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कोरोना से संक्रमितों से मनमानी वसूली , डीएम का निजी अस्पताल में छापा, SDM को जांच

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कानपुर निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों से मनमाने तरीके से शुल्क की वसूली की शिकायत पर डीएम ने सीएमओ को साथ लेकर स्वरूप नगर की निजी अस्पताल में छापा मारा। अफसरों ने अस्पताल के अभिलेखों की जांच करके मरीजों के तीमारदारों से भी पूछताछ की। बाद में उन्होंने एडीएम को जांच के निर्देश देकर रिपोर्ट तलब की है।

शहर के प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में वसूली शिकायतें मिल रही हैं। सोमवार को जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने सीएमओ डॉक्टर अनिल मिश्रा के साथ स्वरूप नगर के निजी अस्पताल में छापा मारा। उन्होंने अस्पताल में अभिलेख देखे और भर्ती मरीजों के परिजनों से बात की। तीमारदारों से पूछा कि इलाज से सन्तुष्ट हैं या नहीं। हालांकि किसी तीमारदार ने कोई शिकायत नहीं की।

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डीएम ने एडीएम आपूर्ति डॉ. बसंत अग्रवाल को अस्पताल में अबतक हुई कोविड मरीजों की मौत, इलाज के नाम पर लिए शुल्क आदि की विस्तृत जांच का आदेश दिया है। डीएम ने उन सभी अस्पतालों की जांच करने का आदेश मजिस्ट्रेटों को दिया, जहां से अधिक शुल्क की वसूली की शिकायत मिली है। अब एडीएम आपूर्ति जांच करेंगे कि निजी अस्तपालों में कहीं कोविड मरीजों के उपचार में लापरवाही तो नहीं हुई। मनमाना शुल्क न देने पर तीमारदारों के साथ दुर्व्यवहार तो नहीं किया गया और अस्पताल में उपचार के मानक पूरे हैं भी या नहीं।

डीएम ने बैठक में दिए थे ये निर्देश

कैंप कार्यालय में हुई बैठक में डीएम ने निर्देश दिए थे कि जिले में काेरोना से हो रही मौतों को हर हाल में कम करें। कोविड हॉस्पिटलों में भर्ती मरीजों के इलाज से जुड़ी सलाह-मशविरा के लिए मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों का पैनल बनाएं। हर डॉक्टर उनके निर्देशन में इलाज करें। कहा, कोविड अस्पतालों में भर्ती हाई रिस्क मरीजों की मॉनीटरिंग बढ़ाएं। मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों से मदद लें। सीएमओ जिले में हाई रिस्क मरीजों की सूची तैयार कराएं, जिससे उनकी निगरानी हो सके।

डीएम ने कहा, कोविड हॉस्पिटलों में ब्लड प्रेशर, शुगर, हाइपरटेंशन, किडनी की बीमारियों से पीड़ित भर्ती हैं। इन हाई रिस्क कटेगरी के मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाए। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को निर्देश दिया कि वरिष्ठ प्रोफेसरों का पैनल बनाएं। उस पैनल से कोविड अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों के इलाज से जुड़ी सलाह दिन में एक बार जरूर ली जाए। उसका रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाए। आपातस्थिति में पैनल से 24 घंटे में कभी भी सलाह ली जा सकती है। डीएम ने पैनल बनाने के साथ उसमें शामिल प्रोफेसरों के नंबर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

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