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Pandit Jasraj Death News: पंडित जसराज को कानपुर और ब्रेड-मक्खन बेहद था पसंद, आज भी ताजा हैं ‘स्मृति’ की यादें

आज भी ताजा हैं 'स्मृति' की यादें

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नौ साल पहले लाजपत भवन में शास्त्रीय गायक पद्म विभूषण पंडित जसराज ने शास्त्रीय गायन की आभा बिखेरी थी। उनके राग भैरवी, राग यमन और एक से बढ़कर एक भजनों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया था। साल 2011 में साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था स्मृति के इस संगीत कार्यक्रम में दूर-दूर से लोग शिरकत करने आए थे।

नौ साल पहले साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था स्मृति के संगीत कार्यक्रम में पद्म विभूषण पंडित जसराज ने शास्त्रीय गायन की आभा बिखेरी थी।
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मुन्नू गुरु संगीत अवार्ड से नवाजे गए थे पं. जसराज

संस्था के संयोजक राजेंद्र मिश्र बब्बू, तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, प्रबंधक सर्वांगजी ने पंडित जसराज को मुन्नू गुरु संगीत अवार्ड से नवाजा था। हालांकि कानपुर उनके लिए नया नहीं था। इसके पहले वह साल 1990 में बृजेंद्र स्वरूप पार्क में एक्सपो के कार्यक्रम में प्रस्तुति दे चुके थे तभी से उन्हें कानपुर बेहद पसंद आ गया था। राजेंद्र मिश्र बब्बू बताते हैं कि पंडित जसराज बेहद सरल स्वभाव के थे। शास्त्रीय गायन को विदेश में प्रसिद्धि दिलाने में उनका विशेष योगदान रहा है। उनके 100 से अधिक शिष्य हैं, जो संस्था के कार्यक्रमों में शिरकत कर चुके हैं। अक्सर घर और परिवार के सदस्यों से बातचीत होती रहती थी।

रोज सुबह खाते थे ब्रेड-मक्खन

राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि पंडित जसराज को कानपुर का ब्रेड मक्खन और ब्रेड मलाई बेहद पसंद थी। वह कानपुर में तीन दिन रुके थे और तीनों दिन नाश्ते में ब्रेड मक्खन ही खाया था। सेहत खराब होने की वजह से मां विद्यावती मिश्रा कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकी थीं। इस पर वह घर आए और मां को शास्त्रीय संगीत सुनाया।

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