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सोमवती/मार्गशीर्ष अमावस्या 2020 – कब मनाये सोमवती अमावस्या और क्या है इसका महत्त्व

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हिंदू संस्कृति में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। वैसे प्रत्येक मास मे एक अमावस्या तिथि आती है और जब यहीं अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या इस बार 14 दिसंबर, दिन सोमवार को पड़ रही है। इस दिन दान और स्नान का बहुत महत्व माना जाता है। स्नान के बाद पितरों के नाम से दानमार्गशीर्ष भी किया जाता है साथ ही इस दिन पति कीसोमवती/मार्गशीर्ष अमावस्या 2020 – कब मनाये सोमवती अमावस्या और क्या है इसका महत्त्व लंबी आयु के लिए व्रत भी किया जाता है। 

मार्गशीर्ष अमावस्या 2020 मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 13 दिसंबर दिन रविवार को रात 12 बजकर 44 मिनट पर हो रहा है। अमावस्या तिथि का समापन 14 दिसंबर को रात 09 बजकर 46 मिनट पर हो जायेगा। ऐसे में मार्गशीर्ष अमावस्या या सोमवती अमावस्या 14 दिसंबर को मनाना चाहिए।


सोमवती अमावस्या के संबंध मे प्रचलित कथा

सोमवती अमावस्‍या को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से ही एक कथा गरीब ब्राह्मण दंपति की है। उनकी एक पुत्री थी जो सभी गुणों से संपन्‍न थी, किन्तु उस कन्‍या का विवाह नही हो पा रहा था क्योंकि परिवार काफी गरीब था। हर जगह से निराशा ही मिलती थी। तभी एक दिन एक साधु उस ब्राह्मण के घर पहुंचे और कन्‍या के सेवाभाव से वह काफी प्रसन्‍न होकर कन्‍या को लंबी आयु का वरदान दिया और ब्राह्मण के पूछने पर विवाहउनका न होने के बारे में बताया। साधु ने बताया कि कन्‍या के हाथ में विवाह की रेखा ही नहीं है।
कन्या के परिवार ने साधु से उपाय पूछा कि उसकी समस्याओं का समाधान करें और कन्या के विवाह का कोई उपाय बताए तब साधु ने बताया कि एक पड़ोस के गांव में एक धोबिन का परिवार है। यदि कन्‍या उनकी सेवा करे और धोबिन उसे अपना सुहाग प्रदान करदे तो उसका विवाह हो सकता है। साधु देवता के मुख से धोबिन की सेवा की बात सुनकर कन्‍या ने ऐसा ही करने का व्रत ले लिया। इसके बाद वह रोज भोर में ही जाकर धोबिन के घर का सारा काम करके चली आती। एक दिन धोबिन ने अपनी बहू से कहा कि वह कितनी अच्‍छी है घर का सारा काम निपटा लेती है। तब उसने कहा कि वह तो सोती रहती है। तब घोबिन ने सोचा अगले दिन प्रातः देखेंगे कौन आता है और काम करके चला भी जाता है।

अगले दिन आने पर उन्‍होंने देखा कि एक कन्‍या आती है और उनके घर का काम करने लगती है। तभी धोबिन उसे रोककर पूछती है कि वह कौन है? कन्‍या धोबिन को अपना दु:ख सुनाती है। इस पर धोबिन तैयार हो गई अपना सुहाग देने के लिए। अगले दिन सोमवती अमावस्‍या का दिन था। धोबिन ने वहां पहुंचकर अपना सिंदूर कन्‍या की मांग में लगा दिया। उधर धोबिन के पति की मृत्‍यु हो गई। लौटते वक्‍त पीपल के पेड़ की पूजा करके धोबिन ने परिक्रमा भी की। घर लौटी तो देखा कि उसका पति जीवित है। उसने ईश्‍वर को कोटि-कोटि धन्‍यवाद दिया। तब से यह मान्‍यता भी है कि यह व्रत करने से पति की उम्र लंबी मिलती है ।
सोमवती अमावस्‍या के द‍िन स्‍नान क्यों करना चाहिए


सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्‍या को सोमवती अमावस्‍या कहा जाता है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने मात्र से मनुष्य हर प्रकार से सुख-समृद्ध को प्राप्त करता है। मान्‍यता यह भी है कि इस दिन स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

ज्योतिषाचार्य सुमित तिवारी

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