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हर साल क्यों मनाया जाता है विश्व शौचालय दिवस, जानें इसका उद्देश्य

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नई दिल्ली, आज विश्व शौचालय दिवस है। संयुक्त राष्ट्र संघ की घोषणा के अनुसार हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस यानी World Toilet Day मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत विश्व शौचालय संगठन द्वारा साल 2001 में की गई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा साल 2013 में इसे अधिकारिक तौर पर विश्व शौचालय दिवस घोषित किया गया। 2020 के लिए इस दिवस की थीम ‘सतत स्वच्छता और जलवायु परिवर्तन’ (Sustainable sanitation and climate change) है

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा साल 2013 में इसे अधिकारिक तौर पर विश्व शौचालय दिवस घोषित किया गया। 2020 के लिए इस दिवस की थीम सतत स्वच्छता और जलवायु परिवर्तन (Sustainable sanitation and climate change) है।

इससे पहले की थीम

2019 में लीविंग नो वन बिहाइंड (Leaving No One Behind)

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2018 में प्रकृति आधारित समाधान (Nature-based solutions),

2017 में वेस्ट वॉटर (Wastewater),

2016 में शौचालय और रोजगार (Toilets and jobs),

2015 में शौचालय और पोषण (Toilets and nutrition),

2014 में समानता और गरिमा (Equality and dignity)

2013 में पर्यटन और पानी (Tourism and water)

क्या है विश्व शौचालय दिवस

शौचालय जीवन को बचाते हैं। ये कई तरह की बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद करते हैं। विश्व शौचालय दिवस वैश्विक स्वच्छता संकट से निपटने के लिए प्रेरित करने वाला एक महत्वपूर्ण दिवस है।

क्यों मनाया जाता है शौचालय दिवस

विश्व में सभी लोगों को 2030 तक शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवाना संयुक्त राष्ट्र के छह सतत विकास लक्ष्यों का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में सबको शुद्ध पेयजल और स्वच्छता की सुविधा उलब्ध कराने का लक्ष्य भी रखा गया है।

खुले में शौच के नुकसान

खुले में शौच से न केवल केवल भू-जल प्रदूषित होता है, बल्कि कृषि उत्पाद भी इस प्रदूषण से अछूते नहीं रहते। इससे डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी घातक बीमारियां फैलती हैं। यही नहीं इससे पर्यावरण भी दूषित होता है।

विश्व शौचालय संगठन

विश्व शौचालय संगठन एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है, जो दुनिया भर में स्वच्छता और शौचालय की स्थिति में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन के सभी सदस्य शौचालय की समस्या को खत्म करने और दुनिया भर में स्वच्छता के समाधान के लिए काम करते हैं।

स्वच्छ भारत 

बता दें कि 2 अक्टूबर, 2014 को गांधीजी की जयंती के दिन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन को दो भागों में बांटा गया था। पहला स्वच्छ भारत ग्रामीण: इसके तहत गांवों में हर घर में शौचालय बनाने और खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया। वहीं दूसरा था स्वच्छ भारत शहरी। इसके तहत घरों के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर भी शौचालय हों, ये सुनिश्चित करना इस मिशन का मक़सद था। साथ ही कूड़ा-कचरा प्रबंधन पर भी मिशन में ज्यादा फ़ोकस किया गया।

 

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