक शोधहो बावजूद भी करोना अदृश्य रहस्यमय और खतरनाक वायरस बना हुआ है। न्यूक्लियर बम लाकर हमने विस्फोट की ताकत की ऊर्जा को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया।

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ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया अकेलेपन से ग्रसित हो गई। वेदना व्यक्तिगत भी होती है, परिवारिक भी होती है,समुदायिक भी होती है और धार्मिक भी होती है लेकिन ऐसी वैश्विक वेदना पहली बार देखने को मिली है। प्राकृतिक आपदाओं में यदि कभी भूकंप या बाढ़ आती है तो विनाश और मृत्यु तत्कालिक होती है। लेकिन तिल-तिल मरने की स्थिति नहीं होती है। जब मोहल्ले में या रिश्तेदारों में किसी की मृत्यु होती थी तो मेरी मां बोलती थी कि इतनी ही श्वास लिखी थी। आज लगभग पूरा विश्व ऐसी बीमारी से ग्रसित हो गया है,जिसका प्रकोप होने से श्वास लेने में कठिनाई शुरू होती है और अंतात: फेफड़े जवाब दे जाते हैं!

यह इंसान के वही फेफड़े हैं,जिसमें दम भरकर वह ना केवल पूरे दुनिया को देखने के लिए चल पड़ा था बल्कि अंतरिक्ष में चांद और मंगल तक पहुंचने लगा था। उनके अभिमान के आगे सभी नमस्तक हो गए हैं जो दम से चूर रहते थे कि उनके पास सोना है चांदी है पैसा है घर है मकान है ऐसो आराम  के सारे साधन है अब लग रहा है सब कुछ बोना हो गया है। मनुष्य का अहंकार सब कुछ ऐसा सिमट गया है जैसे उसे किसी ने जादू की दिव्या में बंद कर दी हो। यह वेदना और अकेलेपन व्यक्तिगत भी है और सामूहिक भी व्यक्तिगत इसलिए कि घर में भी परिवार के सदस्य आपस में गाहे-बगाहे शांति और आशंकित हो जाते हैं। उनके पड़ोसी तो अनजान हो गए हैं उनके रिश्तेदार तो दूर हो ही गए हैं उनके ऐश्वर्या की धमक तो कम हो गई है किंतु सबसे मुश्किल हो रहा है अपने आप को पहचानने में।

गीता का उपदेश बेमानी हो रहा है इसलिए नहीं कि उसमें सार नहीं है बल्कि इसलिए कि जिस देह को मायावश लोक अजर अमर मांगते हैं आज उसी पर दो तरह की चोट हो रही है देह पर एक अदने से किंतु अदृश्य ताकतवर रहस्यमय कोरोना वायरस के आक्रमण सताने लगा है। पूरी दुनिया के सभी देश की आन और वैज्ञानिक शोधों के बावजूद भी कोरोना अदृश्य रहस्य और खतरनाक वायरस बना हुआ है। न्यूक्लियर बम लाकर हमें विस्फोट की ताकत,ऊर्जा को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया किंतु कोरोना के अनु परमाणु इस तरह फैलने में विस्फोट होंगे या किसी को नहीं पता,इतना पता है कि कोरोना वायरस जब अपनी ताकत दिखाएंगे तो हमारी सांसें फूलने लगेगी और खेल खत्म होने लगेगा।

अभी सभी घरों में बंद है,सीमाएं सील कर दी गई है,रास्ते बंद कर दिए गए हैं, हवाई जहाज रोक दी गई है,रेले पटरिया पर खड़ी हो गई है,बसों के चक्के जाम हो गए हैं। किंतु है ये चारों तरफ तेजी से फैल रहा है पांव पसार रहा है,चल रहा है,उड़ रहा है और सबको अपनी जकड़ में ले रहा है। ऐसे समय में जो वेदना की पराकाष्ठा है तू मुक्ति का रास्ता भी दिखाता है। मुक्ति का रास्ता यह है की मांग की पूर्ति कम साधनों से करनी है। महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति पर तत्काल रोक लगानी है। नेटवर्क से बने रिश्तो को कम कर के व्यक्तिगत संबंधों को तरजीह देनी है। पुराने दोस्त,लंबे समय से भूल चुके रिश्तेदार फोन करके व्हाट्सएप के माध्यम से हाल-चाल पूछ रहे हैं, यहां एक बड़ा परिवर्तन है। यह परिवर्तन वेदना से उपजा है या परिवर्तन अकेलेपन से उपजा है यह परिवर्तन घोर अंधेरे से निकला है। जब राह नहीं झुकती तो सभी भाग्य पर छोड़ देने का मन करता है यह समय समर्पण करने का नहीं किंतु सहानुभूति जताने का तो है। हमें मैदान नहीं छोडऩा है किंतु जिन लोगों का ध्यान करना छोड़ दिया था उनका ध्यान करना सीख लिया है।
हर समस्या एक समाधान लेकर पैदा होती है।

कोरोना भी दुनिया की सारी समस्याओं का समाधान लेकर पैदा हुआ है। मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि जिनकी मृत्यु हो रही है उससे दुख नहीं होता किंतु यह भी सच है कि प्रकृति से जो खिलवाड़ हम करते रहे उस खिलवाड़ पर रोक लगाने का समय आ गया है। हमने अपने को बहुत ताकतवर समझा और दुनिया में विचरण करने वाले ताकतवर जानवरों जैसे शेर हाथी घडिय़ाल जीव जंतु को वश में कर लिया,जिनको प्राकृतिक ने स्वच्छछंद वितरण करने का अवसर और वातावरण दिया था,जो जंगल पहाड़ नदी नाले समुद्र आकाश उनके वितरण के लिए बने थे उसके एक-एक इंच पर हमने अधिकार जताना शुरू किया। एक 1 इंच पर कब्जा करना तो संभव नहीं है लेकिन हम इस मुगालते मैं आ गए थे कि दुनिया का कोई भी तत्व हमारी पहुंच का अधिकार के बाहर नहीं है अत:अंतरिक्ष में पृथ्वी की पहुंच के बाहर हम निकल गए,पाताल के अंतिम छोर तक हम पहुंच गए,समुद्र की गहराई हमारे लिए कम पड़ गई, पहाड़ों की ऊंचाइयां हमारे लिए बनी हो गई।

ऐसी स्थिति में ईश्वर ने एक सबक सिखाने की सोची की दुनिया में सबसे शक्तिशाली मानव का मस्तिष्क है और सबसे शुद्ध प्रत्येक जीव में बसी हुई आत्मा ही मानसिक थी ताकत हमने ऐसे अविष्कार इजाद करने में दिखाया,जो विनाश का कारण ही बनता है। हिरोशिमा को इस साल 75 वर्ष हो जाएंगे वह विनाश हम आज तक भूल नहीं पाएंगे इन 75 वर्षों में हमने पर्यावरण को इतना दूषित कर दिया है कि समुद्र उछाल उछालकर बाहर आने लगा है पर्वत पिघलने लगा है हवा में स्वास्थय चुका है आज वही फेफड़े एक अदृश्य रहस्यमयी भयावाह कोरोना वायरस की चपेट में जब सामूहिक रूप से हमें फेफड़ों की संक्रमित करने की चाल चली तो हमने या नहीं सोचा था कि भगवान है। फेफड़ों पर किसी तरह का आक्रमण कर देंगे यह हमारे मासिक की ताकत सोचने पर मजबूर हो जाएगी।

ना केवल भारत के शहरों में वातावरण शुद्ध होने लगा है बल्कि आसमान पर वातावरण भी वापस शुद्ध होने लगी है। शुद्धता और स्वच्छता का यह आलम इतने बड़े शहर में कभी देखने को नहीं मिली। नियति को यही मंजूर था कि अगर हम नहीं सुधरे तो प्रकृति हमें सुधरेगी दुनिया में वैभव की जो पागलपन की दौड़ है वह कुछ हद तक इसे इससे थामेगी की पूरी दुनिया के जल भंडार वायु मिट्टी को ऐसे थोड़ी राहत मिलेगी। मैं सिर्फ लॉक डाउन की बात नहीं कर रहा हूं मैं उस एहसास की बात कर रहा हूं,जो सबसे ताकतवर इंसान को क्षणों में इस बात का एहसास करा दिया गया है की जान हथेली पर लेकर चलने वाली इंसान तुरंत जान को मु_ीओं में बंद करने ही सोचने लगा है। लॉक डाउन मैं मानव मानव संबंधों को माना और जानवरों के संबंधों को मानव और प्रकृति के संबंधों को मानव और विज्ञान के संबंधों को नए सिरे से परिभाषित किया है अब इस परिभाषित के जो अर्थ निकलेंगे वह पहले से ज्यादा शुचिता पूर्ण स्वच्छ और स्वस्थ होगा ऐसे लगता है इंसान इंसान को ज्यादा सद्भावना और सहानुभूति से देखेगा।
लेखक-छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आईएएस है।

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