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छत्तीसगढ़ : सामुदायिक वन संसाधन का हक मिलने के बाद ग्रामीणों ने पहली बार जंगल में फहराया तिरंगा

ग्रामीणों ने पहली बार जंगल में फहराया तिरंगा

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अंबिकापुर सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार के लिए लंबे संघर्ष के बाद नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर मिली अधिकार की सौगात के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ के सरगुजा में ग्रामीणों ने 15 अगस्त के मौके पर जंगल में झंडा फहराया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बतौली ब्लॉक के ग्राम करदना, लुंड्रा ब्लॉक के ग्राम बिल्हमा के ग्रामीणों ने सामुदायिक वन संसाधन के हक का अधिकार पत्र पाने की खुशी में एकजुट हुए और बीच जंगल में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

स्वतंत्रता दिवस पर बतौली ब्लॉक के ग्राम करदना लुंड्रा ब्लॉक के ग्राम बिल्हमा के ग्रामीणों ने सामुदायिक वन संसाधन के हक का अधिकार पत्र पाने के बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
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विदित हो कि विश्व आदिवासी दिवस पर लखनपुर ब्लॉक के ग्राम लोसगा, रेम्हला, सकरिया, सेलरा, जामा, तिरकेला, करई, उदयपुर ब्लॉक के ग्राम बनकेसमा और बुले तथा बतौली ब्लॉक के ग्राम करदना को 5993.455 हेक्टेयर जंगल का सामुदायिक वन संसाधनों के लिए हक का अधिकार पत्र मिला। अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत वन क्षेत्र में निवास करने वाले समुदाय को उनके काबिज वन भूमि के व्यक्तिगत वन अधिकार के साथ गांव को उनके जंगल की रूढ़िजन्य सीमा के भीतर का सामुदायिक वन अधिकार दिया जाना था, जिसके तहत छत्तीसगढ़ में 2008 से वनाधिकार कानून का क्रियान्वयन चालू हुआ और व्यक्तिगत वन अधिकार मान्य किए गए परंतु सामुदायिक वन अधिकार एवं वन संसाधनों के लिए हक के अधिकार पर काम नहीं हुआ था।

चौपाल ग्रामीण विकास प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान द्वारा वर्ष 2010 से छत्तीसगढ़ में सामुदायिक वन अधिकार को लेकर काम प्रारम्भ किया गया। वन विभाग के पुरजोर विरोध के बावजूद सामुदायिक दबाव के कारण सितंबर 2013 में सरगुजा के 38 गांव को केवल निस्तार, जलाऊ लकड़ी, चरागाह और वनोपज़ संकलन का सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरण किया था, जिसमें वन विभाग द्वारा अनावश्यक शर्त लगाया गया। सामुदायिक वन संसाधनों के लिए हक का अधिकार पत्र नहीं दिया गया था। सामुदायिक वन अधिकार पत्र में लगाए गए अनावश्यक शर्त को हटाने एवं वन संसाधनों के लिए हक का अधिकार की मांग को लेकर वर्ष 2013 से सरगुजा में समुदाय द्वारा संघर्ष जारी था, इसके लिए समुदाय द्वारा समय-समय पर जिला कलेक्टर, आदिवासी आयुक्त, विधायक तथा सांसद सरगुजा को ज्ञापन भी दिया गया।

23 अगस्त 2018 से तीन सितंबर 2018 तक समुदाय के द्वारा उपरोक्त मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल किया गया, जिसे जिला प्रशासन द्वारा बलपूर्वक हटाया गया। उपरोक्त संघर्ष के लिए समुदाय को मार्गदर्शन व डाक्यूमेंटेशन में चौपाल संस्थान की अहम भूमिका रही। छत्तीसगढ़ वन अधिकार मंच, पहाड़ी कोरवा महा पंचायत, आदिवासी अधिकार समिति के साझा प्रयास के फलस्वरूप 9 अगस्त को सरगुजा के 10 गांव को सामुदायिक वन संसाधनों के लिए हक का अधिकार मिलना संभव हो पाया।

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