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अधिकारियों की उदासीनता, खुले खेतों में रहने को मजबूर हैं मजदूर

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प्रयागराज/मनीष त्रिपाठी
प्रयागराज के सोरांव तहसील के दासापुर गांव मे मुम्बई के धरावी और पूना से आये करीब 15 मजदूर गाँव के बाहर खेतों  में पड़े हैं । मुम्बई से नासिक तक पैदल सफर करने के बाद ट्रको से मध्यप्रदेश के चाकघाट पहुंचे वहां से  अपने गाँव का सफर पैदल ही 60 किलोमीटर तय किया । यहाँ जब गाँव पहुंचे तो ग्राम प्रधान और गाँव के लोगों द्वारा उपजिलाधिकारी सोरांव को कई बार फोन किया गया लेकिन ऐसा लगता है सरकार ने इन गरीब मजदूरों के लिए सरकारी नम्बर तो जारी कर दिया लेकिन धरातल पर उसकी हकीकत कुछ और ही है। ग्रामीणों का कहना था कि एक बार अधिकारियों से बात हो जाये तो हम इन सभी को गाँव के प्राथमिक विद्यालय में रखकर इनकी व्यवस्था कराये लेकिन अधिकारी महोदय फोन उठाने को तैयार नहीं ऐसे में ये मजदूरों को गाँव के बाहर खेतों में पेंड के नीचे रहने को मजबूर हैं ।
हर दिन संख्या बढ़ रही है लेकिन यहां पर न पानी की व्यवस्था है न बिजली की न अन्य किसी चीज की ।ऐसे में मजदूर के परिजन ही उन्हे घर से खाना दे रहे और काफी दूर से बाल्टियों में पानी लाकर दे रहे।इन मजदूरों का कहना है हमारे सरकार तो केवल भगवान ही है यहाँ तो कोई भी व्यक्ति सुध लेने वाला नहीं कि हम लोग किस हाल में है ।
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अधिकारियों की उदासीनता, खुले खेतों में रहने को मजबूर हैं मजदूर
मुम्बई के धरावी से आये मजदूर नीरज, प्रेम कुमार और विजय का कहना है कि वहां मुम्बई धरावी में काम बंद होने से 1 महीने से अधिक बैठे रहे जो पैसा था उससे किसी तरह समय काटा फिर भूखों मरने से अच्छा सोचा किसी भी तरह अपने घर पहुंच जाऊं।
अधिकारियों की उदासीनता, खुले खेतों में रहने को मजबूर हैं मजदूर
पूना से आये बाकी मजदूरों का भी यही कहना है कि हम पीतल के बर्तन बनाने का काम करते थे लेकिन बीमारी के बढ़ने और सब बंद होने से हम लोगों के पास कुछ नहीं बचा सिर्फ एक आशा की किरण दिखाई दे रही थी बस किसी भी हाल में अपने गाँव अपने घर पहुंच जाऊं ऐसे में सरकार, और जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों को इसका संज्ञान लेना चहिए और  इन गरीब मजदूरों की हर संभव मदद करनी चहिए।
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