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फ्रांस में भी हुआ था बेरूत की तरह ही बड़ा हादसा, वहां भी वजह बनी थी अमोनियम नाइट्रेट

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नई दिल्‍ली । बेरुत में मंगलवार को हुए भीषण विस्फोट में अब तक 150 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है जबकि 5000 के करीब लोग घायल हुए हैं। ये विस्‍फोट इतना जबरदस्‍त था कि इससे दस किमी के दायरे में सैकड़ों घर और इमारतें धराशायी हो गईं। इस विस्‍फोट की सबसे बड़ी वजह वेयरहाउस में रखा गया ढाई हजार किग्रा से अधिक अमोनियम नाइट्रेट (AN) बताया जा रहा है। कहा जा रहा है जहां पर ये रखा था वहां पर सुरक्षा के उपाय नाकाफी थे। इसलिए विस्‍फोट के पीछे अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही की भी आशंका जताई जा रही है।

राष्‍ट्रपति ट्रंप ने बताया हमला 

वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने इसको लेकर आशंका जताई है कि ये एक एक्‍सीडेंट नहीं बल्कि एक हमला था। ट्रंप के मुताबिक उनके अधिकारियों ने भी उन्‍हें ऐसा ही बताया था। बहरहाल, ये विस्‍फोट क्‍यों हुआ ये तो जांंच रिपोर्ट के आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन आपको बता दें कि इस तरह की लापरवाही से हुए हादसे हमेशा ही बड़ी संख्‍या में लोगों की जान लेते रहे हैं। आज हम आपको दो दशक के दौरान हुए ऐसे ही कुछ हादसों की जानकारी यहां पर दे रहे हैं।

फ्रांस में हुआ हादसा 

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21 सितंबर 2001 को फ्रांस के टॉललॉज स्थित एटोफिना ग्रांड पी फर्टिलाइजर प्‍लांट (Atofina’s Grande Paroisse fertilizer plant) में एक जबरदस्‍त धमाका हुआ था। इस धमाके की वजह भी वहां पर रखा हुआ अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate/AP) ही था। ये धमाका इतना तेज था कि तीन किमी के दायरे में इसने भारी तबाही मचाई थी। इस की वजह से पूरा शहर हिल गया था और इसकी आवाज काफी दूर तक सुनी गई थी। इस धमाके से उठी शॉकवेव्‍स ने सैकड़ों घरों को धराशायी कर दिया था। धमाके के बाद सरकार की तरफ से इसकी जांच के आदेश दिए गए थे। इसकी जांच में करीब में आठ वर्ष का समय लगा और तब कहींं जाकर इसकी रिपार्ट सामने आ सकी थी। इसमें कहा गया था कि 300 टन अमोनियम नाइट्रेट में हुए धमाके की वजह से प्‍लांट की इमारत मलबे में तब्‍दील हो गई। धमाके की जगह पर 40 मीटर चौड़ा और 10 मीटर गहरा गड्ढा हो गया था। इस धमाके में 30 लोगों की मौत हो गई थी जबकि दस हजार से अधिक लोग घायल हुए थे।

अमेरिका में हादसा

अमेरिका के टेक्‍सास में 23 मार्च 2005 को हुआ हादसा बीते डेढ़ दशकों में सबसे बड़ा था। यहां पर स्थित ब्रिटेन की सबसे बड़ी तेल उत्‍पादक कंपनी बीपी की रिफाइनरी (UK oil major BP’s Texas City refinery) थी। इस दिन जब यहां की हाइड्रोकार्बन आइसोमेरीजेशेन यूनिट (hydrocarbon isomerization unit) को शुरू किया गया तो डेस्टिलेशन टावर (distillation tower) पूरी तरह से हाइड्रोकार्बन से भर गया। इसकी वजह से एक के बाद एक तेज धमाके होते चले गए। इसकी वजह से यहां पर 15 लोगों की जान चली गई थी जबकि 150 लोग घायल हो गई थी। ब्रिटेन की तेल उत्‍पादक कंपनी पर इसके लिए जुर्माना लगाया गया था। इसके लिए बीपी कंपनी के अमेरिकी प्रमुख को दोषी भी ठहराया गया था। इसकी जांच रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी ने जरूरी नियमों को ताक पर रखा जिसकी वजह से ये हादसा हुआ।

चीन में हुआ हादसा

चीन की जिलिन पेट्रोकेमिकल्‍स (Series of explosions in China-based Jilin Petrochemical) में 13 नवंबर 2005 को जबरदस्‍त धमाका हुआ था। हालांकि इसमें मारे गए लोगों की संख्‍या केवल पांच ही थी और 70 के करीब लोग घायल हुए थे। इसके बाद भी इसको चीन के बड़े इंडस्ट्रियल और केमिकल हादसों में गिना जाता है। इस धमाके की वजह से बेंजीन यहां के नजदीक बहने वाली नदी में लीक हो गई थी जिसकी वजह से लाखों लोग कुछ समय के लिए पीने के पानी से वंचित हो गए थे। एहतियात के तौर पर हजारों लोगों को दूसरे स्‍थान पर पहुंचाया गया था। जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि ऑपरेटर्स नाइट्रोबेंजीन रेक्‍टीफिकेशन टावर (nitrobenzene rectification tower) को खोलने की कोशिश की थी। जिलिन ब्‍यूरो ऑफ प्रोडेक्‍शन सेफ्टी सुपरविजन एंड एडमिनिस्‍ट्रेशन की रिपोर्अ में कहा गया कि वाल्‍व के खुले रह जाने की वजह से वहां का तापमान उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया था। इसके आसपास के स्‍टोरेज टैंक में भी नाइट्रोबेंजीन, बेंजीन और नाइट्रिक एसिड भरा था। धमाके बाद इसमें भी आग लग गई। इस धमाके के बाद पानी और बिजली की सप्‍लाई ठप हो गई थी। बाद में जब नलों में पानी आया तो ये लाल और पीले रंग का था। इस धमाके की वजह से रूस के सीमावर्ती इलाकों में भी पानी खराब हो गया था।

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