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खुलासा: चीन में 82 हजार नहीं, 230 शहर में 6 लाख लोग कोरोना संक्रमित!

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बीजिंग। कोरोना वायरस महामारी को लेकर चीन के जारी किए गए आंकड़ों और संक्रमण को पूरी तरह रोक पाने के दावों पर लगातार संदेह बना हुआ है। अमेरिका समेत कई देशों ने चीन पर खुलेआम संक्रमण के आंकड़े छुपाने के आरोप लगाते रहे हैं। कोई भी आधिकारिक आंकड़ा रखने के मामले में चीन पहले से ही काफी बदनाम है। इन सबके बीच ताजा खुलासे ने चीनी दावों की पोल खोलकर रख दी है।

 तो चीन में 6,40,000 लोग संक्रमित!
फॉरेन पालिसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में कोरोना के कारण 6,40,000 लोग संक्रमित हुए। जबकि इस खतरनाक वायरस ने चीन के 230 शहरों को अपनी जद मे लिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसमें फरवरी से लेकर अप्रैल के अंत तक संक्रमित लोगों की सूची मौजूद है। जबकि संक्रमित मरीजों की कंफर्म संख्या के साथ इसमें उनके मिलने के स्थान की जीपीएस कोडिंग भी दर्ज है।

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वुहान का डेटा भी शामिल
इस डेटा में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित हुबेई प्रांत के वुहान शहर में मिले संक्रमितों की संख्या भी शामिल है। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि इस डेटा को अपडेट करने वाले कंफर्म और ठीक हुए रोगियों की संख्या के निर्धारण के लिए कौन सा तरीका प्रयोग करते थे।

संक्रमित कहां मिले, इसकी पूरी जानकारी दर्ज
इस डेटा में अस्पतालों के साथ संक्रमितों के मिलने वाले स्थान जैसे होटल, सुपरमार्केट, रेलवे स्टेशन, रेस्तरां और स्कूलों के नाम भी शामिल हैं। जैसे इसमें लिखा है कि 14 मार्च को पूर्वी शहर झेनजियांग के एक रेस्टोरेंट में कोरोनोवायरस का एक मामला मिला, जबकि हरबिन के उत्तरपूर्वी प्रांतीय राजधानी के एक चर्च ने 17 मार्च को संक्रमण के दो केस मिले। हालांकि इस डेटा में इसका उल्लेख नहीं है कि संक्रमित मरीज ठीक हुआ या उसकी मौत हो गई।

चीनी सरकार ने किया था ये दावा
चीनी सरकार ने दावा किया था कि उनके देश में नवंबर 2019 से लेकर अभी तक कोरोना के केवल 82919 मामले ही आए हैं। जबकि 4633 लोगों की मौत हुई है। चीन ने यह भी दावा किया था कि कोरोना संक्रमण उसके केवल एक ही प्रांत हुबेई में ही फैला था।

अपने फायदे के लिए आंकड़ों में हेरफेर करता है चीन
चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी अपने फायदे के लिए शुरू से ही हर आंकड़े में हेरफेर करती है। केवल कोरोना का ही नहीं, चीन के जीडीपी के वास्तविक आकंड़ों को आज तक कोई नहीं जान पाया। 1948 के बाद 2020 में पहली बार ऐसा हुआ है जब चीन ने यह स्वीकार किया कि उसकी विकास दर निगेटिव में गई है।

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