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लाकडाउन के बीच कुशीनगर पिछले वर्ष की अपेक्षा इस साल पडरौना शहर में कोरोना ने फीका किया ईद का त्योहार

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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना कुशीनगर : पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष ईद के त्यौहार के एक दिन पहले तक बाजार में ईद के त्यौहार की बिक्री नही हो रही है। ईद के त्यौहार के एक दिन पहले बाजार गुलजार रहते थे हर साल सुबह से लेकर देर रात तक दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी। लेकिन इस साल कोविड-19 संक्रमण के फ़ैलाव को रोकने के लिए किये गए लाकडाउन के कारण गरीब और मध्यम तबके का परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। ईद से एक दिन पहले जहां कुशीनगर जिले के पडरौना शहर में बाजार में मुस्लिम महिलाओं को भारी तादात में खरीदारी करते देखा जाता था वही आज में इक्का दुक्का मुस्लिम महिलाएं नजर आ रही है। वे भी घर गृहस्थी का सामान लेने के लिए।
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बताते चलें कि ईद के त्यौहार पर प्रतिवर्ष नए फैशन के कपड़े खरीदे जाते थे। इस वर्ष नए फैशन के कपड़े बाजार में नही आये। मुस्लिमो ने कोई नए कपड़े बाजार से नही खरीदे। जूते चप्पलों की भी ईद पर बिक्री नही हुई। सिर्फ डेली पहनने वाली चप्पलें ही बाजार में बिक रही है। यही हाल चूड़ी बेचने वालों है। प्रत्येक वर्ष ईद के अवसर पर देर रात तक चूड़ियों की दुकाने खुलती थी। मगर इस वर्ष मुस्लिम महिलाएं चूड़िया खरीदने नही आ रही है। श्रंगार का सामान बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि महिलाओं ने ईद के लिए कुछ भी नही खरीदा है। त्यौहार को देखते हुए कोई ख़ास सामान नही बिका है। हर वर्ष जितना श्रंगार का सामान बिकता था,इस वर्ष उसका दो परसेन्ट भी नही बिका। ईद के दिन बनने वाले ख़ास व्यंजनों में सिवई सूतफैनी होती है। त्यौहार के मौके पर यह भारी मात्रा में पडरौना शहर में उपलब्ध होती है,लेकिन इस बार बाजार में सीमित दुकानदारों के पास है कुछ ढेले वाले भी बेचते दिख रहे है।
जबकि लाकडाउन के कारण बढ़ी बेरोजगारी के परिणाम त्यौहार पर देखने को मिल रहे है। मुस्लिम समुदाय में ईद की खुशी नही दिखाई दे रही है। परिवारों में आर्थिक बदहाली होने से ईद पर बच्चे भी मायूस दिखाई दे रहे है बच्चों के पास भी पहनने के लिए नए कपड़े और जूते नही है। इस वर्ष ईद का त्यौहार खुशियों के बजाय मायूसियों से भरा हुआ मनाया जा रहा है। लेकिन उम्मीद के साथ कुरौना की जंग जीतने के बाद हम आगे बेहतर तरीके से ईद का त्यौहार मनाएंगे।
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