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इमरान के दावे की खुली पोल, पाकिस्‍तानी मदरसे और धार्मिक स्थल बने बच्‍चों के साथ यौन शोषण का गढ़

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इस्लामाबाद। उसका सपना डॉक्टर बनना था, वह हर रोज स्कूल पढ़ने जाता यही सोचकर की एकदिन अपने सपने पूरे करेगा, लेकिन उसके इस सपने को कुचल कर रख दिया, उसके खुद के ही स्कूल टीचर ने। 11 साल के इस बच्चे को अब स्कूल से डर लगता है। इसकी वजह स्कूल परिसर में उसके साथ हुई हैवानियत है। पंजाब के पकपाटन बस्ती में रहने वाला यह बच्चा बिना कोई छुट्टी लिए रोज मदरसे में पढ़ने जाता था। एक दिन मौलवी उसे वॉशरूम ले गया और उसके साथ कुकर्म करने की कोशिश की।

उसकी रिश्तेदार शाजिया ने बताया कि उन्हें लगता है कि पाकिस्तान के मदरसों में छोटे बच्चों का यौन शोषण आम बात है। वह कहती हैं कि वह मौलवी मोइद शाह को बचपन से जानती हैं और वह कई बच्चियों का भी उत्पीड़न कर चुका है। शाजिया ने बताया कि इमाम पहले भी कई लड़के और लड़कियों की साथ ऐसी हरकत कर चुका है । उसने एक बच्ची से इतना पीटा था कि उसका पीठ टूट गई थी।

एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के पास दर्जनों ऐसे एफआईआर मिले हैं जो कि धार्मिक स्कूलों और मदरसा में इमाम द्वारा बच्चों का यौन उत्पीड़न और रेप से जुड़े हैं।

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पुलिस खुद स्वीकार करती है कि मौलवियों द्वारा बच्चों का उत्पीड़न यहां व्यापक स्तर पर हो रहा है। जो मामले पुलिस के पास आते हैं वे वास्तविक मामले से बेहद कम हैं। एपी के रिपोर्टरों ने पीड़ितों और परिजनों से बात की जो काफी डरे हुए नजर आते हैं।

पाकिस्तान में 22 हजार से अधिक पंजीकृत मदरसा हैं और उनमें 20 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन कई ऐसे स्कूल हैं जो कि पंजीकृत नहीं है। वे स्थानीय मौलवियों द्वारा शुरू किए जाते हैं जो बच्चों भोजन और रहने की व्यवस्था का लालच देकर बुलाते हैं।

यहां मदरसा के कामकाज को देखने के लिए कोई सेंट्रल बॉडी नहीं है। न ही ऐसी कोई संस्था जो कि इमामों और मौलवियों द्वारा बच्चों के उत्पीड़न के आरोपों की जांच करे। वहीं, कैथलिक चर्च में ऐसी व्यवस्था है।

पीएम इमरान खान ने सत्ता में आने के बाद पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने और मस्जिद को ज्यादा जवाबदेह बनाने का दावा तो किया था लेकिन उनकी दावे के अनुरूप ऐसा कुछ जमीन पर दिख नहीं रहा। क्योंकि न तो पढ़ाई आधुनिक हो पाई है और बच्चों का यौन शोषण ही यहां रुक रहा है।

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