Jan Sandesh Online hindi news website

मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दोहराई मांग

0

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने फिर दोहराया प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को मुख्यमंत्री को चेहरा घोषित करना चाहिए। जवाब में भाजपा को भी स्थानीय स्तर पर चेहरा लाना होगा। जनता तुलना कर फैसला लेगी। चाहे स्थानीय निकाय हों या फिर विधानसभा के चुनाव, हर बार राज्य में चुनाव मोदी बनाम अन्य हो रहे हैं। इसका लाभ हमें नहीं मिलता।

और पढ़ें
1 of 199

उत्तराखंड में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव होने हैं। हरीश रावत चुनाव में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने पर बार-बार जोर दे रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव कुछ दिन पहले उत्तराखंड दौरे में दूसरी दफा दोहरा चुके हैं कि चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़े जाएंगे। उक्त मामले में हरीश रावत के विचार उनकी निजी राय है। पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में प्रभारी की राय से उलट हरीश रावत ने एक बार फिर सार्वजनिक तौर पर अपनी मांग दोहरा दी। उनके इस रुख को पार्टी हाईकमान को दबाव में लाने की रणनीति के तौर पर देखा जाने लगा है।

अपने आवास पर गुरुवार को मीडिया से बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि पार्टी चुनाव में स्थानीय चेहरा लाएगी तो उसकी तुलना भाजपा को भी स्थानीय चेहरा घोषित करना होगा। फिर जनता दोनों की तुलना करेगी। पार्टियों की तुलना भी आ जाएगी। ऐसे में मोदी जी हर राज्य में केवल गेस्ट आर्टिस्ट के रूप में नजर आएंगे और अपनी बात कहकर चले जाएंगे। पार्टी किसी को भी सीएम उम्मीदवार घोषित कर दे। कोई भी नाम होगा उसके पीछे वह खड़ा रहेंगे। कांग्रेस संगठन में गुटबाजी मामले में उन्होंने कहा कि ये मुद्दा नहीं है। घर में कोई खुश ओर कोई नाखुश रहता है। इस पर बहस की जरूरत नहीं है। सब साथी हैं। एकजुट होकर काम किया है। कोई नाखुश है, उसे संभालना पड़ेगा। जहां संभव होगा, वह करेंगे।

हरीश रावत ने कहा कि वह अपनी बात से हाईकमान को भी अवगत कराएंगे। कुछ दोस्तों की मेहरबानी से चेहरा घोषित करने का मामला आगे बढ़ा। कुछ साथियों ने बात छेड़ी है तो यकीनन बात हाईकमान के सामने जाएगी। जो निर्णय होगा स्वीकार्य होगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रावत ने कहा कि चेहरा घोषित करने की परंपरा हमारी स्थापित की हुई हैं। फिर ये परंपरा नहीं रही। शीला दीक्षित को चेहरा घोषित किया तो दिल्ली में तीसरे नंबर की पार्टी के रूप में रही कांग्रेस लोकसभा चुनाव में संघर्ष की स्थिति में आ गई। उन्होंने कुछ अजूबा नहीं कहा है। पार्टी में गलती करते हैं तो सुधारा भी जाता है। समझाया जाता है। कांग्रेस व भाजपा में अंतर है। वहां ऊपर से नीचे तय होता है। कांग्रेस में नीचे से बहस होती है। मतभेद भी होते हैं। बाद में हाईकमान निर्णय करता है। इतने साल में रणनीतिक तौर पर सीखा है। इसलिए चेहरा घोषित करने पर जोर दिया है।

 

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह [email protected] पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

Comment section

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.