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देश की मौजूदा हालत को देखते हुए एक अनोखा संदेश

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क्या हो गया है इस देश को, कहते थे कि सोने की चिड़िया, भाईचारे की पहचान और दिलों को जोड़ने वाली संस्कृति वाला भारत देश, आज कहीं खो सा गया है ।
नौजवानों ने सोशल मीडिया को ज़िंदगी बना ली है सच और झूठ का पता नहीं चलता है और अगर कहीं कुछ गलत हुआ तो उसको अवसरवाद में बदलने के लिए जी तोड़ मेहनत की जाती है । यह नफ़रत कहाँ से आयी कौन फैला रहा है किसने यह सब सोचा था कि गाँधी जी के मार्ग पे चलने वाला भारत देश अब नफ़रत की सारी हदे पार कर जायेगा ।
अगर सच्चाई का पता करने के लिए न्यूज़ लगा दी तो उधर नंबर 1 की होड़ लगी है सब न्यूज़ तोड़-मोड़ के पेश की जा रही है और फिर चंद लोगो के साथ debate छेड़ दी जाती आपस में बहस करवाई जाती है कि कौन सही है और कौन गलत ? क्या यह है भारत की संस्कृति जिसमे न्यूज़ चैनल में बैठ कर गाली और अबद्रा व्यवहार किया जाता है ।

सच और झूठ में एक छोटी सी लकीर होती है, उसी लकीर को जो पार कर गया वहीँ इंसान होता है, यह भारत देश जहाँ बेटी को दुर्गा माँ और लक्ष्मी का दर्जा दिया जाता है उसी देश में हर रोज़ बेटियों के साथ बलात्कार जैसे घिनोने अपराध होते है हम कल्पना भी नहीं कर सकते है कि कितना ग़लत महसूस होता है, देश की बेटियोँ को जब ऐसी ख़बर मिलती हैं कि आज यह घिनोना अपराध फिर हुआ तो यह तकलीफ़ इतनी बड़ी हो जाती है कि हम बस सोच सकते है महसूस नही कर सकते, जब बलात्कार जैसे घिनोने अपराध को अंजाम दिया जाता है, तो जो दर्द वो महसूस करती है उससे हज़ार गुना दर्द यह कुर्सी पे बैठे लोग जो अपने फायदे के लिए सिर्फ खुद के फ़ायदे के लिए उन्हीं लड़की की इज़्ज़त को राजनीतिक मुद्दा बना कर बार बार अपने राजनीतिक समीकरण के लिए इस्तेमाल करते है वो भी उतने ही गुनाहगार है जितना की एक बेटियों पर जुर्म करने वाला गुनहगार ।

क्या खुद का फ़ायदा इतना मेहत्वाकांशी हो गया है या खुद को सबसे आगे रखना इतना महत्व रखता है कि बलात्कार जैसे घिनोने जुर्म को अवसरवाद बना दिया जाए ! अरे ! यह देश ऐसा नहीं था तो फिर अब ऐसा क्यों हो रहा है कुछ लोग अपने फ़ायदे के लिए सच और झूठ का इस्तेमाल कर रहे ताकि वो दूसरों से आगे निकल जाए यह कैसी चाहत है जो किसी का दर्द महसूस नहीं करती ।

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अब बस बंद करो यह सब नफ़रत फैलाना, अगर कहीं किसी बेटी के साथ अगर कुछ गलत हुआ है तो ऐसी चीज़ों को मौका मत समझिए, इन अपराधों का इस्तेमाल मत करो, यह गलत है और बहुत ग़लत है । इंसाफ होगा जरूर होगा, अगर गलत हुआ है तो सज़ा मिलेगी जो ग़लती करेगा वो सज़ा का हक़दार होगा, पर देश की बेटियों पे होने वाले जुर्म को सोशल मीडिया, न्यूज़ और राजनीतिक फ़ायदे के लिए इस्तेमाल मत करो । देश की बेटी सुरक्षा चाहती है, एक खुशहाली वाला जीवन चाहती हैं, जिसमे कोई किसी से नफ़रत ना करे, कोई यह ना कहे की छोटे कपड़े मत पहनों वरना गलत हो जायेगा, कोई यह ना कहे कि आप की ग़लती हुई थी बाहर मत निकलती तो बलात्कार नहीं होता, ऐसे शब्दों का इस्तेमाल अब बेटियाँ नहीं चाहती वो तो बस सुरक्षा चाहती है और खुशहाल जीवन, बस इतनी सी तो ख्वाइश है हमारे देश की बेटियों की ।

उसके लिए सड़कों पर घटिया नुमाईश करके खुद का फ़ायदा मत ढूंढो । बेटियों की सुरक्षा के लिए मुश्किल क़ानून लाओ जो बलात्कारियों के लिए एक सबक हो, सुरक्षा के लिये महिला नियुक्ति और मजबूत हो और ज़िंदगी में बेटियों का महत्व कितना है इसका सही पाठ सबको समझाओ तब जाके यह देश कहीं सुधरेगा वरना हर दिन बलात्कार और दिल तोड़ने वाली घटनाएँ होती रहेगी । यह सब तब ही मुमकिन है जब राजनीति छोड़ के मिल कर काम किया जाये बेटियों की सुरक्षा के लिए, तब जाके कहीं यह देश की बेटियाँ सुरक्षित हो पायेगी । बेटियाँ कहीं भी सुरक्षित नहीं है इसवक्त किसी एक राज्य की बेटी के साथ ग़लत नहीं हो रहा हर शहर और तकरीबन हर जिले का यहीं हाल हैं तो जल्दी इसको ले कर ठोस कदम उठाने होंगे ताकि बेटियाँ सुरक्षित हो सके वरना यह घटनाएं नहीं रुकेगी कभी भी और फिर यह ऐसे हाथरस, राजस्थान, बलरामपुर और ना जाने हर जगह बेटियों पे जुर्म की घटनाएं सुनने को मिलेगी और फिर देश के लोग मोमबत्ती ले कर सड़क पर खड़े हो जाएंगे तब तक जब तक मोमबत्ती की आग जलेगी और नहीं तो सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनल में debate का हिस्सा बन के बहस करेंगे ।

बंद करो यह सब, अब हम सबको मिलकर खुद की और समाज की गंदी सोच को बदलना होगा जो आज भी महिलाओं को अपने पीछे समझती है और उनके ऊपर हुए जुर्म को अवसरवाद का मौका समझती है ताकि उनका निजी फ़ायदा हो सके,, यह बहुत ग़लत है और यह हमारी संस्कृति नहीं है ।

उम्मीद करता हूँ कि आप को यह संदेश सुन कर खुद को बदलने की सोच आयी होगी, हम सबके अंदर राम जी और रावणः बसते है, कब किसका इस्तेमाल करना है यह हमारे ऊपर है और दुनिया राम जी को पूजती है और रावणः के दिमाग़ का लोहा मानती है इसलिए ख़ुद में राम जी को बसाने की कोशिश करो ताकि दुनिया अच्छी हो और नफ़रत प्यार में बदल जाए ।

लेखक – शुभम चड्ढा

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