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भारत-अमेरिका के बीच हुई पहली वार्षिक बैठक साइबर सुरक्षा को लेकर …

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वाशिंगटन। दुनियाभर में साइबर सुरक्षा एक बड़ा खतरा बनकर उभर रही है। इसके खतरों से बचने के उपाय किए जाने बेहद जरूरी हैं। अब इसको  लेकर भारत और अमेरिका के बीच पहली बैठक आयोजित हुई है, जिसमें दोनों देशों का पूरा ध्यान अपने देश में साइबर सुरक्षा के जरूरी उपाय बनाने पर है। अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो ने जानकारी देते हुए कहा है कि आज, अमेरिकी रक्षा विभाग और भारत के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने पहली वार्षिक यूएस-इंडिया साइबर डिफेंस डायलॉग(US India Cyber Defence Dialogue) का आयोजन किया। दोनों पक्षों ने साइबर खतरों और साइबर रक्षा में सर्वोत्तम प्रथाओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

अमेरिका में हैकिंग मामले में 5 चीनी आरोपित 

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अमेरिका के न्याय विभाग ने बड़े पैमाने पर अंजाम दिए गए हैकिंग के एक मामले में पांच चीनी नागरिकों को आरोपित किया है। इन पर अमेरिका और भारतीय सरकार के नेटवर्क समेत दूसरे कई देशों की 100 से ज्यादा कंपनियों और संस्थानों से साफ्टवेयर डाटा और कारोबार संबंधी गोपनीय जानकारियां चुराने के आरोप लगाए गए हैं।

अमेरिका के डिप्टी अटार्नी जनरल जेफरी रोजेन ने बुधवार को तीन अभियोगों का एलान किया। इनमें पांच चीनी नागरिकों पर सामूहिक तौर पर कंप्यूटर हैकिंग को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है। मलेशिया के दो नागरिकों पर उनकी मदद करने का भी आरोप लगाया गया है। न्याय विभाग के बयान के अनुसार, मलेशियाई नागरिकों को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि चीनी नागरिकों को भगोड़ा घोषित किया गया है।इस साइबर हमले में कई विदेशी सरकारों, विश्वविद्यालयों और थिंक टैंक के साथ ही हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक नेताओं व कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया था। चीनी हैकरों ने वियतनाम और ब्रिटिश सरकार के कंप्यूटर नेटवर्क को भी निशाना बनाया।

ये देश रहे प्रभावित

न्याय विभाग ने बताया कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चिली, हांगकांग, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया, पाकिस्तान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ताइवान, थाइलैंड और वियतनाम में 100 से ज्यादा कंपनियां, संगठन और लोग हैकिंग।

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