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चीनी राजदूत जुटी ओली की कुर्सी बचाने में, गुप्त मुलाकात की राष्‍ट्रपति बिद्या भंडारी से

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काठमांडू (नेपाल)। नेपाल की राजनीति में चल रही उथल-पुथल के बीच चीनी राजदूत हाओ यांकी का सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक पार्टी के नेताओं के साथ मुलाकात पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। चीन के इशारे पर भारत विरोधी स्टैंड के लिए विरोध झेल रहे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी बचेने के लिए हाओ लगातार प्रयास कर रही हैं।

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते चीनी राजदूत ने राष्ट्रपति बिद्या भंडारी और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के नेता माधव कुमार नेपाल से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई थी, जब सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी में भंडारी की भूमिका पर सवाल उठ रहे थे।

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काठमांडू पोस्ट विदेश मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के हवाले से कहा है कि राष्ट्रपति कार्यालय बार-बार राजनयिक आचार संहिता का उल्लंघन कर रहा है। इसके अलावा राष्ट्रपति कार्यालय में तैनात विदेश मंत्रालय के अंडर सेकरेट्री को भी राषट्रपति भंडारी और चीनी राजदूत के बीच बैठक के बारे में सूचित नहीं किया गया था। जिनका कर्तव्य राष्ट्रपति को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों और राजदूतों के साथ संभावित बैठकों के बारे में बताना होता है।

मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि राजनयिक आचार संहिता के अनुसार विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को इस तरह की बैठकों में उपस्थित होना चाहिए, लेकिन हमें सूचित नहीं किया गया… इसलिए बैठकों का कोई संस्थागत रिकॉर्ड नहीं है और हम नहीं जानते कि उनके बीच क्या बात हुई।

विदेश संबंध विभाग के उप प्रमुख बिष्णु रिजल के मुताबिक इसी तरह हाओ और माधव नेपाल के बीच हुई बैठक को गुप्त रखा गया है। हालांकि यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर चल रहे संघर्ष पर चर्चा की और सभी विरोधी पक्षों से संयम बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मेरे पास माधव नेपाल और चीनी राजदूत के बीच बैठक के बारे में कोई विवरण नहीं है। लेकिन जहां तक ​​मैं चीनी प्रोटोकॉल को समझता हूं, चीनी पहले शीर्ष रैंकिंग के अधिकारियों से मिलना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे अन्य अधिकारियों से मिलते हैं।

बता दें कि नेपाल के सेना प्रमुख से लेकर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के दफ्तर तक चीन की राजदूत की दखल है।  ओली के भारत के प्रति बदले रुख के पीछे भी यांकी को माना जा रहा है। साथ ही भारतीय क्षेत्रों लिपुलेख, कालापानी व लिपियाधूर को अपना बनाते हुए नेपाल ने अपने देश का जो नया नक्शा जारी किया है, उसके पीछे भी चीनी राजदूत का दिमाग बताया जा रहा है।

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