Jan Sandesh Online hindi news website

सरकार का अध्यादेश बड़ी कम्पनियों द्वारा कृषि उत्पादों की कालाबाज़ारी करने को है आया : जहीरूद्दीन

0
कुशीनगर : जिले के यूथ कांग्रेस अध्यक्ष मुहम्मद जहीरूद्दीन ने कहा शनिवार को राज्यसभा में भी किसान विरोधी विधेयक पास कर दिया गया.मोदी सरकार देश के किसानों को कॉरपोरेटर उद्योग बच्चियों के हाथों में गुलाम बना कर छोड़ना चाहती हैं.जबकी सारी दुनिया महामारी से जूझ रही है.ऐसे में इस समय हड़बड़ी में सरकार को ऐसे अध्यादेश लाने की जरूरत क्या पड़ी थी.”यह अध्यादेश से बड़े कारोबारी सीधे किसानों से उपज खरीद कर सकेंगे,लेकिन ये यह नहीं बताता कि जिन किसानों के पास मोल-भाव करने की क्षमता नहीं है,वे इसका लाभ कैसे उठाऐंगे ?
शनिवार को यूथ कांग्रेस कुशीनगर से जुड़े अध्यक्ष मुहम्मद जहीरूद्दीन पत्रकारों से मुखातिब हो अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे.उन्होंने कहा कि सरकार एक राष्ट्र,एक मार्केट बनाने की बात कर रही है,लेकिन उसे ये नहीं पता कि जो किसान अपने जिले में अपनी फसल नहीं बेच पाता है, वह राज्य या दूसरे जिले में कैसे बेच पायेगा।
और पढ़ें
1 of 2,988
उन्होंने कहा कि किसानों के पास इतने साधन हैं.और दूर मंडियों में ले जाने में खर्च भी तो आयेगा.जिसे सरकार सुधार कह रही है.वह अमेरिका,यूरोप जैसे कई देशों में पहले से ही लागू के बावजूद इसके वहां के किसानों की आय में कमी आई है। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष ने आगे कहा कि 1960 के दशक से किसानों की आय में गिरावट आई है.इन वर्षों में यहां पर अगर खेती बची है.तो उसकी वजह बड़े पैमाने पर सब्सिडी के माध्यम से दी गई आर्थिक सहायता है.बिहार में 2006 से एपीएमसी नहीं है.और इसके कारण होता ये है कि व्यापारी बिहार से सस्ते दाम पर खाद्यान्न खरीदते हैं.और उसी चीज को पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर बेच देते हैं.क्योंकि यहां पर एपीएमसी मंडियों का जाल बिछा हुआ है। यदि सरकार इतना ही किसानों के हित को सोचती है तो उसे एक और अध्यादेश लाना चाहिए जो किसानों को एमएसपी का कानूनी अधिकार दे दे.जो ये सुनिश्चित करेगा कि एमएसपी के नीचे किसी से खरीद नहीं होगी।
इससे किसानों का हौसला बुलंद होगा.फॉर्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फैसिलिटेशन) ऑर्डिनेंस में वन नेशन,वन मार्केट की बात कही जा रही है , लेकिन सरकार इसके जरिये कृषि उपज विपणन समितियों  एपएमसी के एकाधिकार को खत्म करना चाहती है.उन्होंने कहा कि अब अगर इसे खत्म किया जाता है तो व्यापारियों की मनमानी बढ़ेगी,किसानों को उपज की सही कीमत नहीं मिलेगी.कॉन्टैक्ट फार्मिंग से किसानों का शोषण होता है.कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत फसलों की बुआई से पहले कम्पनियां किसानों का माल एक निश्चित मूल्य पर खरीदने का वादा करती हैं.लेकिन बाद में जब किसान की फसल तैयार हो जाती है.तो कम्पनियाँ किसानों को कुछ समय इंतजार करने के लिए कहती हैं.और बाद में किसानों के उत्पाद को खराब बता कर रिजेक्ट कर दिया जाता है। यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में हुए संशोधन पर समझने की बात यह है.कि हमारे देश में 85% लघु किसान हैं,किसानों के पास लंबे समय तक भंडारण की व्यवस्था नहीं होती है.यानी यह अध्यादेश बड़ी कम्पनियों द्वारा कृषि उत्पादों की कालाबाज़ारी के लिए लाया गया है.कम्पनियां और सुपर मार्केट अपने बड़े-बड़े गोदामों में कृषि उत्पादों का भंडारण करेंगे और बाद में ऊंचे दामों पर ग्राहकों को बेचेंगे l इस बदलाव से कालाबाजारी घटेगी नहीं बल्की बढ़ेगी व जमाखोरी बढ़ेगी इससे सरकार के हाथ में खाद्यान नियंत्रण नहीं रहेगा.सबसे बड़ा खतरा यही है।
इसी क्रम में उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में बदलाव करके निजी हाथों में खाद्यान्न जमा होने की इजाजत दे दी है.अब सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं होगा.इससे धीरे-धीरे कृषि से जुड़ी पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था चौपट हो जायेगी.निजी व्यापारी सप्लाई चेन को अपने हिसाब से तय करते हैं.और मार्केट को चलाते हैं.जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने कहा गड़बड़ जीएसटी नोटबंदी और बिना योजना के लाक डाउन के बाद अब मोदी सरकार देश के किसानों को बर्बाद करने के लिए पड़ी हुई है.और यह अध्यादेश किसानों की आत्मा परिवार है.किसानों को गुलाम बनाने की तरफ उद्योगपतियों कि सरकार का यह कदम है.जिसे हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे.और सड़क पर अंतिम सांस तक लड़ेंगे ।
Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह [email protected] पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.