Jan Sandesh Online hindi news website

5 साल में तेज होगी रफ्तार कोरोना से जूझ रहे भारत को जकड़ रही दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी 5 साल में तेज होगी रफ्तार

5 साल में तेज होगी रफ्तार

0

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। कोरोना महामारी से जुझ रहे भारत के लिए बुरी खबर है। दुनिया सबसे बड़ी या कहें खतरनाक बीमारी कैंसर धीरे-धीरे देश को जकड़ रही है। इंडियान काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिसीज इन्फॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च (NCDIR), बेंगलुरू ने ये चेतावनी जारी की है। ये चेतावनी नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार अगले पांच साल में कैंसर की रफ्तार तेज होगी। कैंसर का ये शिकंजा महिलाओं और पुरुषों सहित बच्चों पर भी मजबूत होगा। ये रिपोर्ट 28 जनसंख्या आधारित कैंसर मामलों और 58 अस्पताल आधारित कैंसर के आंकड़ों के हिसाब से तैयार की गई है।

नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार अगले पांच वर्ष में भारत में कैंसर का प्रकोप तेजी से बढ़ेगा। विशेषज्ञ डॉक्टर से जानें- क्या है इसकी वजह बचाव और लक्षण।
और पढ़ें
1 of 3,354

नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 तक भारत में कैंसर के मामले 12 फीसद तक बढ़ेंगे। इस साल के अंत तक भारत में कैंसर मरीजों की संख्या 14 लाख पार होगी, जो 2025 तक 16 लाख पहुंच सकती है। ICMR के अनुसार इस वर्ष देश में कैंसर के कुल मामलों में से 27.1 फीसद (करीब 3.77 लाख) मामले तंबाकू से होने वाले कैंसर के, 19.8 प्रतिशत (करीब 2.73 लाख) मामले पेट के कैंसर के, 14.8 फीसद (करीब दो लाख) मामले महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के और 5.4 प्रतिशत (75 हजार मामले) सर्विक्स कैंसर के रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में पुरुषों में फेफड़े, मुंह, पेट व आंत का कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट व सर्विक्स कैंसर काफी तेजी से बढ़ेगा। इसकी मुख्य वजह तंबाकू होगा।

दिल्ली में कैंसर छीन रहा बचपन

  • देश में सबसे ज्यादा कैंसर पीड़ित बच्चे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से हैं

  • कैंसर के कुल मामलों में 3.7 फीसद दिल्ली के 0-14 साल के बच्चे हैं

  • कैंसर के कुल मामलों में 4.9 फीसद दिल्ली के 0-19 साल के बच्चे हैं

  • दिल्ली में कैंसर का शिकार हो रहे ज्यादातर बच्चे ल्यूकेमिया का शिकार

  • दिल्ली में कैंसर पीड़ित बच्चों में लड़के व लड़कियों की संख्या लगभग बराबर

पूर्वोत्तर के राज्यों में तेजी से पांव पसार रहा कैंसर चिंता की बड़ी वजह बनता जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली रिपोर्ट दिल्ली की है। देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में 19 साल तक के लड़के और लड़कियों में कैंसर की दर देश में सबसे अधिक है। देश में कैंसर के कुल मामलों में से 3.7 प्रतिशत केस अकेले दिल्ली-एनसीआर में 0 से 14 साल तक के बच्चों के हैं। इसी तरह कुल मामलों में से 4.9 प्रतिशत कैंसर केस दिल्ली-एनसीआर में 0 से 19 साल तक के बच्चों के हैं। दिल्ली एनसीआर के बच्चे सबसे ज्यादा ल्यूकेमिया से पीड़ित हैं और इसमें लड़के व लड़कियों की संख्या लगभग बराबर-बराबर है।

नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिपोर्ट में कैंसर से बचने के कई तरीके भी बताए गए हैं। इसमें कैंसर के प्रति जागरूकता, स्वस्थ जीवन और नियमित स्क्रीनिंग को सबसे अहम बताया गया है। इसके अलावा अच्छी डाइट, नियमित व्यायाम और जरूरी इलाज कराना भी कैंसर से बचाव के उपायों में शामिल है। साथ ही कैंसर से बचने के लिए बीड़ी-सिगरेट, गुटखा व अन्य तंबाकू उत्पाद और शराब का सेवन बंद करने की सलाह दी गई है।

भारत में कैंसर की स्थिति

  • 13.9 लाख कैंसर मरीज होंगे देश में वर्ष 2020 के अंत तक

  • 15.7 लाख कैंसर मरीज हो सकते हैं देश में वर्ष 2025 तक

  • 6.79 लाख पुरुष कैंसर पीड़ित होंगे वर्ष 2020 के अंत तक

  • 7.63 लाख पुरुष कैंसर पीड़ित हो सकते हैं वर्ष 2025 तक

  • 7.12 लाख महिलाएं कैंसर पीड़ित होंगी वर्ष 2020 के अंत तक

  • 8.06 लाख महिलाएं कैंसर पीड़ित हो सकती हैं वर्ष 2025 तक

सर्वाधिक होने वाले कैंसर

कैंसर                           मामले           प्रतिशत

मुंह या गले का कैंसर    3.77 लाख        27.1

पेट या आंत का कैंसर   2.73 लाख        19.8

ब्रेस्ट कैंसर                  2.00 लाख        14.8

सर्विक्स कैंसर               75 हजार          5.4

प्रति एक लाख आबादी पर कैंसर

पुरुषों की प्रति एक लाख आबादी पर सबसे ज्यादा 269.4 केस मिजोरम की राजधानी आइजोल में हैं

  • पुरुषों की प्रति एक लाख आबादी पर सबसे कम 39.5 मामले उस्मानाबाद व बीड में हैं

  • महिलाओं की प्रति एक लाख आबादी पर सबसे ज्यादा 219.8 केस अरूणाचल के जिला पापुमपारे में हैं

  • महिलाओं की प्रति एक लाख आबादी पर सबसे कम 49.4 केस उस्मानाबाद व बीड में हैं

कैंसर को लेकर जागरूक नहीं लोग

फरीदाबाद स्थित एशियन अस्पताल में ऑन्कोलॉजी विभाग (Oncology Department) के प्रमुख डॉ. प्रवीन बंसल के अनुसार देश में कैंसर बीमारी को लेकर अभी तक लोगों में जागरूकता नहीं है। कैंसर की कई वजहें हो सकते हैं। आपकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली (Immune System) पर बहुत कुछ निर्भर करता है। इसके अलावा कैंसर के पीछ जैनेटिक वजहें भी हो सकती हैं। खाना कैसे पकाया जाता है और खाने की आदत (Food Habbits) क्या हैं, इस पर भी काफी कुछ निर्भर करता है। जैसे ज्यादा तला-भुना खाने से एक तरह का रसायन उत्पन्न होता है, जो कैंसर का कारण बन सकता है। उबला खाना सबसे सुरक्षित होता है। डॉ. बंसल के मुताबिक कुछ प्रमुख कैंसर और उसकी वजहें निम्न प्रकार हैं :-

कैंसर की वजहें

  1. लंग कैंसर – इसकी प्रमुख वजह केमिकल व ऑटो मोबाइल्स के प्रदूषण में मौजूद हाइड्रोकार्बन्स के कण होते हैं।

  2. स्तन कैंसर – महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) के कई हो सकते हैं। शारीरिक श्रम अथवा व्यायाम न करना, मोटापा, देर से शादी, बच्चे को दूध नहीं पिलाना, बच्चे पैदा न करना या जैनेटिक वजह भी हो सकती है।

  3. क्रोनिक हेपेटाइटिस बी – इससे लीवर सिरोसिस अथवा लीवर कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। इसके प्रमुख लक्षणों में पीलिया, पेट में पानी भरना, खून की उल्टी, काला दस्त, बेहोश होना शामिल है।

  4. हेपेटाइटिस बी – पूरे विश्व में ये लीवर संक्रमण का सबसे सामान्य कारण है। ये संक्रमित खून से, असुरक्षित यौन संबंध अथवा संक्रमित माता से नवजात शिशु में फैलता है। दुनिया में सात लाख लोग प्रतिवर्ष हेपेटाइटिस-बी से मरते हैं। इसका इलाज संभव है। इसकी वजह से हेपेटाइटिस सी से भी लीवर कैंसर का खतरा बढ़ा जाता है।

  5. गले व मुंह का कैंसर – धूम्रपान, गुटका, पान, तंबाकू, सौंफ या सुपारी का सेवन इसकी प्रमुख वजह होता है।

  6. फूड पाइल कैंसर, लीवर व पेट का कैंसर – लगातार बीयर, वाइन या शराब आदि पीने से तीनों तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

  7. कुछ इलाकों में रहने की वजह से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। जैसे केरल में जमीन के नीचे यूरेनियम (Uranium) का भंडार है। इसलिए यहां रेडिएशन से कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है।

  8. भारत में एस्बेस्टस (Asbestos) से बनीं सीमेंट की चादर बनाने का उद्योग 10 फीसद सालाना बढ़ रहा है। यहां काम करने वाले कर्मचाारियों में कैंसर का खतरा काफी ज्यादा रहता है।

एस्बेस्टस जनित बीमारियों से होती है 90 हजार मौत

डॉ. प्रवीन बंसल के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी सभी तरह के एस्बेस्टस को कैंसर पैदा करने वाले पदार्थों की श्रेणी में रखा है। कई देशों में इसका इस्तेमाल प्रतिबंधित है। इससे होने वाली बीमारियों से प्रति वर्ष 90 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इन बीमारियों का पता लगाने में काफी समय लगता है और इलाज भी मुश्किल होता है। एस्बेस्टस की वजह से अगले एक-दो दशक में देश को कैंसर महामारी का सामना करना पड़ सकता है। पश्चिमी देशों में एस्बेस्टस के संपर्क में आने से पहले काफी सावधानी बरती जाती है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। इसके खतरे को देखते हुए ही भारत में सफेद एस्बेस्टस के खनन पर रोक है, लेकिन आयात, निर्यात और निर्माण उद्योग में इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है। भारत कच्चे एस्बेस्टस का सबसे ज्यादा आयात करने वालों देशों में शामिल है। भारत में एस्बेस्टस का उद्योग सालाना 100 करोड़ डॉलर का है और करीब तीन लाख लोग इससे जुड़े हुए हैं।

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.