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काम में मन नहीं लगता-भूख भी नहीं लगती तो हो जाएं सावधान, कहीं ये बीमारी तो नहीं घेर रही आपको

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कानपुर कोरोना महामारी की दहशत से लोग उलझन और मानसिक तनाव में है। इंडियन साइकेट्रिक सोसायटी की ओर से देशभर के लोगों पर कराए गए अध्ययन के मुताबिक हर दूसरा शख्स इससे पीडि़त है। पहले मानसिक तनाव, उलझन, डिप्रेशन व उन्माद तकरीबन 20 फीसद लोगों में था जो कोरोना काल में बढ़कर 40 फीसद हो गया है।

इंडियन साइकेट्रिक सोसायटी ने सर्वे के लिए देशभर के 800 मनोरोग विशेषज्ञों की ओर से जुटाए गए डाटा को आधार बनाया। सामने आया कि कोरोना की वजह से बाहर निकलना और दूसरों से मिलना-जुलना बंद होने से तनाव बढ़ा है। लोगों को अपने और घर-परिवार के स्वास्थ्य की चिंता है। रोजी-रोजगार को लेकर भी अनिश्चितता है। इसी कारण बात-बात में उग्र होना और झगडऩा प्रवृत्ति होती जा रही है। इससे उबरने के लिए लोग नशे का सहारा ले रहे हैं। इससे घरेलू कलह भी बढ़ रही है।

मानसिक तनाव के लक्षण

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-नींद न आना
-भूख न लगना
-चिड़चिड़ापन
-काम में मन न लगना
-नकारात्मक विचार आना
-खुदकुशी का विचार

ये है समाधान

  • अपनी समस्या घरवालों को बताएं
  • -मन के विचारों को मित्रों से साझा करें
  • -दिनचर्या में त्वरित बदलाव लाएं
  • -योग, व्यायाम, ध्यान व संगीत से मन बहलाएं
  • -अपने विचारों को डायरी में लिखना शुरू करें
  • -समस्या बढ़े तो मनोचिकित्सक की सलाह लें

सर्वे के मुताबिक पहले जहां 20 फीसद लोग मनोरोग के शिकार थे। अब 40 फीसद लोग हैं। ऐसे में एक-दूसरे का संबल बढ़ाएं और अपनी समस्याएं साझा करें। मेडिकल कॉलेज की हेल्पलाइन पर भी फोन कर सकते हैं। – डॉ. गणेश शंकर, असिस्टेंट जनरल सेक्रेट्री, इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी एवं असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोरोग विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज।

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