Jan Sandesh Online hindi news website

घूम-घूमकर दे रहीं छात्रों को शिक्षा , कोरोना काल में रिक्शे पर सवार ये शिक्षिका

कोरोना काल में रिक्शे पर सवार ये शिक्षिका

0

रायपुर कोरोना वायरस संक्रमण के कारण काम-धंधों के साथ ही स्‍कूल और कॉलेज भी बंद हैं। ऐसे में एक टीचर ने बच्‍चों को पढ़ाने का अलग ही तरीका खोजा है। दरअसल, गुरु-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा है। जीवन में माता-पिता का स्थान कभी कोई नहीं ले सकता, क्योंकि वे ही हमें इस रंगीन खूबसूरत दुनिया में लाते हैं। कहा जाता है कि जीवन के सबसे पहले गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। भारत में प्राचीन समय से ही गुरु व शिक्षक की परंपरा चली आ रही है, लेकिन जीने का असली सलीका हमें शिक्षक ही सिखाते हैं। सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। अभी कोरोना वायरस के कारण स्कूल नहीं लग रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसे शिक्षक हैं जो शहर के मोहल्ले-मोहल्ले और गांव-गांव तक पहुंच कर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

शिक्षिका कविता आचार्य कहती हैं कि उनके बच्चों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई करने में बच्चों को बहुत दिक्कत हो रही थी।

कोरोना काल में शिष्य की जिंदगी संवारने कोरोनावायरस से लड़ रहे शिक्षकों में एक शिक्षिका इन दिनों अपने पढ़ाने के तरीके को लेकर चर्चित हो चुकी हैं। राजधानी के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मठपुरैना की शिक्षिका कविता आचार्य रिक्शा में सवार होकर घूम-घूम कर बच्चों को पढ़ा रही है।

लाउडस्पीकर लेकर घूमती हैं शिक्षिका

शिक्षिका कविता आचार्य शुरू में अपने खर्च पर रिक्शा बुकिंग करके स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के लिए मोहल्ले-मोहल्ले में मास्क लगाकर घूमती रहीं। पढ़ाने के लिए रिक्शे में एक साउंड सिस्टम और लाउडस्पीकर रखती हैं। लाउडस्पीकर से एक मोहल्ले में पढ़ाती हैं फिर दूसरे मोहल्ले में चल देती हैं।

लाउडस्पीकर सुनकर बाहर निकल आते हैं बच्चे

और पढ़ें
1 of 2,955

कविता आचार्य लाउड स्पीकर से बच्चों को पढ़ाना जैसे ही शुरू करती हैं। बच्चे अपने-अपने घर या छोटे-छोटे समूहों में बैठकर ध्यान से पाठों को सुनते हैं। कविता आचार्य अंग्रेजी और गणित की शिक्षिका हैं। उनके स्कूल में कुल बच्चों की संख्या 208 है। ज्यादातर आसपास के मोहल्ले से ही बच्चे आते हैं, इसलिए रिक्शे से वह सभी मोहल्ले को कवर करती हैं।

स्कूल के पुराने छात्रों ने की रिक्शा देने में मदद

शिक्षिका के लिए रोज-रोज रिक्शा किराए पर लेना, डीजे और लाउडस्पीकर का खर्च उठाना महंगा पड़ रहा था ।ऐसे में स्कूल के पुराने छात्रों ने मदद की। इस स्कूल से पढ़कर निकले कुछ छात्रों ने डीजे, कुछ ने लाउडस्पीकर और कुछ ने रिक्शा देने में मदद की। कविता आचार्य ने बताया कि उनके बच्चों का सिलेबस बढ़िया चल रहा है। बच्चों की कॉपियां भी जांच रही है।

इसलिए शुरू की पहल

शिक्षिका कविता आचार्य कहती हैं कि उनके बच्चों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई करने में बच्चों को बहुत दिक्कत हो रही थी। मैंने सोचा क्यों ना बच्चों के घर तक पहुंच कर उनकी पढ़ाई बरकरार रखी जाए। मन में विचार आया कि मोहल्ले- मोहल्ले में घूमने के लिए यदि ऑटो करती हूं तो बहुत खर्च आएगा फिर उन्होंने सोचा कि क्यों न एक रिक्शा बुक कर लिया जाए। यहीं से शुरू हुआ रिक्शा के साथ पढ़ाने का सिलसिला। बच्चों के घर के बाहर जाकर कविता आचार्य लाउडस्पीकर पर पाठ को दोहराती हैं और बच्चे अपने घर से ही पढ़ाई करते हैं।

विभाग भी ऐसे शिक्षकों का मानता है आभार

स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव डॉ आलोक शुक्ला के मुताबिक, विभाग भी ऐसे सभी शिक्षकों का आभार मानता है, जिन्होंने कोविड-19 के दौरान अपने-अपने घर से नियमित ऑनलाइन कक्षाएं ली हैं। इसके अलावा हमारे बहुत से शिक्षक साथियों ने विभिन्न ऑफलाइन मॉडल को भी सफलतापूर्वक लॉन्च किया।

 

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.