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अलबेला साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद की 138वीं काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

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बीघापुर/उन्नाव। अलबेला साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद की 138वीं काव्य गोष्ठी में रग्घूखेड़ा स्थित विश्वदेव मंदिर परिसर पर आयोजित कार्यक्रम में रायबरेली जनपद के दो रचनाकारों की कृतियों का विमोचन संपन्न हुआ। पहली स्थिति डॉ ललित त्रिपाठी द्वारा रचित मधुबन फिर आ गया सामने और दूसरी ब्रह्मानन्द सरस्वती द्वारा रचित मैं तुम्हारा प्रेम पाता का विमोचन उपस्थित कवियों व शिक्षाविदों ने किया। दोनों ही कृतियों पर अपना समीक्षा संबोधन शिक्षक अनुज कुमार तिवारी ने प्रस्तुत किया। डॉ ललित त्रिपाठी पूर्व में 15 वर्षों तक दैनिक भास्कर के संपादक रहे लंबे अंतराल के बाद उनकी पहली पुस्तक मधुबन फिर आ गया सामने प्रकाशित होकर  पाठकों तक आई है।इसमें समाहित गीत आधुनिक कविता की चुनौतियों के रूप में जाने जारहे हैं, कविता वही जो हृदय को छू ले वही उसकी सार्थकता होती है ललित त्रिपाठी के गीत नवनीत नई कविताएं नई दिशा देने का कार्य कर रही हैं। वहीं ब्रह्मानंद सरस्वती द्वारा रचित मैं तुम्हारा प्रेम पाता काव्य सौंदर्य को रेखांकित करती हुई आध्यात्मिक प्रेम और जीवन मनुष्य सांसारिक प्रेम के साथ छायावाद और रहस्यवाद की छाप भी लिए हुए हैं। कविता का उद्देश्य आनन्द है और वह आनन्द विभिन्न सोपानो से होता हुआ मन के तारों को झंकृत करता है। कार्यक्रम में 3 दर्जन से अधिक कवियों ने अपनी उपस्थिति दी। अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य श्री राम सिंह ने की उन्होंने अपने संबोधन में कहा कविता, कविता के लिए की जाए और कविता जीवन के लिए की जाए दोनों में ही अंतर है कविता जो जीवन के लिए की जाए वही सार्थक कविता है। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक रमेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा बेटियों के सम्मान में गांव घर की निगाहों के दो रूप हैं कोई कैसे संभाले बहन बेटियां।विशिष्ट अतिथि के रूप में बीडी सिंह और राम हेत सिंह मौजूद रहे कार्यक्रम के संयोजक डॉ राम किशोर वर्मा और अनिल वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया संचालन कभी दिनेश उन्नावी ने किया।

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