Jan Sandesh Online hindi news website

लॉकडाउन : जिंदा मानवीय स्मृति का सबसे अनूठा अकेलापन

हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से डरा हुआ महसूस कर रहा है। मनुष्य मात्र से डरते हुए उससे दूर रहना एकदम नई चीज है और इसका असर हमारे अवचेतन पर पड़ रहा है। समस्या नई है तो इससे निपटने का अंदाज भी नया होगा और सबको अलग-अलग ढंग से इसका संधान करना होगा। परिवार साथ मिलकर ताश, लूडो या कोई और दिमागी खेल खेले। अकेले किताब पढऩे के बजाय कुछ पढ़कर सुनाया जाए। साझा सूत्र यही कि अलगाव का इलाज और किसी भी चीज से पहले मनुष्य में ढूंढा जाए।

0
Share

लॉकडाउन के चलते उपजी आर्थिक परेशानियां, खाने-पीने के सामानों की वास्तविक या संभावित किल्लत और नौकरी जाने की आशंका जैसे कारकों को फिलहाल छोड़ भी दें तो सिर्फ अकेलापन ही हम सबको बहुत-बहुत बेचैन बना देने के लिए काफी है। कई सालों से यह कहा जा रहा था कि सोशल मीडिया के इस दौर में लगातार डिजिटल संपर्क के बावजूद हम सब अकेले होते जा रहे हैं। हमारी वर्चुअल दुनिया हमें घर-परिवार, पास-पड़ोस की वास्तविक दुनिया से काटती जा रही है।

और पढ़ें
1 of 81
कोरोना वायरस,कोरोना,coronavirus vaccine,Coronavirus In India,coronavirus,lockdown News, News in Hindi, Latest News, up Headlines,hindi समाचार
लॉकडाउन : जिंदा मानवीय स्मृति का सबसे अनूठा अकेलापन

एक हद तक वह बात सच भी थी, लेकिन अगर पूरी तरह सच होती तो इस अलगाव से निपटना हमारे लिए इतना मुश्किल न होता। मनुष्य मात्र से डरते हुए उससे दूर रहना एकदम नई चीज है और इसका असर हमारे अवचेतन पर पड़ रहा है। समस्या नई है तो इससे निपटने का अंदाज भी नया होगा और सबको अलग-अलग ढंग से इसका संधान करना होगा। परिवार साथ मिलकर ताश, लूडो या कोई और दिमागी खेल खेले। अकेले किताब पढऩे के बजाय कुछ पढ़कर सुनाया जाए। साझा सूत्र यही कि अलगाव का इलाज और किसी भी चीज से पहले मनुष्य में ढूंढा जाए।

मोबाइल फोन और इंटरनेट की बदौलत वह वर्चुअल दुनिया आज भी हमें उपलब्ध है लेकिन उससे हमें कोई निजी राहत भी नहीं मिल पा रही है। लॉकडाउन ने हमें व्यावहारिक दृष्टि से ही नहीं, मनोवैज्ञानिक तौर पर भी वास्तविक दुनिया की अहमियत का अहसास कराया है। अकेलापन हमारे लिए कोई नई चीज नहीं। उसकी शक्लें हमारी देखी हुई हैं। चाहे वह विदेशों में सेट्ल हो चुकी संतानों वाले सीनियर सिटिजंस का अकेलापन हो या वह जो गंभीर बीमारी के बाद हॉस्पिटल के कमरे में महसूस होता है, या फिर वह जो अचानक हाथ लगी बेरोजगारी के चलते आता है।

कोरोना वायरस,कोरोना,coronavirus vaccine,Coronavirus In India,coronavirus,lockdown News, News in Hindi, Latest News, up Headlines,hindi समाचार
लॉकडाउन : जिंदा मानवीय स्मृति का सबसे अनूठा अकेलापन

लेकिन यह जिंदा मानवीय स्मृति का सबसे अनूठा अकेलापन है, जिसमें हर व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से डरा हुआ महसूस कर रहा है। कोविड-19 के खिलाफ चल रही विश्वव्यापी जंग को ध्यान में रखते हुए अपने देश में 21 दिनों का जो लॉकडाउन घोषित किया गया है, उसके तरह-तरह के साइड इफेक्ट दिखने लगे हैं। ऐसे ही साइड इफेक्ट्स में से एक है मनोवैज्ञानिक बीमारियों के शिकार लोगों की बढ़ती संख्या।

कोरोना वायरस,कोरोना,coronavirus vaccine,Coronavirus In India,coronavirus,lockdown News, News in Hindi, Latest News, up Headlines,hindi समाचार
लॉकडाउन : जिंदा मानवीय स्मृति का सबसे अनूठा अकेलापन

इंडियन सायक्याट्री सोसायटी के एक सर्वे के मुताबिक मानसिक रोगों की शिकायतें लेकर आने वालों की संख्या में अचानक 20 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ये आंकड़े पहले एक सप्ताह के ही हैं। समझा जा सकता है कि लॉकडाउन की वजह से दैनिक जीवन में आए इस बदलाव को झेलना लोगों के लिए कितना मुश्किल साबित हो रहा है।

कोरोना वायरस,कोरोना,coronavirus vaccine,Coronavirus In India,coronavirus,lockdown News, News in Hindi, Latest News, up Headlines,hindi समाचार
लॉकडाउन : जिंदा मानवीय स्मृति का सबसे अनूठा अकेलापन

इस स्टडी के ब्यौरे अपनी जगह हैं लेकिन यह हमारे प्रत्यक्ष अनुभव की भी बात है कि 24 घंटे घरों में बंद रहते हुए हमारे स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ रहा है। जो बातें अबतक कोई मुद्दा ही नहीं होती थीं, उन पर भी परिवार के सदस्य एक-दूसरे पर झल्ला पड़ते हैं या खुद को जब्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने को मजबूर दिखाई देते हैं।

 

You might also like
Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।
%d bloggers like this: