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5 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार वरिष्ठ आरएएस अधिकारी

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जयपुर । भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों (एसीबी) ने वरिष्ठ आरएएस अधिकारी प्रेमाराम परमार को शनिवार सुबह पांच लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। एसीबी टीम आरोपित से पूछताछ करने के साथ ही आवास पर सर्च कर रही है।

एसीबी के महानिदेशक भगवान लाल सोनी ने बताया कि वरिष्ठ आरएएस अधिकारी प्रेमाराम परमार बीकानेर में उप निवेशन विभाग में अतिरिक्त आयुक्त के पद से अक्टूबर माह में सेवानिवृत हुआ था। जिसे नहरी भूमि आवंटन के एवज में 5 लाख रुपए की रिश्वत लेते बाड़मेर स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया है।

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रिश्वत देने वाले दलाल नजीर खां निवासी पोकरण जैसलमेर को भी एसीबी टीम ने पकड़ा है। करीब 1 माह पूर्व एसीबी को जानकारी मिली कि प्रेमाराम परमार अतिरिक्त आयुक्त नहरी भूमि आवंटन में सेवानिवृति से तुरन्त पहले पौंग बांध विस्थापितों, भूतपूर्व सैनिकों, महाजन फील्ड फायरिंग रेन्ज के विस्थापितों व भूमिहीन किसानों के नाम पर दलालों के मार्फत भूमि आवंटन कर भारी रिश्वत राशि ले रहा है।

संदिग्ध अधिकारी पर एसीबी ने निगरानी शुरू की। शुक्रवार देर रात बाड़मेर स्थित आवास पर प्रेमाराम को दलाल नजीर खां 5 लाख रुपए की रिश्वत देन आया। एसीबी टीम ने कार्रवाई कर रिश्वत देने-लेने के आरोप में दोनों को पकड़ लिया। तलाशी में प्रेमाराम के पास अकूत सम्पति होने के प्रमाण और करीब 20 लाख रुपए नकद मिले है। प्रेमाराम के जयपुर स्थित आवास पर सर्च मेें 8 लाख रुपए नकद, सम्पति के दस्तावेज, जोधपुर आवास से 7 लाख 72 हजार रुपए नकद व 15 लाख रुपए के गहने, जमीन जायदाद के दस्तावेज, एल.एण्ड.टी. कम्पनी में शेयर के दस्तावेज व बाड़मेर आवास से करीब 3 लाख रुपए (5 लाख रुपए रिश्वत के अलावा) व करीब 20 लाख रुपए के आभूषण आदि मिले है।

जोधपुर आवास पर सर्च के दौरान बड़ी तादात में विदेशी व महंगी शराब की बोतलें भी मिली है। जिस पर थाना बोरानाडा जोधपुर में आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जालोर स्थित 36 बीघा फार्म हाऊस के दस्तावेज मिले है और अन्य कई अचल सम्पतियों की जानकारी मिली है। अकूत सम्पति मिलने से आय से अधिक सम्पति का प्रकरण ओर दर्ज होने की संभावना है।

महंगे भाव में बेचते थे जमीन – अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एम.एन ने बताया कि दलाल नजीर खां की ओर से विस्थापितों को बहुत ही कम रुपए देकर उनके नाम से उपनिवेशन विभाग की मिलीभगत से अच्छी जमीन आवंटित करवाकर अपने नाम व अन्य के नाम रजिस्टी करवाई जाती। जिसके बाद उसे आगे महंगे भाव में बेची जाती थी, जो विस्थापित इनके माध्यम से जमीन आवंटित नहीं करवाता था, उसे बेकार की बंजर जमीन देरी से आवंटित की जाती थी। एसीबी की ओर से प्रकरण दर्ज कर अग्रिम अनुसंधान किया जा रहा है।

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