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योग करने वालों को तनाव, बैचेनी और डिप्रेशन लॉकडाउन में कम हुआ

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नई दिल्ली। योग की ताकत को पूरी दुनिया ने पहचाना, जाना और माना है। यह शरीर को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने में काफी मददगार है। आईआईटी दिल्ली की एक स्टडी रिपोर्ट के अनुसार योग करने वालों को लॉकडाउन के दौरान चार से दस हफ्ते के दौरान तनाव, बैचेनी और डिप्रेशन का सामना कम करना पड़ा। यही नहीं, इस दौरान योग करने वालों का मानसिक स्वास्थ्य भी काफी अच्छा रहा। योगा एन इफेक्टिव स्ट्रैटजी फॉर सेल्फ मैनेजमेंट ऑफ स्ट्रेस रिलेटेड प्रॉब्लम्स एंड वेलबिइंग नाम से यह अध्ययन आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने किया है। इस अध्ययन को प्लस वन जनरल में प्रकाशित भी किया गया है।

ये बनाया आधार

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इस अध्ययन में 668 वयस्कों ने कोविड-19 के दौरान (अप्रैल 26 से 8 जून) भाग लिया। प्रतिभागियों को योग करने वाले, आध्यात्मिक जीवन में लीन रहने वाले और दोनों में ही शामिल न रहने वालों के समूह में बांटा गया। इसमें उनके रोजाना के अभ्यास और उसकी प्रतिक्रियाओं को आधार बनाया गया। योग करने वालों को उनके प्रैक्टिस की अवधि- दीर्घकालिक, मध्य कालिक और शुरुआती के आधार पर जांचा गया।

स्टडी में ये आया सामने

लंबे समय से योग करने वालों का खुद पर नियंत्रण और कोविड से बचने की संभावना अधिक पाई गई। जबकि इसके मुकाबले मध्यकालिक और कुछ समय पहले ही योग करने वालों में यह संभावना लंबे समय से योग करने वालों के मुकाबले कम थी। वहीं लंबे समय से योग करने वालों में बैचेनी और डिप्रेशन की दिक्कत नहीं के बराबर थी। उनका मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर था।

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