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दिग्‍गज बना रहे दूरी,कृषि बिल विरोधी आंदोलन में मोहब्बत के बीच सियासत को अब भांपने लगी है BKU

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मुजफ्फरनगर। कृषि बिल विरोधी आंदोलन के दौरान भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के आंसू देख उमड़ती मोहब्बत के पीछे राष्‍ट्रीय लोकदल (रालोद) समेत विभिन्न दलों की घुमड़ती सियासी महक को भाकियू का थिंक टैंक भी शायद भांप गया है। बड़ौत के बाद शामली के भैंसवाल में हुई महापंचायत से भाकियू के दिग्गजों की दूरी सारी दास्तां बयां करने के लिए काफी है। इसके साथ ही रालोद की भैंसवाल महापंचायत से अनभिज्ञता जताते भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत का वायरल वीडियो भी बहुत कुछ कह रहा है।

कृषि बिल विरोधी आंदोलन का रुख बदलने वाले भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं में विपक्षी सियासत तुरुप का पत्ता खोज रही है। भाई के आंसू देख बालियान खाप और भाकियू मुखिया चौधरी नरेश टिकैत ने जीआइसी मैदान में महापंचायत का ऐलान किया तो रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी समेत सपा, कांग्रेस, आप के सियासी सूरमा भी भीड़ को वोट में बदलने की रस्साकशी में जुट गए। उधर भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत किसानों के मंच को राजनीतिक नहीं होने देने का दावा कर रहे थे, इधर भाकियू के मंच पर राजनीतिक चहलकदमी के दौरान चौधरी नरेश टिकैत यहां तक कह बैठे कि अजित सिंह को हराकर उनसे भूल हुई है। इसके बाद राष्ट्रीय लोकदल ने महापंचायत के जरिए वोट बैंक को मुट्ठी में बांधने की मुहिम शुरू कर दी। इधर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी किसानों के बहाने अपने समीकरण साधने की रणनीति बनाने में जुटी है। राजनीतिक दलों की मंशा और सियासी मोहब्बत का भान शायद भारतीय किसान यूनियन को अब हो गया है। मथुरा में हुई रालोद की महापंचायत में जरूर भाकियू में अति सक्रिय चौधरी नरेश टिकैत के बेटे गौरव टिकैत पहुंचे, लेकिन बड़ौत में हुई महापंचायत से भारतीय किसान यूनियन के बड़े चेहरे दूर रहे। शुक्रवार को पड़ोसी जिले शामली के भैंसवाल में हुई महापंचायत में भी भाकियू मुखिया नरेश टिकैत या अन्य किसी दिग्गज ने जाने से परहेज किया। भैंसवाल पंचायत में चौधरी नरेश टिकैत के छोटे भाई नरेंद्र टिकैत बतौर खाप प्रतिनिधि जरूर शामिल हुए। इतना ही नहीं, मंच पर सियासी गुफ्तगू होते देख खाप चौधरियों का बार-बार रोकना-टोकना भी यह बताने के लिए काफी है कि भीड़ में वोट तलाशने की सियासी जुगत अब किसी से छिपी नहीं है।

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केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान ने पिछले दिनों रामपुर तिराहा पर हुए आयोजन में साफ कहा था कि आंदोलन अब किसानों का नहीं रहा। यह राजनीतिक हो चुका है। विभिन्न राजनीतिक दल किसानों को ढाल बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। दोबारा बात करने पर केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान ने फिर दोहराया कि आंदोलन की आड़ में किसानों को बरगलाया-बहकाया जा रहा है। आंदोलन अब पूरी तरह राजनीतिक हो चुका है।

जहां किसानों की बात होगी हम वहां साथ : नरेश टिकैत

राजनीति से हमारा कोई लेना देना नहीं है। सारी पंचायत साझे की है। भैंसवाल पंचायत में छोटे भाई नरेंद्र गए थे। किसान महापंचायत के नाम भैंसवाल में पंचायत हुई थी। जहां किसानों की बात होगी, हम वहां साथ हैं। इसमें कोई फर्क नहीं है। सब एक ही हैं।

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