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उपद्रव था 70 लोगों की साजिश का अंजाम, 15 दिन पहले लिखी गई थी हिंसा की पटकथा

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नई दिल्ली। कृषि कानून विरोधी आंदोलन के बहाने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में जो अराजकता की स्थिति पैदा हुई और हिंसक उपद्रव हुआ, वह देश-विदेश में रहने वाले 70 लोगों की साजिश का अंजाम था। गणतंत्र दिवस से 15 दिन पहले 11 जनवरी को 70 साजिशकर्ताओं की जूम एप पर मीटिंग हुई थी। इसे खालिस्तान समर्थक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीजेएफ) ने होस्ट किया था। इस मीटिंग में जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि, अधिवक्ता निकिता जैकब व इंजीनियर शांतनु भी शामिल था।

दिल्ली पुलिस ने अब निकिता जैकब व शांतनु को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी कराया है। दोनों की तलाश में 10 से ज्यादा टीमें कई राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। दिल्ली पुलिस अब मो धालीवाल पर नकेल कसने की तैयारी कर रही है। पुलिस की कोशिश है कि उसे भारत लाकर जांच में शामिल कराया जाए।

साइबर सेल के संयुक्त आयुक्त प्रेमनाथ ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि जांच में नया नाम सामने आया है। दिशा रवि ने पीटर फ्रेडरिक को भी ट्वीट में टैग किया था। पीटर खालिस्तानी आतंकी भजन सिंह भिंडर के संपर्क में 2006 से है। पीटर भी खालिस्तान समर्थक समूह के-2 ग्रुप से ताल्लुक रखता है।

पीटर का नाम टूलकिट के रिसोर्स में क्यों डाला गया, इसकी जांच की जा रही है। पीटर वर्तमान में मलेशिया में है। उसने दावा किया है कि वह फासीवाद पर शोध करने वाला एक कार्यकर्ता है। वह उन प्रदर्शनकारियों में शामिल रहा है, जिन्होंने अमेरिका में महात्मा गांधी की मूर्ति खंडित की थी। पुलिस ने अब जूम से जानकारी मांगी है कि बैठक में शामिल 70 लोग कौन-कौन थे। पुलिस यह भी जानना चाह रही है कि बैठक में फ्रेडरिक शामिल था या नहीं

अगले दिन फरार हो गई निकिता

9 फरवरी को साइबर सेल जब निकिता जैकब के मुंबई स्थित घर पहुंची तो पूछताछ के बाद उसके इलेक्ट्रानिक गैजेट्स की जांच की गई। जांच के दौरान शाम हो जाने पर उससे अधिक पूछताछ नहीं की गई। पुलिस टीम ने उसे घर में रहने व 10 फरवरी को दोबारा पूछताछ के लिए उसके घर आने की बात कही थी, लेकिन अगले दिन पुलिस टीम जब उसके घर पहुंची तो वह गायब मिली। पुलिस को पता चला है कि निकिता ने मुंबई में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दायर की है।

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ऐसी रची गई पूरी साजिश…

खालिस्तानी संगठनों से जुड़े पीजेएफ के मो धालीवाल ने कनाडा में ही रहने वाली सहयोगी पुनीत के जरिये निकिता से संपर्क किया था। इसके पीछे मकसद गणतंत्र दिवस से पूर्व जोरदार तरीके से ट्विटर अभियान छेड़ना था। 11 जनवरी को हुई 70 लोगों की जूम मीटिंग में मो धालीवाल भी शामिल था। मीटिंग में धालीवाल ने कहा था कि मुद्दे को बड़ा बनाना है।

आंदोलनकारियों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना इसका मकसद था। राजधानी में आइटीओ पर स्टंट के दौरान ट्रैक्टर पलटने से चालक की मौत हुई थी, लेकिन उसके पुलिस की गोली से मारे जाने की अफवाह फैलाई गई, जोकि इसी साजिश का एक अंश था। घटना के तुरंत बाद साजिशकर्ताओं ने ये अफवाह फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटी व एक्टिविस्ट से संपर्क किया था। चूंकि दिशा रवि, ग्रेटा थनबर्ग को जानती थी, इसलिए इसमें उसकी भी मदद ली गई।

शांतनु ने बनाया था वाट्सएप ग्रुप

टूलकिट तैयार करने के लिए जो वाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, उसका एडमिन शांतनु था। 23 दिसंबर को उसने यह वाट्सएप ग्रुप बनाया था। वह महाराष्ट्र के बीड़ का रहने वाला है। निकिता, शांतनु और दिशा रवि तीनों एक्सआर नाम के एनजीओ से जुड़े हुए हैं।

वाट्सएप पर दिशा और ग्रेटा में हुई थी बातचीत…

टूलकिट हटाने के बाद ग्रेटा की दिशा से वाट्सएप पर चैट हुई थी। दिशा ने ग्रेटा से कहा था कि क्या हम कुछ देर के लिए कुछ न बोलें। मैं वकील से बात करने वाली हूं। मुझे अफसोस है, लेकिन हमारा नाम इसमें है। हमारे खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियां निषेध अधिनियम (यूएपीए) लगाया जा सकता है

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