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चौंकाने वाला खुलासा : बैंकों को इन 10 कंपनियों ने बनाया कंगाल , जानें इनका नाम

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इन 10 कंपनियों ने बैंकों को बनाया कंगाल, जानें इनका नामभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा आरटीआई के एक जवाब से चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। केंद्रीय बैंक ने एक सूची में उन बड़ी-बड़ी कंपनियों के नाम बताए हैं, जिन्होंने बैंकों से लोन तो लिया, लेकिन उन्हें वापस नहीं किया। इनमें फरार हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की कंपनियों सहित शराब कारोबारी विजय माल्या की भी कंपनी का नाम है, जिसने बैंकों का पैसा पचाया। जब बैंकों को लगा कि वह अब अपना लोन इन कंपनियों से वसूल नहीं कर पाएंगी तो उन्होंने इन सबको राइट ऑफ कर दिया।

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मेहुल चोकसी नंबर 1
फरार हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी तथा विजय माल्या सहित कुल 50 विलफुल डिफॉल्टर्स पर 30 सितंबर, 2019 तक कुल 68,607 करोड़ रुपये के बकाये को राइट ऑफ किया गया है। बैंकों का पैसा पचाने वालों की सूची में गीतांजलि जेम्स के मेहुल चोकसी का नाम सबसे ऊपर है और उसके ऊपर 5,492 करोड़ रुपये का बकाया है।

रुचि सोया भी लिस्ट में
आरईआई एग्रो पर 4,314 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि विनसम डायमंड्स पर 4,076 करोड़ रुपये का बकाया है। रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड पर 2,850 करोड़ रुपये, कुडोस केमी लिमिटेड पर 2,326 करोड़ रुपये, रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर 2,212 करोड़ रुपये, जबकि जूम डिवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड पर 2,012 करोड़ रुपये का बकाया है।

माल्या भी पीछे नहीं
विजय माल्या का किंगफिशर एयरलाइंस इस सूची में नौवें नंबर पर है, जिसपर कुल 1,943 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे बैंक ने राइट ऑफ कर दिया है। फोरइवर प्रेसियस जूलरी ऐंड डायमंड्स प्राइवेट लिमिटेड पर 1,962 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि डेक्कन क्रॉनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड पर 1,915 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे राइट ऑफ कर दिया गया है।

नक्षत्र ब्रैंड भी पीछे नहीं
चोकसी की एक दूसरी कंपनी गिली इंडिया तथा नक्षत्र ब्रैंड्स पर 1,447 करोड़ रुपये तथा 1,109 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसे राइट ऑफ किया गया है। झुनझुनवाला ब्रदर्स के आरईआई एग्रो पहले से ही ईडी के निशाने पर है। सीबीआई तथा ईडी विनसम डायमंड्स के फ्रॉड की कथित फर्जीवाड़े की जांच कर रहा है।

कलम वाले रोटोमैक भी
विक्रम कोठारी का रोटोमैक इस सूची में चौथे नंबर पर है। उन्हें और उनके बेट राहुल कोठारी को बैंक लोन डिफॉल्ट मामले में सीबीआई ने अरेस्ट किया है। आरटीआई ऐक्टिविस्ट साकेत गोखले ने बीते 16 फरवरी को विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची मांगी थी।

क्या होता है लोन राइट ऑफ
लोन राइट-ऑफ करना मतलब जब बैंकों को लगता है कि उन्होंने लोन बांट तो दिया, लेकिन अब वसूलना मुश्किल हो रहा है। अब गणित ऐसी उलझी कि बैलेंस शीट ही गड़बड़ होने लगती है। ऐसे में बैंक उस लोन को ‘राइट-ऑफ’ कर देता है। यानी यह मान लेता है कि इस लोन की रिकवरी अब हो नहीं पा रही है और इस लोन अमाउंट को बैलेंस शीट से हटा देता है, यानी गया पैसा बट्टे खाते में।

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