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सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया यूजीसी के परीक्षा दिशानिर्देशों पर अंतरिम आदेश देने से

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर के अंत तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के यूजीसी के छह जुलाई के दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सुनवाई 10 अगस्त तक स्थगित कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में छह जुलाई को जारी यूजीसी की उस गाइडलाइन को चुनौती दी गई थी, जिसमें देश के सभी विश्वविद्यालयों से 30 सितंबर से पहले अंतिम वर्ष की परीक्षा आयोजित कर लेने के लिए कहा गया है।

अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने शीर्ष अदालत से एक अंतरिम आदेश पारित करने का अनुरोध किया और हवाला दिया कि कई छात्र बिहार और असम में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंस गए हैं। उन्होंने दलील देते हुए कहा, “मी लॉर्ड वे यात्रा कैसे करेंगे?”

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत अभी कोई अंतरिम आदेश नहीं दे रही है और मामले को 10 अगस्त को आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट कर दिया गया है।

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शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को भी केंद्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए कहा, ताकि मामले पर एमएचए स्पष्ट हो सके। मेहता ने जवाब दिया कि यह सोमवार तक हो जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों को यह धारणा नहीं बनानी चाहिए कि उन्हें परीक्षा की तैयारी नहीं करनी है, बल्कि इसके बजाय उन्हें तैयारी करनी चाहिए।

अंतिम वर्ष के छात्र यश दुबे की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ के समक्ष कोविड-19 के लगातार बढ़ रहे मामलों की दलील पेश की। सिंघवी ने कहा कि उन्होंने शीर्ष अदालत से पहले के दिशानिर्देशों की जांच करने और फिर छह जुलाई को जारी किए गए दिशानिर्देशों को देखने के लिए कहा है।

सिंघवी ने कहा कि परीक्षा रद्द होने पर आसमान नहीं टूट पड़ेगा।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सितंबर अंत तक अपनी अंतिम-वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने के लिए भारत भर के विश्वविद्यालयों को अनिवार्य किए गए छह जुलाई के दिशानिर्देशों को बदलना संभव नहीं है।

यूजीसी ने अदालत को सूचित किया कि प्रो. आर. सी. कुहाड़ की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने रिपोर्ट सौंपी है कि टर्मिनल सेमेस्टर परीक्षाएं सितंबर के अंत तक विश्वविद्यालयों/संस्थानों द्वारा आयोजित की जानी चाहिए।

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