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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आड़ में भूमाफिया द्वारा की जा रही है न्यायपालिका की अवमानना

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*निजी समाचार पत्र की आड़ में पत्रकारिता के मूल उद्देश्यों के साथ किया जा रहा है मजाक
*भू माफिया के पुराने क्रियाकलापों पर पर्दा डालने के लिए की जा रही है पत्रकारिता व राजनीति
*कहीं ब्यूरो चीफ तो कहीं संवाददाता बन पुलिस अधिकारियों को लिया जा रहा है अर्दब मे ना करने पर बर्खास्त करवाने की दी जाती है धमकियां
* पत्रकारिता की आड़ में सही कार्यों को गलत और गलत को सही कराने का है मामला
*पीड़ित ने जिला सूचना अधिकारी व प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से न्याय की लगाई गुहार

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लखनऊ । प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के उपरांत वेब न्यूज़ पोर्टल के पत्रकारों की भरमार है । जो अपने को पत्रकार बता कर अधिकारियों को अर्दब में लेकर अपने मन में कार्यों के लिए प्रेरित करते हैं और ना करने पर बर्खास्त करा देने की धमकी तक दे डालते हैं और तो और पत्रकारिता की आड़ में खुद ही अपराधी तक बनने की बनने में समय नहीं लगाते हैं , ऐसे निजी समाचार पत्रों के पास ना तो खुद का अपना कार्यालय है ना ही खुद की प्रेस प्राप्त समाचार के अनुसार राजधानी के थाना ठाकुरगंज स्थित वार्ड बालागंज खसरा संख्या 257 अपना कार्य कर रहे थे पूरे दिन सब कुशल कार्य चल रहा था ।

ऐसे में एक निजी समाचार पत्र का पत्रकार बता कर पीड़ित की जमीन पर रंगदारी मांगने लगा जब पीड़ित ने बताया कि यह उसकी पैतृक संपत्ति है और माननीय न्यायालय ने मुझे मेरे कब्जे से बेदखल न करने एवं अन्य पक्षकारों को पीड़ित की जमीन पर कोई भी प्रकार का कब्जा न करने का आदेश दे रखा है तो ऐसे में तथाकथित पत्रकार अर्दब मे लेते हुए पुलिस के द्वारा कार्य रकबा दूंगा कार्य नहीं कर पाओगे यहां करना है तो मुझे हिस्सा दो इत्यादि शब्दों के साथ ही पुलिसबुलाकर कार्य रुकवा दिया गया और जैसे ही पुलिस मौके से गयी तथाकथित पत्रकार द्वारा अपने साथियों के साथ बाउंड्री और गेट गिरा दिया और तो और पीड़ित का गेट एवं रखा हुआ सामान भी चुरा ले गए पीड़ित ने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस एवं उच्चाधिकारियों को पत्र के माध्यम से दी है ।

गौरतलब यह है कि तथाकथित पत्रकार के परिवार मे शुरू से किसी के प्लाट पर कब्जा करना उसको बनने न देना रंगदारी मांगने फर्जी रजिस्ट्री करवा कर बेच देना इत्यादि कार्य लगभग10 12 वर्षो से निरंतर क्षेत्र में किया जा रहा है जिससे बचने के लिए कही पत्रकारिता की आड़ तोह कही भाजपा में पदाधिकारी होने का डर दिखाकर अपने मनमाफिक कार्य कराकर अपनी जेबें लगातार भरी जा रही है जबकि माननीय मुख्यमंत्री योगी जी के सपने आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय ब विकास के वादे को ठेंगा दिखा रहे हैं अब देखना यह है कि राजधानी के तेजतर्रार पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर एवं उनकी तेजतर्रार टीम कैसे नियंत्रण कर कार्रवाई कर सरकार के मंसूबों पर पानी भरने वालों पर शिकंजा कसती है ।

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