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बंद हो रेडलाइट एरिया, भारत लाखों कस्टमर जाते हैं यहां, सोशल डिस्टेसिंग मुमकिन नहीं

रेड लाइट एरिया को बंद रखा जाए तो कोरोना पॉजिटिव मामलों में 72% तक कमी देखी जा सकेगी

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वॉशिंगटन। भारत में कोरोना वायरस के केस एक लाख के करीब पहुंच रहे हैं और लॉकडाउन चौथे चरण में पहुंचने वाला है। लॉकडाउन में ढील की मांग भी जा रही है ताकि अर्थव्यवस्था को बड़े नुकसान से बचाया जा सके। इस बीच अमेरिका की येल और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि अगर भारत में रेड लाइट एरिया को बंद रखा जाए तो कोरोना पॉजिटिव मामलों में 72% तक कमी देखी जा सकेगी।

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येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के बायोस्टेटिस्टिक्स प्रफेसर डॉ. जेफरी टाउनसेंड के मुताबिक लॉकडाउन खुलने के साथ ही पॉजिटिव मामले बढ़ने की आशंका भी बढ़ जाएगी। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार को कदम उठाने होंगे। नैशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक भारत में कम से कम 6,37,500 सेक्स वर्कर्स हैं। हर दिन कम से कम 5 लाख कस्टमर रेड लाइट एरिया में जाते हैं। जाहिर है कि ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन रेड लाइट एरिया में होना मुमकिन नहीं है और बड़ी संख्या में लोग इन्फेक्शन के खतरे में होंगे।

इस स्टडी के मुताबिक अगर रेड लाइट एरिया बंद कर दिए तो लॉकडाउन के 45 दिन के अंदर COVID मामलों में 72% कमी हो सकती है। यही नहीं, भारत को इन्फेक्शन की पीक को टालने के लिए 17 दिन और मिल जाएंगे। इसके अलावा मौत का आंकड़ा लॉकडाउन के 60 दिन बाद तक 63% तक कम हो जाएगा। यह स्टडी भारत के पांच शहरों मुंबई, पुणे, दिल्ली, नागपुर और कोलकाता पर की गई थी।

स्टडी में कहा गया है कि एहतियातन कदम उठाने से हजारों सेक्स-वर्करों की भी जान बचेगी। सरकार को सेक्स वर्करों की हेल्थ और सेफ्टी का ध्यान रखना चाहिए और गरीब लोगों को दी जा रही आर्थिक राहत का फायदा भी उन्हें मिलना चाहिए। लॉकडाउन की स्थिति में सेक्स वर्कर्स को दूसरी जगहों पर काम दिलवाना चाहिए ताकि आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।

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