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दुष्कर्म मामले में अफसरों की चुप्पी, विभागीय जांच का पता नहीं

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राजनांदगांव । घुमका ब्लाक के चंवरढाल मिडिल स्कूल के शिक्षक दुर्गेश यादव की हरकत ने शिक्षा विभाग को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोप में पुलिस ने आरोपित शिक्षक दुर्गेश यादव को जेल तो भेज दिया है, लेकिन उसे बचाने की कोशिश करने वाले सहकर्मियों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। शिक्षा महकमे के कई शिक्षकों पर दुष्कर्म मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप है।

ग्रामीण शुरुआत से स्कूल के शिक्षकों के खिलाफ जांच की मांग कर रहे हैं। यहां तक की संकुल समन्वयक पर भी उंगली उठ चुकी है। बावजूद विभागीय जांच नहीं की जा रही थी, लेकिन अब विधानसभा बेग नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक व महिला आयोग से शिकायत के बाद शिक्षा विभाग पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। शायद यही वजह है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने विभाग की सहायक संचालक संगीता राव और महिला व बाल विकास विभाग के दो अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है, पर विडंबना यह है कि अभी तक विभागीय जांच का अता-पता नहीं है। विभागीय अफसरों ने भी चुप्पी साध ली है।

घटना बीते 22 जनवरी की है। जब आरोपित शिक्षक दुर्गेश यादव ने नोट्स ले जाने के लिए पीड़िता छात्रा को स्कूल बुलाया था। छात्रा आरोपित शिक्षक को जानती थी, इसलिए वो गुरु का आदेश मानकर नोट्स लेने स्कूल पहुंच गई। जहां शिक्षक दुर्गेश स्टॉफ रूम में अकेला ही था। नोट्स देने के दौरान शिक्षक की नीयत बदल गई और उसने अपनी ही शिष्य नाबालिग छात्रा के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। छात्रा जैसे-तैसे भागकर वहां से निकली, जिसे रोते हुए कई ग्रामीणों ने देखा। ग्रामीण तत्काल स्कूल गए और शिक्षक से छात्रा के रोने की वजह पूछी। पर शिक्षक ने टालमटोल कर दिया। इसके बाद छात्रा के स्वजन शिक्षक के खिलाफ शिकायत करने आ रहे थे, जिन्हें समाज व इज्जत का हलावा देकर डराया गया। दूसरे दिन जब छात्रा ने आरोपित शिक्षक की नीयत को देखते हुए पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही, तब सभी घुमका थाना पहुंचे। यहां भी दुष्कर्म मामले को दबाने के लिए राजनीतिक दबाव चला। संकुल समन्वयक भी थाने पर ही थे, लेकिन उन्होंने दुष्कर्म जैसी किसी तरह की घटना होने से इंकार कर दिया था। अब उन्हीं संकुल समन्वयक पर मामले को दबाने का आरोप लग रहा है।
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00 बीईओ के फरमान से शिक्षकों में भी रोष

ग्रामीणों के विरोध और विपक्षी नेताओं के लगातार सवालों के बाद शिक्षा विभाग ने विभागीय जांच का आदेश जारी किया है। इधर बीईओ एनके पंचभावे ने शिक्षकों के लिए फरमान जारी कर आरोपों से घिर गए हैं। बीईओ सभी शिक्षकों से चरित्र प्रमाण पत्र मांग रहे हैं, जबकि नियुक्ति के दौरान ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। अब दोबारा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सत्यापन कराकर प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। ब्लाक के कई शिक्षक इस आदेश के विरोध में आ गए है। दुष्कर्म की इस घटना से पहले भी जिले में कई घटनाएं हो चुकी है, जिसमें शिक्षक दुष्कर्म व स्कूली छात्रों से ही छेड़छाड़ के आरोप में जेल जा चुके हैं।

वर्जन

घटना के दौरान स्कूल में कौन-कौन शिक्षक थे, इसकी जानकारी मंगाई गई है। शिक्षक के अलावा स्कूल में जो भी कर्मचारी मौजूद थे, उनसे भी पूछताछ की जाएगी। जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ जरूर कार्रवाई करेंगे। -एचआर सोम, डीईओ

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